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Jharkhand Rajya Sabha Election: JMM और कांग्रेस में तनातनी के बीच प्रदीप यादव का बड़ा बयान, क्या बनी रहेगी INDIA गठबंधन की एकता?

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड की सियासत में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त सरगर्मी तेज है। सत्तारूढ़ गठबंधन के दो मुख्य साथियों, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों के नाम को लेकर छिड़ी खींचतान अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बनी हुई है। शनिवार (6 जून, 2026) को इस तनाव के बीच कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता प्रदीप यादव ने मोर्चा संभाला और गठबंधन में ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की कोशिश की। प्रदीप यादव ने जोर देकर कहा कि INDIA गठबंधन अटूट है और चुनाव के दौरान इसकी एकजुटता साफ तौर पर दिखाई देगी।

Jharkhand Rajya Sabha Election: क्या है विवाद की मुख्य वजह?

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब 4 जून को कांग्रेस ने अचानक और एकतरफा फैसला लेते हुए प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस के इस कदम से गठबंधन की बड़ी हिस्सेदार जेएमएम (JMM) नाराज बताई जा रही है। जेएमएम नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन में सीटों और उम्मीदवारों का फैसला आपसी सहमति से होना चाहिए था। इसी नाराजगी के बाद रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई, जिसमें जेएमएम के कई नेताओं ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का सुझाव तक दे डाला है।

प्रदीप यादव ने एकता पर दिया जोर: “सिर्फ एक सीट का मामला नहीं”

गठबंधन में दरार की खबरों को खारिज करते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि देश और राज्य के मौजूदा हालात को देखते हुए धर्मनिरपेक्ष ताकतों का एकजुट रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “INDIA गठबंधन की एकता स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। अगर हम राष्ट्र और राज्य के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर अलग हो जाते हैं, तो यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की जनता की उम्मीदों से जुड़ा बड़ा मामला बन जाएगा।”

प्रदीप यादव का यह बयान कांग्रेस की ओर से जेएमएम को मनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि गठबंधन के भीतर बातचीत के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं और अंतिम फैसला राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में गेंद

जेएमएम के भीतर उठ रही आवाजों और कांग्रेस की घोषणा के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर टिकी हैं। शुक्रवार को हुई हाई-लेवल बैठक में पार्टी के रणनीतिकारों ने सीएम को यह सुझाव दिया है कि जेएमएम को अपने संख्या बल के आधार पर दोनों सीटों पर दावेदारी करनी चाहिए। हालांकि, पार्टी ने अंतिम फैसला लेने का पूरा अधिकार हेमंत सोरेन को ही सौंप दिया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेएमएम भी अपने उम्मीदवार उतारती है, तो यह INDIA गठबंधन के लिए झारखंड में एक बड़ा झटका हो सकता है। इससे न केवल राज्यसभा की सीटों पर असर पड़ेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी गठबंधन की नींव कमजोर हो सकती है।

जेएमएम की नाराजगी और कांग्रेस की मजबूरी

जेएमएम के सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार में उनकी भूमिका सबसे बड़ी है, इसलिए वे राज्यसभा में भी अपनी मजबूती चाहते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस केंद्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रणव झा जैसे अनुभवी चेहरे को उच्च सदन में भेजना चाहती है। प्रणव झा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने अपनी मंशा साफ कर दी है, लेकिन अब बिना जेएमएम के समर्थन के उन्हें जीत की राह आसान नहीं दिख रही है।

प्रदीप यादव ने जिस तरह से “देश की जनता” और “महत्वपूर्ण मोड़” की बात कही है, उससे साफ है कि कांग्रेस इस लड़ाई को सिर्फ स्थानीय न रखकर राष्ट्रीय स्तर की एकता से जोड़ रही है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस के इस ‘एकतरफा’ फैसले को स्वीकार करते हैं या फिर अपनी शर्तों पर नया समीकरण तैयार करते हैं।

Jharkhand Rajya Sabha Election: क्या सुलझ पाएगा समीकरण?

झारखंड की राजनीति में अगले 48 घंटे काफी अहम होने वाले हैं। क्या कांग्रेस अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेकर जेएमएम के साथ नया समझौता करेगी, या फिर जेएमएम बड़े दिल का परिचय देते हुए कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देगी? प्रदीप यादव के भरोसे के बावजूद जमीनी हकीकत फिलहाल कांटे भरी नजर आ रही है। अगर दोनों दल अपनी जिद पर अड़े रहे, तो इसका सीधा फायदा विपक्षी दल बीजेपी (BJP) को मिल सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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