Nipam Chauhan: भारतीय खेल जगत से इस वक्त की एक बेहद गौरवशाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली देश की होनहार धाविका निपम चौहान (Nipam Chauhan) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे का मान बढ़ाते हुए इतिहास रच दिया है। हांगकांग में आयोजित ‘अंडर-20 जूनियर एशियन गेम्स चैंपियनशिप’ (Under-20 Junior Asian Games Championship) में निपम चौहान ने अपनी अद्भुत रफ्तार का जलवा बिखेरते हुए महिला वर्ग की प्रतिष्ठित 100 मीटर दौड़ स्पर्धा में शानदार कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम कर लिया है।
शामली एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव जबर सिंह खैवाल ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि निपम ने यह दौड़ महज 11.62 सेकंड में पूरी कर देश को यह ऐतिहासिक सफलता दिलाई। इस जीत की सबसे खास बात यह है कि पूरे 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद किसी भारतीय महिला एथलीट ने जूनियर एशियन गेम्स की इस सबसे तेज दौड़ स्पर्धा (100 मीटर) में भारत के लिए कोई मेडल जीतने का गौरव हासिल किया है। निपम की इस ऐतिहासिक कामयाबी से न सिर्फ उनका पैतृक गांव बल्कि पूरा देश गर्व से झूम उठा है।
आईये विस्तार से जानते हैं कि निपम ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितना संघर्ष किया, उनका पुराना रिकॉर्ड क्या रहा है और भारत लौटने पर उनके स्वागत के लिए क्या खास तैयारियां की जा रही हैं।
Nipam Chauhan: महज 11.62 सेकंड में तय किया पदक तक का सफर
हांगकांग में 28 से 29 मई 2026 तक आयोजित इस दो दिवसीय जूनियर एशियन गेम्स चैंपियनशिप में भारत की तरफ से कई नेशनल खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन सबकी नजरें शामली की इस रफ्तार की रानी पर टिकी हुई थीं। महिला वर्ग के फाइनल मुकाबले में निपम चौहान ने शुरुआत से ही अपनी विरोधी धाविकाओं को कड़ी टक्कर दी।
उन्होंने सिर्फ 11.62 सेकंड का समय निकालते हुए फिनिशिंग लाइन को पार किया और तीसरे स्थान पर रहते हुए ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा कर लिया। खेल जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच इस तरह का प्रदर्शन करना निपम की बेहतरीन मानसिक और शारीरिक तैयारी को दर्शाता है।
नेशनल रिकॉर्ड भी है निपम चौहान के नाम
यह पहली बार नहीं है जब निपम ने ट्रैक पर अपनी रफ्तार से लोगों को हैरान किया हो। इससे पहले घरेलू स्तर पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। निपम चौहान ने नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में महज 11.52 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी करके एक बड़ा नेशनल रिकॉर्ड (National Record) भी अपने नाम किया हुआ है।
इसी बेहतरीन फॉर्म और लगातार की गई कड़ी मेहनत की बदौलत उन्हें हांगकांग में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चुना गया था, जहां उन्होंने सेलेक्टर्स और देश की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरकर दिखा दिया।
कोच शुभम बालियान के मार्गदर्शन ने बदली निपम की किस्मत
एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने तक का निपम का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके निजी कोच शुभम बालियान का बहुत बड़ा योगदान और कड़ी ट्रेनिंग रही है।
स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि कोच शुभम बालियान ने निपम की प्रतिभा को बेहद शुरुआती दिनों में ही पहचान लिया था। उन्होंने गांव पावटी कलां की मिट्टी के ट्रैक से लेकर आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक तक निपम की रनिंग तकनीक, स्टैमिना और टाइमिंग पर लगातार काम किया। यही वजह है कि आज निपम की इस कामयाबी का श्रेय उनके कोच की दूरदर्शिता और समर्पण को भी दिया जा रहा है।
Nipam Chauhan: दिल्ली से शामली तक निकलेगी भव्य स्वागत यात्रा, ढोल-नगाड़ों से गूंजेगा गांव
शामली एथलेटिक्स सचिव जबर सिंह खैवाल ने बताया कि देश का नाम रोशन करने वाली इस स्वर्णिम बेटी के भारत लौटने पर एक ऐतिहासिक और भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया जाएगा। निपम चौहान जैसे ही दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगी, वहां खेल प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
इसके बाद उनके गृह जनपद शामली में निपम के सम्मान में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और फूलों के हार के साथ एक बहुत बड़ी और विशाल स्वागत यात्रा (Victory Procession) निकाली जाएगी। यह विजय यात्रा शामली शहर से शुरू होकर टिटौली, सेवापुर, लपराना, टपराना, झिंझाना और गाड़ी वाले सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों से होते हुए गुजरेगी।
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