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Hariyali Teej 2026: 15 अगस्त को रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Hariyali Teej 2026: सावन का पावन महीना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में देवों के देव महादेव और जगज्जननी माता पार्वती की उपासना का विशेष विधान है। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। यह पावन पर्व पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस वर्ष उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को पूरे देश में अपार श्रद्धा के साथ रखा जाएगा।

हरियाली तीज का पर्व प्रकृति के सौंदर्य और दांपत्य जीवन के अटूट प्रेम का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। आइए जानते हैं इस वर्ष हरियाली तीज की सही तिथि, पूजा के शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि के बारे में।

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 2026 की तिथि और उदया तिथि का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त 2026 को शाम 06:46 बजे से हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 15 अगस्त 2026 को शाम 05:28 बजे होगा। सनातन धर्म में किसी भी व्रत या पर्व की तिथि का निर्धारण सूर्योदय कालीन तिथि यानी उदया तिथि के आधार पर किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि को ही पूरे दिन के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मान्य माना जाता है। इसलिए 15 अगस्त 2026, शनिवार के दिन ही हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा। इस दिन पूरे देश में महिलाएं प्रातकाल से ही व्रत के नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की तैयारियों में जुट जाएंगी।

हरियाली तीज 2026 के शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक माना जाता है। 15 अगस्त को पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:35 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान और संकल्प लेना उत्तम माना जाता है।

दोपहर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त 12:17 बजे से 01:08 बजे तक उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा दोपहर 02:51 बजे से 03:42 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा। संध्याकाल की पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त शाम 07:06 बजे से 07:29 बजे तक और अमृत काल रात 08:18 बजे से 09:53 बजे तक रहेगा।

हरियाली तीज का पौराणिक और धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ही भगवान शिव ने माता पार्वती के समर्पण और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

इसी कारण यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का पावन प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो सुहागिन महिला इस दिन पूरे मनोयोग से व्रत रखती है, उसे अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। इसके साथ ही अविवाहित कन्याओं को मनचाहा और योग्य वर प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है।

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज की संपूर्ण पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि हरा रंग प्रकृति और सौभाग्य का प्रतीक है। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके गंगाजल छिड़कें और व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें, जिसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी और चुनरी शामिल हो। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और चंदन चढ़ाएं। फिर धूप-दीप जलाकर हरियाली तीज की कथा पढ़ें और अंत में आरती करके परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

हरियाली तीज का पावन पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में प्रकृति के संरक्षण और वैवाहिक जीवन में प्रेम व सामंजस्य का संदेश भी देता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ की गई पूजा-अर्चना से साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

Post-Meal Walking Benefits: खाना खाते ही बिस्तर पर लेट जाते हैं? जानें इससे शरीर को हो सकते हैं कौन-कौन से नुकसान

Post-Meal Walking Benefits: लंच या डिनर करने के तुरंत बाद आलस आना और मन करना कि बस कुर्सी पर बैठ जाएं या बिस्तर पर लेट जाएं, एक आम बात है। हालांकि, यह छोटी सी आदत आपकी सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे पेट को उसे पचाने के लिए ऑक्सीजन और सही माहौल की जरूरत होती है। खाना खाते ही बैठ जाने या लेट जाने से पाचन क्रिया बेहद सुस्त हो जाती है, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

Post-Meal Walking Benefits: खाने के बाद तुरंत बैठने या लेटने से शरीर को होने वाले नुकसान

खाना खाकर तुरंत आराम करने या लेटने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसके मुख्य नुकसान निम्नलिखित हैं:

  • एसिडिटी और सीने में जलन: खाना खाकर सीधे बैठने या थोड़ा झुककर लेटने से पेट पर दबाव पड़ता है। इससे पेट का एसिड ऊपर गले और सीने की तरफ बढ़ने लगता है, जिसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकारें और ब्लोटिंग (पेट में भारीपन) की शिकायत हो जाती है।

  • वजन और पेट की चर्बी बढ़ना: भोजन से मिलने वाली कैलोरीज को बर्न करने के लिए शारीरिक हलचल जरूरी है। खाना खाते ही लेटने या बैठने से यह एनर्जी बर्न होने के बजाय फैट बनकर जमने लगती है, विशेष रूप से पेट के आसपास चर्बी तेजी से बढ़ती है।

  • ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल: भोजन के बाद खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है। यदि शरीर में कोई हलचल नहीं होगी, तो मांसपेशियां इस शुगर का सही इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक हो जाता है।

Post-Meal Walking Benefits: खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक के फायदे

खाना खाने के तुरंत बाद कोई हैवी एक्सरसाइज या रनिंग करने की आवश्यकता नहीं है; केवल सामान्य गति से 10 से 15 मिनट टहलना ही सेहत के लिए चमत्कारिक साबित हो सकता है।

  • सुचारू और तेज पाचन: हल्की वॉक करने से पेट और आंतों में भोजन सही तरीके से आगे बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया फास्ट होती है और गैस व अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

  • ब्लड शुगर रहता है नियंत्रित: कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि खाने के तुरंत बाद 10-15 मिनट टहलने से ब्लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता। डायबिटीज के मरीजों और इससे बचाव के लिए यह बेहद कारगर तरीका है।

  • हृदय स्वास्थ्य में सुधार: हल्की वॉक से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, जिससे दिल लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।

  • मेटाबॉलिज्म में सुधार और वजन नियंत्रण: भोजन के बाद टहलने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है, जो खाए गए भोजन को तुरंत ऊर्जा में बदल देता है। इससे शरीर में अतिरिक्त फैट जमा नहीं होता और वजन नियंत्रण में रहता है।

खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने की सुस्ती को छोड़कर रोजाना केवल 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। यह एक छोटी सी आदत आपके पाचन, दिल और ब्लड शुगर को दुरुस्त रखकर लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगी।

Shivvas in Sawan 2026: सावन में रुद्राभिषेक से पहले ‘शिववास’ देखना जरूरी है? जानें कब अभिषेक करने से चमकती है किस्मत

Shivvas in Sawan 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भगवान शिव की पूजा और विशेष रूप से रुद्राभिषेक का अत्यंत धार्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि तिथियों और काल की गणना के आधार पर महादेव का निवास स्थान बदलता रहता है। रुद्राभिषेक जैसा विशेष अनुष्ठान शुरू करने से पहले ज्योतिषी और पंडित ‘शिववास’ की गणना जरूर करते हैं।

सामान्य दिनों में रुद्राभिषेक कराने से पहले यह देखना आवश्यक होता है कि उस विशिष्ट दिन भगवान शिव कहां विराजमान हैं। हालांकि, पवित्र सावन माह की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या इस पूरे महीने भी अभिषेक करने से पहले शिववास देखना अनिवार्य है या नहीं।

Shivvas in Sawan 2026: क्या होता है शिववास और क्यों देखा जाता है इसका निवास?

धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव समय-समय पर अलग-अलग स्थानों पर विराजमान रहते हैं। शिववास की गणना पंचांग की तिथियों के आधार पर की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि जब महादेव शुभ स्थानों पर विराजमान होते हैं, तब किया गया रुद्राभिषेक अत्यंत मनोवांछित फल प्रदान करता है। वहीं अशुभ स्थानों पर शिववास होने पर अभिषेक करने से बचना चाहिए।

इन शुभ स्थानों पर शिववास होने पर रुद्राभिषेक देता है मनचाहा फल

जब भगवान शिव देवी गौरी के साथ विराजमान होते हैं, उस समय रुद्राभिषेक करने से घर-परिवार में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

कैलाश पर्वत पर शिववास होने के दौरान अभिषेक करने से सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जब शिव नंदी पर सवार होते हैं या विराजमान होते हैं, उस समय पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

किन स्थानों पर शिववास रहने पर रुद्राभिषेक करने से बचना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार, यदि शिववास श्मशान में हो तो उस समय रुद्राभिषेक करने से जीवन में भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी तरह जब शिवजी किसी सभा में उपस्थित हों, ध्यान में हों, रात्रि भोजन कर रहे हों या कार्य व क्रीड़ा में व्यस्त हों, तब अभिषेक करने से मानसिक पीड़ा और कठिनाइयां मिल सकती हैं।

क्या पवित्र सावन महीने में भी शिववास देखना अनिवार्य है?

गोरखपुर के प्रसिद्ध विद्वान पंडित सुजीत जी महाराज के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में रुद्राभिषेक कराने के लिए शिववास का विचार करना बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं होता है।

ऐसी मान्यता है कि सावन के पूरे महीने भगवान शिव स्वयं पृथ्वीलोक पर ही निवास करते हैं। इस दौरान महादेव अत्यंत प्रसन्न और कृपालु मुद्रा में रहते हैं, इसलिए सावन में किसी भी दिन बिना संकोच के रुद्राभिषेक किया जा सकता है।

Shivvas in Sawan 2026: ज्योतिर्लिंग और सावन के अलावा अन्य दिनों के नियम

यदि कोई श्रद्धालु किसी भी ज्योतिर्लिंग पर जाकर रुद्राभिषेक कराता है, तो वहां भी शिववास देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि ज्योतिर्लिंगों पर शिव का नित्य वास माना गया है।

हालांकि, सावन के महीने और ज्योतिर्लिंगों को छोड़कर यदि आप साल के अन्य आम दिनों में अपने घर या मंदिर में रुद्राभिषेक करा रहे हैं, तो शिववास का सही ज्ञान होना बेहद आवश्यक है।

सावन का महीना भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। चूंकि इस पूरे माह महादेव पृथ्वी लोक पर ही विराजमान रहकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं, इसलिए सावन में बिना किसी हिचकिचाहट या शिववास की चिंता किए किसी भी दिन रुद्राभिषेक कराया जा सकता है। धार्मिक विद्वानों और शास्त्रों के अनुसार, सावन में की गई शिव पूजा अक्षय पुण्य प्रदान करती है और साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है।

Fitness Tips: लंबी उम्र और जवां दिखने के लिए अपनाएं ये 10 सदियों पुराने नुस्खे, हमेशा रहेंगे फिट और एनर्जेटिक

Fitness Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, असंतुलित खान-पान और अत्यधिक मानसिक तनाव ने लोगों को कम उम्र में ही बुढ़ापे का शिकार बना दिया है। आधुनिक जीवनशैली का सीधा असर हमारी त्वचा, शारीरिक ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिससे चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगी हैं। हालांकि, उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे काफी हद तक धीमा जरूर किया जा सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राचीन भारतीय परंपराओं और आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाया जाए, तो लंबे समय तक जवान और फिट रहना बिल्कुल संभव है। प्राचीन काल से चली आ रही ये पारंपरिक पद्धतियां न केवल शरीर को अंदर से मजबूत बनाती हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से चमकती हुई त्वचा और मानसिक शांति भी प्रदान करती हैं।

