Kanpur Crime News: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने एक 13 साल की मासूम बच्ची के साथ छह महीने तक दरिंदगी करने वाले आरोपी कमालुद्दीन उर्फ मुन्ना भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पवन कुमार राय ने दोषी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह पूरी घटना तब सामने आई जब मानसिक रूप से कमजोर पीड़ित बच्ची गर्भवती हो गई और उसने एक बेटी को जन्म दिया। आज वह पीड़ित बच्ची 16 साल की हो चुकी है और अपनी डेढ़ साल की मासूम बेटी को एक खिलौना समझकर पाल रही है। कोर्ट ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जुर्माने की पूरी रकम मां-बेटी को देने और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उनके पुनर्वास और संरक्षण के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए हैं।
Kanpur Crime News: बिस्किट का लालच देकर पड़ोसी ने किया था मुंह काला
यह दर्दनाक दास्तां कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र की है। पीड़ित बच्ची जब महज 13 साल की थी और 8वीं क्लास में पढ़ती थी, तब पड़ोसी कमालुद्दीन उर्फ मुन्ना भाई ने उसकी मजबूरी और मानसिक कमजोरी का फायदा उठाया।
गर्मी के दिनों में जब वह रात को अपने घर के आंगन में नानी के साथ सोती थी, तब नानी के सोने के बाद कमालुद्दीन वहां आता था। वह मासूम बच्ची को बिस्किट और चंद रुपयों का लालच देकर पास के एक सुनसान पार्क में ले जाता था और उसके साथ दुष्कर्म करता था। आरोपी ने करीब छह महीने तक इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
बीमारी के बहाने खुला राज, 13 साल की उम्र में बनी मां
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब अचानक बच्ची की तबीयत खराब होने लगी। उसकी मौसी (वादिनी), जो उसकी मां की मौत के बाद उसका पालन-पोषण कर रही थीं, उसे डॉक्टर के पास ले गईं। जब डॉक्टरों ने जांच की, तो पता चला कि वह तीन महीने की गर्भवती है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जब बच्ची से प्यार से पूछा गया, तो उसने रोते हुए पड़ोसी कमालुद्दीन की सारी करतूत बयां कर दी। इसके बाद उसकी मौसी ने 17 अक्टूबर 2023 को बाबूपुरवा थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया था।
कोर्ट में गूंजी मासूम की दास्तां, 9 गवाहों ने दिलाई सजा
विशेष लोक अभियोजक चंद्रकांत शर्मा ने बताया कि इस केस को मजबूती से अदालत के सामने पेश करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। मानसिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पीड़ित किशोरी ने कोर्ट के सामने खड़े होकर रोते हुए अपने साथ हुई पूरी आपबीती सुनाई।
अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कमालुद्दीन को दोषी पाया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पीड़िता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षति को कम नहीं आंका जा सकता, इसलिए दोषी को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा दी जाती है।
खुद बच्ची है मां, बेटी को समझती है अपनी ‘गुड़िया’
आज बाबूपुरवा के उस तंग मकान में एक बेहद भावुक नजारा देखने को मिलता है। 16 साल की यह नाबालिग मां अपनी डेढ़ साल की बेटी को हर वक्त छाती से चिपकाए रखती है। मानसिक कमजोरी के कारण वह मां और बेटी के गंभीर रिश्ते को नहीं समझ पाती।
जब भी कोई उससे पूछता है कि यह बच्ची कौन है, तो वह मासूमियत से जवाब देती है, “यह मेरी गुड़िया है।” वह अपनी बेटी को किसी खिलौने की तरह प्यार करती है और उसे किसी दूसरे की गोद में भी नहीं देती। घर की माली हालत खराब होने के कारण उसकी मौसी और परिवार के अन्य लोग जैसे-तैसे दोनों का खर्च उठा रहे हैं।
कोर्ट ने दिए मां-बेटी के पुनर्वास और संरक्षण के आदेश
अधिवक्ता चंद्रकांत शर्मा के मुताबिक, वे किशोरी को अक्सर कोर्ट इसलिए नहीं बुलाते थे क्योंकि वह हर बार अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर आती थी, जिसे देखकर सबका दिल भर आता था। कोर्ट ने भी इस बात को गंभीरता से नोट किया।
अपने आदेश में न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ‘पीड़िता प्रतिकर योजना’ के तहत दोनों मां-बेटी को यथोचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही समाज कल्याण विभाग के सहयोग से उनकी आगे की देखरेख, पढ़ाई, सुरक्षा और समाज में सम्मानजनक पुनर्वास के उपाय तुरंत सुनिश्चित किए जाएं।
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