Jharkhand Politics: झारखंड की सियासत में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर आगामी 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन सत्ताधारी इंडिया गठबंधन और विपक्षी एनडीए, दोनों ही खेमों में उम्मीदवारों के नामों को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। यह चुनाव झामुमो के कद्दावर नेता शिबू सोरेन के असामयिक निधन और भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हुई सीटों पर कराया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1 जून से 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। इस राजनीतिक मुकाबले में जहां संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत दिखाई दे रही है, वहीं विपक्ष में बैठी भाजपा ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बनाने के संकेत दे दिए हैं।
Jharkhand Politics: चुनाव का पूरा शेड्यूल- जानें कब डाले जाएंगे वोट और कब आएंगे नतीजे
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, झारखंड की इन दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। राजनीतिक दलों के पास अपने पत्ते खोलने और नामांकन दाखिल करने के लिए 8 जून तक का समय उपलब्ध है।
इसके बाद अगले दिन, यानी 9 जून को दाखिल किए गए सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी। यदि कोई प्रत्याशी अपना नाम वापस लेना चाहता है, तो वह 11 जून की दोपहर तक ऐसा कर सकेगा। इसके बाद यदि आवश्यक हुआ, तो 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा भवन में मतदान कराया जाएगा। वोटों की गिनती भी उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू हो जाएगी, जिससे देर शाम तक नतीजे साफ होने की उम्मीद है।
विधानसभा का गणित: एक सीट के लिए चाहिए कितने विधायकों का वोट?
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्यसभा की एक सीट पर सीधे जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी। इस लिहाज से दोनों सीटों पर कब्जा जमाने के लिए कुल 56 वोटों की जरूरत है।
सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) की बात करें तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में इस खेमे के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 4 और भाकपा-माले (CPI-ML) के 2 विधायक शामिल हैं। यह आंकड़ा दोनों सीटों पर आसानी से फतह हासिल करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त माना जा रहा है।
एनडीए की चुनौती: 24 विधायकों के साथ उलटफेर की उम्मीद
दूसरी तरफ, विपक्षी एनडीए (भारतीय जनता पार्टी, आजसू, जदयू और लोजपा) के पाले में फिलहाल कुल 24 विधायक ही मौजूद हैं। इस संख्या बल के हिसाब से एनडीए को एक सीट पर भी जीत हासिल करने के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त मतों की दरकार होगी।
संख्या बल कम होने के बावजूद भाजपा ने एक सीट पर अपने उम्मीदवार को उतारने की हुंकार भर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए की पूरी रणनीति सदन में मौजूद निर्दलीय विधायकों, छोटे दलों के समर्थन और ऐन वक्त पर होने वाली संभावित ‘क्रॉस वोटिंग’ पर टिकी हुई है। यदि विपक्ष अतिरिक्त वोट जुटाने में कामयाब रहता है, तो सत्ताधारी गठबंधन के समीकरण बिगड़ सकते हैं।
जयराम महतो की JLKM बनी ‘एक्स फैक्टर’, एक-एक वोट पर टिकी नजरें
इस पूरे चुनावी घमासान के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख और एकमात्र विधायक जयराम महतो की भूमिका बेहद अहम हो गई है। जयराम महतो ने फिलहाल किसी भी बड़े राजनीतिक गठबंधन के साथ जाने का खुलकर ऐलान नहीं किया है।
“झारखंड की राजनीति में उभरते हुए नेता जयराम महतो का एक-एक कदम इस समय दोनों गठबंधनों के लिए मायने रखता है। उनका एक वोट और सदन के अन्य निर्दलीय सदस्यों का झुकाव यह तय करेगा कि चुनाव निर्विरोध संपन्न होंगे या फिर 18 जून को विधायकों को पोलिंग बूथ तक जाना पड़ेगा।”
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर जेएमएम और बीजेपी में आमने-सामने की जंग
चुनाव की शुरुआत के साथ ही राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र लिखकर सनसनी फैला दी है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, फिर भी उसका चुनाव लड़ने का फैसला सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।
झामुमो के इन गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने कहा है कि सत्तारूढ़ दल का यह पत्र उनकी हताशा और आंतरिक डर का नतीजा है। भाजपा का कहना है कि लोकतंत्र में हर दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है और वे नियमों के तहत ही अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
Jharkhand Politics: क्या कांग्रेस को मिलेगी दूसरी सीट?
सत्तारूढ़ खेमे में सीटों के बंटवारे को लेकर भी बैठकों का लंबा दौर चल रहा है। गठबंधन के सूत्रों के मुताबिक, झामुमो की एक सीट पर दावेदारी पूरी तरह तय है, जबकि दूसरी सीट पर सहयोगी दल कांग्रेस अपने उम्मीदवार को उतारने के लिए पूरा जोर लगा रही है। हालांकि, गठबंधन के भीतर अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है। माना जा रहा है कि नामांकन की आखिरी तारीख से एक या दो दिन पहले दोनों ही खेमे अपने-अपने पत्ते पूरी तरह से खोल देंगे।
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