Fitness Tips: सुबह की शुरुआत करें ऑयल पुलिंग के साथ

दिन की शुरुआत यदि सही तरीके से की जाए तो पूरा शरीर स्वस्थ रहता है। स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती बनाए रखने के लिए ऑयल पुलिंग एक बेहद प्राचीन और असरदार तरीका है। हर सुबह खाली पेट ऑयल पुलिंग करने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया को साफ करने में बड़ी मदद मिलती है। इससे मसूड़े मजबूत होते हैं और शरीर की अंदरूनी सूजन कम होती है। बेहतर गट हेल्थ और साफ-सुथरी चमकदार स्किन पाने के लिए यह सबसे बेहतरीन प्राकृतिक उपाय माना जाता है। नियमित रूप से इसे अपनी सुबह की दिनचर्या का हिस्सा बनाने से संपूर्ण मौखिक स्वास्थ्य सुधरता है जिसका सकारात्मक प्रभाव चेहरे की चमक पर भी साफ दिखाई देता है।

नस्य क्रिया से सुधारें दिमाग की सेहत

आयुर्वेद में नाक के रास्ते को शरीर का मुख्य द्वार माना गया है। नस्य क्रिया एक ऐसी खास प्रक्रिया है जिसमें नाक में शुद्ध तेल या घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह पुरानी पद्धति नाक के अंदरूनी रास्तों को नम और चिकना बनाए रखने में मदद करती है। इसके नियमित अभ्यास से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और सिरदर्द जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। यह नाक के रास्ते शरीर में ऑक्सीजन के बहाव को सुचारू बनाने का काम करती है। एक तेज दिमाग, बेहतर स्मरण शक्ति और चमकता हुआ चेहरा पाने के लिए नस्य क्रिया बेहद मददगार साबित हो सकती है।

अभ्यंग स्नान से बेहतर करें ब्लड सर्कुलेशन

त्वचा की कसावट बनाए रखने और उम्र के असर को दूर रखने के लिए मालिश का बहुत महत्व है। अभ्यंग एक ऐसी प्राचीन प्रक्रिया है जिसमें नहाने से पहले हल्के गर्म तेल से पूरे शरीर की मालिश की जाती है। इस पारंपरिक विधि से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन और लिम्फैटिक ड्रेनेज काफी बेहतर होता है। यह प्रक्रिया त्वचा के नीचे कोलेजन के उत्पादन को सपोर्ट करती है जिससे स्किन में ढीलापन नहीं आता है। नियमित रूप से शरीर की तेल मालिश करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जोड़ों का दर्द दूर होता है और त्वचा लंबे समय तक जवान एवं कोमल बनी रहती है।

सर्केडियन रिदम के अनुसार करें भोजन

शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम के साथ चलना सेहत के लिए बहुत जरूरी है। प्रकृति के नियमों के अनुकूल खाने-पीने की आदतें अपनाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। शाम ढलने के बाद यानी जल्दी रात का खाना और देर रात कुछ भी खाने से बचने से मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से काम करने में मदद मिलती है। जब हमारा पाचन तंत्र समय पर विश्राम करता है, तो शरीर अपनी ऊर्जा कोशिकाओं की मरम्मत में लगाता है। यह जीवनशैली उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्राकृतिक रूप से धीमा करती है और शरीर को ऊर्जावान बनाए रखती है।

हर्बल जड़ी-बूटियों से कम करें ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस

तनाव और प्रदूषण के कारण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है, जो बुढ़ापे के लक्षणों को जल्दी सामने लाता है। इससे निपटने के लिए अपनी दिनचर्या में अश्वगंधा, आंवला और गिलोय जैसी आयुर्वेदिक हर्बल चीजों को शामिल करना चाहिए। ये शक्तिशाली जड़ी-बूटियां शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को कम करने में मदद करती हैं। इनमें मौजूद प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं। इनका नियमित सेवन करने से इम्युनिटी मजबूत होती है और चेहरे पर बढ़ती उम्र के निशान देरी से आते हैं।

प्राकृतिक धूप से रीसेट करें शरीर की ऊर्जा

आधुनिक चकाचौंध भरी दुनिया में लोग धूप से दूर होते जा रहे हैं, जबकि प्राकृतिक रोशनी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। अपने दैनिक रूटीन में सुबह की ताजी धूप को जरूर शामिल करना चाहिए। सूरज की किरणों से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों और स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा, सुबह की धूप शरीर की सर्केडियन रिदम को रीसेट करने, हार्मोनल संतुलन बनाने और युवा ऊर्जा का संचार करने में मदद करती है। यह मानसिक स्वास्थ्य को सुधारकर मूड को भी तरोताजा रखती है।

प्राणायाम से बढ़ाएं ऑक्सीजन की आपूर्ति

सांसों पर नियंत्रण रखना ही प्राण है और यही जीवन का आधार भी है। प्राणायाम योग का एक ऐसा अंग है जिसमें सांस लेने और छोड़ने की विभिन्न क्रियाएं की जाती हैं। इसके अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति होती है। ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होने से मानसिक तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन कम होते हैं। जब शरीर तनावमुक्त रहता है और कोशिकाओं को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, तो एजिंग के लक्षण खुद-ब-खुद कम होने लगते हैं और चेहरे पर एक अलग ही ओज नजर आता है।

योग अभ्यास से लाएं चेहरे पर प्राकृतिक चमक

शारीरिक लचीलापन और मानसिक शांति के लिए योग को सदियों से सर्वोपरि माना गया है। नियमित रूप से योगासन करने से न केवल शरीर लचीला बनता है, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन और पोस्चर में भी सुधार होता है। यह शरीर के भीतरी अंगों की मालिश करता है और लिम्फैटिक डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है। रोजाना योग करने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की त्वचा पर साफ चमक के रूप में दिखाई देता है। यह उम्र के साथ होने वाली जकड़न को दूर कर शरीर को फुर्तीला रखता है।

