Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक है, लेकिन महागठबंधन के दल RJD और कांग्रेस जमीनी हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। एक ताजा ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इन दलों की रणनीति और संगठन में कमियां हैं, जिससे NDA को फायदा हो सकता है। नीतीश कुमार और BJP की जोरदार तैयारियों के सामने महागठबंधन कमजोर पड़ रहा है। बिहार के गांवों में लोग रोजगार, शिक्षा और विकास की बात कर रहे हैं, लेकिन RJD-कांग्रेस की रणनीति पुराने मुद्दों पर अटकी है। यह खबर बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बन गई है।
Bihar Chunav: RJD-कांग्रेस में कमजोर संगठन
रिपोर्ट में बताया गया कि RJD और कांग्रेस का संगठन ग्रामीण इलाकों में कमजोर है। RJD की ताकत लालू यादव और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता पर टिकी है, लेकिन बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी है। कांग्रेस की स्थिति और खराब है, क्योंकि उसका जनाधार पिछले कई सालों से सिमट गया है। बिहार में कांग्रेस 2020 के चुनाव में 70 सीटों पर लड़ी, लेकिन सिर्फ 19 जीती। इस बार भी सीट बंटवारे और CM उम्मीदवार को लेकर दोनों दलों में खींचतान है। यह महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है।
पुराने मुद्दों पर अटका गठबंधन
महागठबंधन अभी भी जाति और पुराने नारों पर निर्भर है। तेजस्वी यादव MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर जोर दे रहे हैं, लेकिन बिहार के लोग अब रोजगार, बिजली, सड़क और शिक्षा जैसे मुद्दों पर वोट देना चाहते हैं। CPI और CPM जैसे छोटे दल भी महागठबंधन में शामिल हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित है। माकपा नेता एमए बेबी ने कहा कि गठबंधन का लक्ष्य BJP को हराना है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह रणनीति काम नहीं कर रही। ग्रामीण लोग NDA की योजनाओं जैसे पेंशन और दीदी की रसोई से प्रभावित हैं।
NDA को मिल सकता है फायदा
बिहार में नीतीश कुमार और BJP की जोड़ी मजबूत नजर आ रही है। पीएम मोदी की रैलियां और नीतीश की योजनाएं ग्रामीण वोटरों को लुभा रही हैं। दूसरी ओर, महागठबंधन की कमजोर रणनीति और आपसी मतभेद NDA के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लोग चाहते हैं कि महागठबंधन नई सोच के साथ आए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं दिख रहा। यह स्थिति बिहार चुनाव में NDA की जीत का रास्ता आसान कर सकती है।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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