Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। यहां कई लोग बिना किसी वैध डिग्री या लाइसेंस के खुद को डॉक्टर बताकर क्लिनिक चला रहे हैं। इन फर्जी चिकित्सकों को ‘मुन्ना भाई’ कहा जा रहा है, जो गांवों के मुख्य रास्तों पर बोर्ड लगाकर मरीजों को लुभा रहे हैं। चंदली, गुमगी, ककनी, नैयाडीह, मनसाडीह और पचरुखी जैसे गांवों में ये अवैध क्लिनिक फल-फूल रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इनके चक्कर में पड़कर कई मरीजों की हालत बिगड़ चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठा।
बोर्ड पर झूठे दावे, मरीजों का शोषण
तिसरी प्रखंड में तिसरी-गावां रोड के किनारे और ककनी बाजार में ये क्लिनिक बिना किसी रोक-टोक के चल रहे हैं। इनके बाहर चमचमाते बोर्ड पर एमबीबीएस, बीएएमएस जैसी डिग्रियां लिखी हैं, लेकिन हकीकत में ये लोग बिना किसी प्रशिक्षण के इलाज कर रहे हैं। मरीजों से इलाज के नाम पर 200-500 रुपये, जांच के लिए 300-1000 रुपये और दवाओं के लिए अलग से पैसे वसूले जाते हैं। अगर मरीज की हालत सुधरती नहीं और बिगड़ जाती है, तो उसे तिसरी के सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है। तब तक मरीज का पूरा खर्चा हो चुका होता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये क्लिनिक स्वास्थ्य केंद्र से महज कुछ किलोमीटर दूर हैं, फिर भी अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
भ्रूण हत्या और ऑपरेशन के आरोप, मौतों का सिलसिला
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ क्लिनिकों में भ्रूण हत्या और छोटे-मोटे ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी रिश्तेदार को ऐसे ही एक क्लिनिक में ले जाया गया, जहां गलत इलाज से हालत खराब हो गई। कई मामलों में मरीजों की मौत हो चुकी है, लेकिन परिवार वाले डर के मारे शिकायत नहीं करते। इन क्लिनिकों के नाम वाले ‘डॉक्टर’ खुद कभी वहां नजर नहीं आते, वे सिर्फ बोर्ड लगाकर पैसे कमा रहे हैं। साथ ही, बिना लाइसेंस की दवा दुकानें भी इन्हीं क्लिनिकों से जुड़ी हैं, जहां दवाएं बिना रसीद के बेची जाती हैं। इससे नकली दवाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
जांच की मांग तेज, BJP ने उठाई आवाज
स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता से इन फर्जी डॉक्टरों का हौसला बुलंद है। तिसरी प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारी इन शिकायतों को सुनते तो हैं, लेकिन कार्रवाई का नामोनिशान नहीं। भाजपा नेता मनोज यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इन क्लिनिकों की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि तुरंत छापेमारी कराई जाए, ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके। जानकारों का मानना है कि अगर ऊपरी स्तर से जांच हुई, तो कई बड़े राज खुल सकते हैं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन अवैध क्लिनिकों को बंद कराया जाए।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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