Fitness Tips: सात्विक और ताजे खान-पान को दें प्राथमिकता

रंग-रूप और सेहत का सीधा संबंध हमारे खान-पान से होता है। हमेशा साफ-सुथरा, ताजा, प्राकृतिक और सात्विक भोजन करना सेहत के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, नट्स, बीज और पारंपरिक जड़ी-बूटियां शरीर को पोषण देती हैं। इन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स होते हैं जो अंदर से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से मुकाबला करते हैं। संतुलित और पौष्टिक आहार खाने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे लंबे समय तक जवां बने रहने में मदद मिलती है।

Fitness Tips: डिजिटल डिटॉक्स और गहरी नींद से करें कायाकल्प

आज के दौर में लोग रातभर मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं, जिससे नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। एजिंग प्रक्रिया को धीमा करने के लिए रात में सोने से पहले डिजिटल डिटॉक्स करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। रोजाना समय पर सोने से गहरी और शांतिपूर्ण नींद मिलती है, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी है। नींद का यह समय शरीर की असली मरम्मत का होता है जिसमें कोलेजन का निर्माण और हार्मोनल संतुलन सही तरीके से रिस्टोर होते हैं। पर्याप्त और गहरी नींद लेने से सुबह उठने पर ताजगी महसूस होती है और चेहरा हमेशा खिला-खिला रहता है।

Sawan Guruvar Puja Vidhi: सावन में बृहस्पतिवार को पूजा कैसे करें जिससे लाभ हो? जानिए अचूक विधि और नियम

Sawan Guruvar Puja Vidhi: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और प्रकृति की आराधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। जब इस पावन मास में गुरुवार का दिन आता है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि सावन में बृहस्पतिवार को पूजा कैसे करें जिससे लाभ हो, क्योंकि यह दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन में ज्ञान, धन, उत्तम स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यदि आप भी इस शुभ वार पर विधि-विधान से पूजा करके अपने भाग्य को चमकाना चाहती हैं, तो कुछ खास नियमों और पारंपरिक तरीकों को अपनाना बेहद आवश्यक है।

Sawan Guruvar Puja Vidhi: सुबह की शुरुआत और पीले वस्त्रों का महत्व

गुरुवार के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और तन-मन से पवित्र हो जाना चाहिए। स्नान के दौरान जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करने का विशेष विधान है क्योंकि पीला रंग बृहस्पति देव को बेहद प्रिय है। घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करने के बाद वहां एक पीला आसन या कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके बाद बृहस्पति देव की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करके उनकी विधिवत आराधना की शुरुआत की जाती है। पीले वस्त्र पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन में धार्मिक भावनाएं प्रबल होती हैं।

पूजा की सामग्री और संकल्प की प्रक्रिया

बृहस्पति देव की पूजा शुरू करने से पहले घी का दीपक और सुगंधित धूपबत्ती प्रज्वलित करनी चाहिए। पूजा की थाली में चना दाल, पीले फल जैसे केला, पीले गेंदा के फूल, हल्दी, कुमकुम और बेसन की मिठाई को अवश्य शामिल करें। पूजा का आरंभ करने से पहले अपने मन में ध्यान लगाकर यह संकल्प लें कि आप यह अनुष्ठान अपने परिवार के कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए कर रही हैं। भगवान को शुद्ध जल में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर अर्पित करना चाहिए, जिससे उनका आशीर्वाद शीध्र प्राप्त होता है। इसके बाद रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करके उनकी महिमा का गुणगान करना चाहिए।

मंत्र जाप और ध्यान लगाने के नियम

पूजा के दौरान ध्यान केंद्रित करना बहुत जरूरी माना जाता है, जिससे मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। देवगुरु को प्रसन्न करने के लिए मुख्य मंत्र ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। माला का उपयोग करने से मंत्र जाप की संख्या सटीक रहती है और एकाग्रता बढ़ती है। जाप के समय मन में किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार नहीं लाना चाहिए। शांत चित्त से किए गए मंत्र जाप से बृहस्पति ग्रह मजबूत होते हैं और कुंडली में मौजूद कई प्रकार के दोष स्वतः ही शांत होने लगते हैं।

भोग अर्पण और दान का महत्व

बृहस्पति देव को चने की दाल और पीले मीठे पकवानों का भोग लगाना बहुत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा केला इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण फल माना जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया और बांटा जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रसाद का वितरण अवश्य करना चाहिए। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिसमें जरूरतमंदों को पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी या बेसन की मिठाई का दान करना चाहिए। दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है।

Sawan Guruvar Puja Vidhi: पीपल के पेड़ की पूजा और विशेष उपाय

सनातन संस्कृति में पीपल के पेड़ को बहुत पवित्र और देवताओं का वास माना जाता है। बृहस्पतिवार के दिन पीपल के पेड़ के पास जाकर उसकी परिक्रमा करना और जल अर्पित करना बहुत लाभकारी होता है। पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाने से बृहस्पति देव की विशेष कृपा बरसती है। यदि आपके घर में पीपल का छोटा पौधा है, तो उसकी नियमित देखभाल करनी चाहिए। इसके अलावा विद्यार्थी वर्ग यदि इस दिन एकाग्रता से पूजा करें, तो उनकी बुद्धि का विकास होता है और शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत सफलता मिलती है।

सावन मास के दौरान की गई यह बृहस्पतिवार की पूजा मनुष्य के जीवन की कई बाधाओं को दूर करने की क्षमता रखती है। यदि आप नियमित रूप से नियमों का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा से यह पूजा करती हैं, तो आपको इसके सकारात्मक परिणाम अवश्य देखने को मिलेंगे। यह अनुष्ठान न केवल आपके वर्तमान को सुधारता है बल्कि भविष्य में भी आर्थिक और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा पाने के लिए इस सावन अपने घर में विधि-विधान से पूजा अवश्य करें।

MP Patwari Vacancy 2026: मध्य प्रदेश में पटवारी और ग्रुप-2 के 2,106 पदों पर बंपर भर्ती, जानें आवेदन प्रक्रिया

MP Patwari Vacancy 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद सुनहरा अवसर सामने आया है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने ग्रुप-2 सब ग्रुप-4 संयुक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 2,106 पदों पर बंपर भर्तियों का आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस नई भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत पटवारी सहित विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। राज्य के ग्रेजुएट युवा आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। सरकार के इस कदम से प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार पाने का एक और बड़ा मंच मिल गया है।

MP Patwari Vacancy 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन की समयसीमा

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी किए गए आधिकारिक परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चार अगस्त से शुरू हो चुकी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आगामी 18 अगस्त तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन सफलतापूर्वक जमा कर सकते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी से फॉर्म भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है तो वह 23 अगस्त तक अपने आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन कर सकता है। इसके अलावा निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक इन विभिन्न पदों के लिए ऑनलाइन लिखित परीक्षा का आयोजन आगामी 22 सितंबर से शुरू होने की पूरी संभावना है।

रिक्तियों का विवरण और विभिन्न पदों की जानकारी

इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,106 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें विभिन्न श्रेणियों के अनुसार आरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। सामान्य वर्ग के लिए 608 पद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 207 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 613 पद तय किए गए हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति के लिए 274 पद और अनुसूचित जनजाति के लिए 404 पद आरक्षित किए गए हैं। इन कुल पदों में पटवारी के अलावा पंचायत समन्वय अधिकारी, सहायक उप निरीक्षक, उप लेखा परीक्षक, सांख्यिकी अन्वेषक और डाटा एंट्री ऑपरेटर जैसे कई महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं।

Mp patwari vacancy 2026: शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मानक

इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य माना गया है। इसके साथ ही आवेदक का मध्य प्रदेश के रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन होना और आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना भी आवश्यक है। पटवारी पद के लिए सीपीसीटी उत्तीर्ण होना जरूरी है या फिर चयन के बाद एक निश्चित प्रोबेशन अवधि के भीतर इसे पास करना होगा। आयु सीमा की बात करें तो एक जनवरी 2026 के आधार पर उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। राज्य के आरक्षित वर्गों और महिलाओं को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी।

Mp patwari vacancy 2026: सैलरी स्ट्रक्चर और चयन प्रक्रिया का पूरा विवरण

चयनित होने वाले उम्मीदवारों को विभिन्न पदों के अनुसार आकर्षक वेतनमान का लाभ मिलेगा, जिसमें पटवारी पद के लिए निर्धारित पे-स्केल के अलावा अन्य पदों के लिए वेतन श्रेणियां शामिल हैं। उम्मीदवारों का अंतिम चयन दो सौ अंकों की एक ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इस लिखित परीक्षा में सामान्य विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर ज्ञान, रीजनिंग और सामान्य प्रबंधन जैसे विषयों से जुड़े बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की इस व्यापक संरचना के माध्यम से अभ्यर्थियों की बौद्धिक और प्रशासनिक क्षमताओं का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा।

मध्य प्रदेश में आई इस नई भर्ती प्रक्रिया से राज्य के युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और वे तय समय सीमा के भीतर आवेदन करने में जुटे हैं। पारदर्शी तरीके से आयोजित होने वाली यह परीक्षा युवाओं को अपने भविष्य को सुरक्षित करने और प्रशासनिक सेवा में योगदान देने का बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी सारी औपचारिकताएं पूरी कर लें। सही रणनीति और समयबद्ध तैयारी के साथ इस परीक्षा में सफलता हासिल करके युवा अपने सपनों को एक नई उड़ान दे सकते हैं।

BCCI Update: वीवीएस लक्ष्मण बनेंगे मुख्य चयनकर्ता? अजित अगरकर की जगह लेने को लेकर चर्चाएं तेज

BCCI Update: भारतीय क्रिकेट के गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। सीनियर पुरुष चयन समिति के चेयरमैन पद पर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और नेशनल क्रिकेट अकादमी के प्रमुख रहे वीवीएस लक्ष्मण को भारतीय सीनियर चयन समिति का अगला अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वह वर्तमान मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर की जगह ले सकते हैं। हालांकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आने वाले दिनों में बोर्ड की बैठक के दौरान ही इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर अंतिम मुहर लग सकेगी।

BCCI Update: चयन समिति में बदलाव को लेकर आखिर क्यों शुरू हुईं चर्चाएं

दरअसल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर टीम प्रबंधन में नए बदलाव पर विचार कर रहा है। अजित अगरकर का कार्यकाल हालांकि सफल रहा है, लेकिन भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए नए चेहरे की तलाश जारी है।

प्रशासनिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि आगामी बड़े टूर्नामेंटों से पहले चयन समिति को एक नई दिशा देना जरूरी है। इसी वजह से बोर्ड के भीतर इस बड़े बदलाव को लेकर अनौपचारिक बातचीत का दौर तेजी से शुरू हो चुका है।

अजित अगरकर के दो साल के कार्यकाल का कैसा रहा प्रदर्शन

अजित अगरकर ने जुलाई 2023 में सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अपना पदभार संभाला था। उनके नेतृत्व में चयन समिति ने कई कड़े और साहसिक फैसले लिए, जिससे भारतीय टीम को नई ऊर्जा मिली।

अगरकर के कार्यकाल के दौरान भारत ने युवा खिलाड़ियों को लगातार मौका दिया और टीम में संतुलन बनाने की कोशिश की। उनके इस रुख की क्रिकेट जगत के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने काफी सराहना भी की थी।

तीन आईसीसी ट्रॉफियां जीतकर अगरकर ने रचा इतिहास

अजित अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति के कार्यकाल में टीम इंडिया का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद शानदार रहा है। इस दौरान भारत ने तीन बड़े आईसीसी खिताब अपने नाम किए, जिसमें दो टी20 विश्व कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी की ऐतिहासिक जीत शामिल है।

इन शानदार उपलब्धियों के बावजूद अगरकर की कुर्सी पर खतरे की खबर ने सभी को हैरान कर दिया है। हालांकि इन ट्रॉफियों के कारण अगरकर की स्थिति बोर्ड के सामने पूरी तरह कमजोर नहीं मानी जा सकती।

वीवीएस लक्ष्मण ही क्यों बने बीसीसीआई की पहली पसंद?

वीवीएस लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित और भरोसेमंद चेहरों में से एक माने जाते हैं। संन्यास लेने के बाद से ही वह भारतीय क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर और युवा खिलाड़ियों के विकास से लगातार गहराई से जुड़े रहे हैं।

नेशनल क्रिकेट अकादमी के प्रमुख के तौर पर लक्ष्मण ने देश की उभरती हुई प्रतिभाओं को करीब से देखा और तराशा है। उनका यह अनुभव राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में टीम इंडिया के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

घरेलू क्रिकेट और युवा प्रतिभाओं की लक्ष्मण को गहरी समझ

लक्ष्मण के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का लंबा अनुभव तो है ही, साथ ही वह भारत के घरेलू क्रिकेट ढांचे को भी बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने पिछले कुछ सालों में अंडर-19 और इंडिया-ए टीमों के साथ मिलकर काफी काम किया है।

युवा खिलाड़ियों की मानसिक और तकनीकी क्षमता को आंकने में लक्ष्मण को महारत हासिल है। यही कारण है कि बीसीसीआई अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारी लक्ष्मण के नाम पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते दिख रहे हैं।

मुख्य चयनकर्ता का पद बदलने से टीम इंडिया पर क्या पड़ेगा असर

यदि बीसीसीआई वीवीएस लक्ष्मण को मुख्य चयनकर्ता पद की कमान सौंपता है, तो टीम इंडिया के चयन के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लक्ष्मण अपनी शांत और दूरदर्शी सोच के लिए जाने जाते हैं।

उनके आने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सीनियर खिलाड़ियों के सम्मान और युवा खिलाड़ियों के अवसरों के बीच एक संतुलन स्थापित हो सकेगा। इससे ड्रेसिंग रूम और चयन समिति के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।

2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के लिए नई रणनीति जरूरी

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अगला बड़ा लक्ष्य 2027 का वनडे विश्व कप है। इसके लिए अभी से ही खिलाड़ियों का एक मजबूत पूल तैयार करना बेहद आवश्यक हो चुका है।

लक्ष्मण जैसा दूरदर्शी चयनकर्ता इस बदलाव के दौर को बहुत ही आसानी और समझदारी से संभाल सकता है। टेस्ट और वनडे प्रारूप में नए खिलाड़ियों को तैयार करने का जिम्मा उन पर रहेगा।

तीन अलग-अलग फॉर्मेट के लिए सही खिलाड़ियों का चुनाव

वर्तमान समय में तीनों प्रारूपों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ खिलाड़ियों की जरूरत महसूस की जा रही है। वर्कलोड मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हुए चयन समिति को काफी सतर्क रहना पड़ता है।

लक्ष्मण का मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि टी20, वनडे और टेस्ट में खिलाड़ियों का चयन उनकी लय और फिटनेस के आधार पर हो। इसके लिए एक ठोस और पारदर्शी रोडमैप तैयार किया जाएगा।

BCCI Update: बोर्ड की आधिकारिक बैठक के बाद ही साफ हो सकेगी स्थिति

फिलहाल वीवीएस लक्ष्मण के मुख्य चयनकर्ता बनने की खबर केवल मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों पर आधारित है। बीसीसीआई की आगामी एजीएम या विशेष बैठक में ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

अजित अगरकर के कार्यकाल को आगे बढ़ाया जाता है या लक्ष्मण को यह जिम्मेदारी मिलती है, इसका पता आधिकारिक बयान से ही चलेगा। तब तक क्रिकेट फैंस की निगाहें बोर्ड के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

भारतीय क्रिकेट में चयन समिति का अध्यक्ष बनना एक बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है, जहां फैसलों पर पूरे देश की नजर रहती है। अजित अगरकर ने अपने कार्यकाल में तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाकर एक ऊंचा पैमाना स्थापित किया है। वहीं वीवीएस लक्ष्मण का एनसीए का अनुभव और शांत स्वभाव उन्हें इस पद का स्वाभाविक दावेदार बनाता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीसीसीआई निरंतरता को चुनता है या फिर 2027 विश्व कप की नई सोच के साथ लक्ष्मण को चयन समिति का नया बॉस नियुक्त करता है।

Marang Buru Bachao Sangharsh Morcha की बैठक: 4-5 नवंबर को होगा “मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन

Bokaro| 5 अगस्त 2026: मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक फागू बेसरा जी के अध्यछता में बुधवार को होटल आर्यन इंटरनेशनल, जेना मोड़, बोकारो में हुई। बैठक में आदिवासी समुदाय के सबसे पवित्र स्थल मरांग बुरु की रक्षा और संगठन को मजबूत करने पर मंथन हुआ।

“मरांग बुरु आदिवासियों की आस्था और पहचान”

बैठक में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि मरांग बुरु आदिवासी समुदाय का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। यह केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक भी है।

मोर्चा ने स्पष्ट किया कि आदिवासी/संथाल समुदाय मरांग बुरु की धार्मिक पवित्रता पर किसी भी तरह के हमले या हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।

जिला से गांव स्तर तक कमेटियां बनेंगी, चलेगा जागरूकता अभियान

बैठक में संगठन को मजबूत करने के लिए जिला, प्रखंड, पंचायत और गांव स्तर पर कमेटियां गठित करने का निर्णय लिया गया।

साथ ही झारखंड के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर जन जागरूकता और जन लामबंदी अभियान चलाने का भी संकल्प लिया गया।

4-5 नवंबर को होगा “मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन”

केंद्रीय समिति ने 4-5 नवंबर 2026 को मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन आयोजित करने का फैसला लिया।

कौन-कौन होंगे शामिल:
1. झारखंड के जिले: बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़, हजारीबाग, कोल्हान प्रमंडल, संताल परगना के संथाल धर्म के अनुयायी और प्रतिनिधि
2. अन्य राज्य: असम, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम
3. विदेश: नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से भी सैकड़ों प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद

इन सभी जिलों के सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के कार्यकर्ता और सदस्य भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे।

 25 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन

बैठक का संचालन केंद्रीय महासचिव श्री हीरालाल मांझी ने फागू बेसरा जी के अध्यछता में  किया। बैठक के अंत में मोर्चा के संगठनात्मक कार्यों के समन्वय, राज्यव्यापी जागरूकता अभियान और महासम्मेलन की तैयारियों की निगरानी के लिए 25 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन सर्वसम्मति से किया गया।

बैठक में शामिल रहे प्रमुख सदस्य:

सुरेंद्र टुडू, बिंदा सोरेन, रतन लाल मांझी, अशोक मुर्मू, रामा मांझी, अमित सोरेन, अंबिका देवी, बबिता कुमारी, रविंद्र हांसदा, अजय हेम्ब्रम, सोहराय हांसदा, धनु हांसदा, अजीत मुर्मू, जगदीश मरांडी, सहदेव हेम्ब्रम, के.सी. टुडू, संतोष सोरेन, कृष्णा हांसदा, पंकज मरांडी, रमेश टुडू, मोहन मुर्मू, रितेश हेम्ब्रम आदि।

यह जानकारी केंद्रीय अध्यक्ष फगु बेसरा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।

Mark Zuckerberg Apology: मार्क जकरबर्ग ने आपत्तिजनक चाइल्ड कंटेंट और डीपफेक पर मांगी माफी, माना मिली भारी कमाई

Mark Zuckerberg Apology: सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के शीर्ष नेतृत्व ने भारत समेत दुनियाभर में उस वक्त गंभीर स्थिति का सामना किया जब प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले आपत्तिजनक और संवेदनशील मामलों को लेकर बड़े खुलासे हुए। मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट यानी सीएसएएम, डीपफेक सामग्री और अपने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गंभीर गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। इस पूरी घटना के बाद से तकनीकी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि इस बात पर भी मुहर लग चुकी है कि कंपनी पारंपरिक बिचौलिए की परिभाषा के दायरे में नहीं आती है, बल्कि वह स्वयं यह तय करती है कि उसके एल्गोरिदम के माध्यम से किस तरह का कंटेंट उपयोगकर्ताओं तक पहुंचेगा।

Mark Zuckerberg Apology: मार्क जकरबर्ग की माफी और वित्तीय लाभ का बड़ा कबूलनामा

मेटा प्रमुख मार्क जकरबर्ग की ओर से सामने आए इस बयान ने डिजिटल दुनिया में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां उन्होंने माना है कि प्लेटफॉर्म पर कुछ विशिष्ट और आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देने के लिए भारी मात्रा में वित्तीय लाभ प्राप्त हुआ था। अपनी इस भूल पर गहरा अफसोस जताते हुए उन्होंने न केवल बच्चों से जुड़े संवेदनशील और अवांछित मामलों पर खेद व्यक्त किया, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि तकनीकी प्रबंधन और नीतियों के क्रियान्वयन में बड़ी चूक हुई है। इससे पहले जनवरी 2025 के दौरान भी संसदीय समिति के समक्ष मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसी ही परिस्थितियों में माफी मांगनी पड़ी थी, जो यह दर्शाता है कि प्लेटफॉर्म की आंतरिक व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां लंबे समय से बनी हुई हैं।

सेफ हार्बर और मध्यस्थ की कानूनी स्थिति पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट किया गया है कि मेटा पारंपरिक अर्थों में किसी मध्यस्थ या बिचौलिए की भूमिका में नहीं आता है क्योंकि वे खुद इस बात का नियंत्रण रखते हैं कि किस प्रकार का डिजिटल कंटेंट उपयोगकर्ताओं तक पहुंचेगा। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय आईटी अधिनियम के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर का सुरक्षा कवच इन मामलों में सीधे तौर पर लागू नहीं होता है, जो सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कानूनी जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सेफ हार्बर असल में वह कानूनी प्रावधान है जो इंटरनेट कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर तीसरे पक्ष द्वारा डाले जाने वाले डेटा के लिए कानूनी उत्तरदायित्व से राहत देता है, लेकिन इस नए तकनीकी और तार्किक रुख ने कंपनियों की जवाबदेही को और अधिक कड़ा कर दिया है।

Mark Zuckerberg Apology: सरकारी बैठकों और बाल संरक्षण आयोग की कड़ी कार्रवाई

इस गंभीर प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद मेटा के ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने अपनी टीम के साथ भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जहां दोनों पक्षों के बीच लगभग आधे घंटे तक उच्चस्तरीय चर्चा चली। इसके अलावा मेटा के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के साथ भी बैठक कर मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी, ताकि भारतीय कानूनों के दायरे में अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके। इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए जुलाई के शुरुआती दिनों में ही मेटा को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया था, जिसमें बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री और विज्ञापनों पर कड़ा जवाब तलब किया गया था।

Mark Zuckerberg Apology: संसदीय समिति की सख्त रुख और आगे की राजनीतिक दिशा

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन और संचालन को लेकर संसद की आईटी मामलों की समिति ने भी बेहद सख्त तेवर अपनाए हैं, जिसके तहत हाल ही में हुई बैठक में मेटा समेत तमाम सोशल मीडिया दिग्गजों को कड़ी फटकार लगाई गई है। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा देश विरोधी और आपत्तिजनक सामग्री की पहुंच बढ़ाने पर गंभीर आपत्ति जताई थी और साथ ही सेफ हार्बर सुरक्षा को पूरी तरह रद्द किए जाने की संभावनाओं की तरफ भी इशारा किया था। देश के नीति-निर्माताओं और वैधानिक निकायों का यह आक्रामक रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में इंटरनेट कंपनियों के लिए भारत के भीतर मनमानी करना असंभव होगा और उन्हें बच्चों तथा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का शत-प्रतिशत पालन करना ही होगा।

सोशल मीडिया के इस दौर में तकनीकी दिग्गजों की बढ़ती मनमानी और जवाबदेही से जुड़े ये सवाल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं जहां नैतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर सख्ती अनिवार्य हो गई है। मार्क जकरबर्ग की तरफ से आई इस माफी और भारतीय प्रशासनिक तंत्र द्वारा उठाए गए ठोस कदमों ने यह साबित कर दिया है कि यूजर्स की सुरक्षा से समझौता करने वाली कंपनियों को अब कड़े कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

Kal Ka Mausam 6 August 2026: देश के 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली से उत्तराखंड तक झमाझम बरसेंगे बदरा

Kal Ka Mausam 6 August 2026: देशभर में इन दिनों दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपनी पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसके प्रभाव से उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक झमाझम बारिश का दौर जारी है। राजधानी दिल्ली से लेकर तमाम मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत पहुंचाई है। हालांकि, दूसरी ओर पहाड़ी राज्यों में मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच मौसम विभाग यानी आईएमडी ने एक नया पूर्वानुमान जारी करते हुए देश के कुल सत्रह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। इस ताजा अपडेट के बाद से संबंधित प्रशासनों ने अपनी कमर कस ली है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

Kal Ka Mausam 6 August 2026: राजधानी दिल्ली और एनसीआर में झमाझम बारिश का दौर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में मौसम का मिजाज इन दिनों बेहद सुहाना बना हुआ है, जिससे तापमान में भी खासी गिरावट दर्ज की गई है। इस हफ्ते की शुरुआत से ही इस पूरे इलाके में रुक-रुक कर बारिश होने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में भी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में बादलों का डेरा रहेगा और मध्यम से भारी वर्षा होने की पूरी संभावना है। इस दौरान तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया जा सकता है, जिससे लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिलती रहेगी। लगातार हो रही इन मानसूनी बौछारों से शहर के कई हिस्सों में हरियाली और ठंडक का अहसास बढ़ गया है।

उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और ऑरेंज अलर्ट

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बुधवार तड़के से ही आसमान से आफत बनकर बरस रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण प्रदेश के कई जिलों में नदियां और बरसाती नाले उफान पर आ चुके हैं, जिससे निचले इलाकों में खतरा पैदा हो गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं के बढ़ने से कई मुख्य मार्ग भी बाधित हो गए हैं, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के कई संवेदनशील जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन ने लोगों और यात्रियों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है ताकि किसी भी अनहोनी से सुरक्षित बचा जा सके।

उत्तर प्रदेश और बिहार में सक्रिय हुआ मानसूनी तंत्र

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे किसानों के चेहरों पर संतोष देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आगामी दिनों के दौरान अच्छी-खासी वर्षा होने की पूरी संभावना है। ठीक इसी प्रकार बिहार राज्य में भी मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय बनी हुई हैं और कई स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है। लगातार हो रही इन बारिशों से खेतों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है, जो कृषि कार्यों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है।

Kal Ka Mausam 6 August 2026: देश के अन्य राज्यों में मौसम की स्थिति और चेतावनी

उत्तराखंड के अलावा कोंकण और गोवा के तटीय क्षेत्रों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने का रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी झमाझम बारिश का दौर जारी रहने वाला है। दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हल्की से मध्यम स्तर की बौछारें पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।

देशभर में सक्रिय हुए इस मजबूत मानसूनी तंत्र ने एक तरफ जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए आम नागरिकों और स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि किसी भी आपदा का सामना समय रहते किया जा सके। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम का यह मिजाज ऐसा ही बने रहने की उम्मीद है, जिससे तापमान में अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी। प्रकृति के इस बदले हुए रूप के बीच सुरक्षा के सभी मानकों का पालन करना ही इस मौसम में सबसे समझदारी भरा कदम साबित होगा।