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Bihar Election 2025: इन 10 ‘रावणों’ का कब होगा दहन? ‘परिवारवाद’ से लेकर ‘भ्रष्टाचार’ तक, इन मुद्दों ने जकड़ी है बिहार की सियासत

Bihar Election 2025: कल विजयादशमी के दिन पूरा देश बुराई के प्रतीक, दस सिर वाले रावण के पुतले का दहन करेगा। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रण में, राजनीति को जकड़े हुए एक ऐसे ‘दशानन’ (दस सिर वाले रावण) का उदय हुआ है, जिसके सिरों का दहन शायद इतना आसान नहीं है। यह दशानन है बिहार की राजनीति की उन दस बुराइयों का, जिन्होंने दशकों से राज्य के विकास को बाधित किया है और हर चुनाव में यही मुद्दे हावी रहते हैं। आइए जानते हैं, बिहार की राजनीति के इन दस सिरों के बारे में, जिनसे जनता इस चुनाव में मुक्ति चाहती है।

पहला सिर ‘परिवारवाद’, दूसरा ‘जातिवाद’

इस रावण का सबसे बड़ा और सबसे मजबूत सिर ‘परिवारवाद’ है। आरजेडी से लेकर लोजपा (आर) तक, राज्य के कई प्रमुख दल परिवारों द्वारा नियंत्रित हैं, जहां टिकट से लेकर पद तक, सब कुछ परिवार के सदस्यों के लिए ही आरक्षित दिखता है। दूसरा सिर ‘जातिवाद’ है, जो बिहार की राजनीति की जड़ में है। M-Y समीकरण, EBC लामबंदी, महादलित वोट बैंक और सवर्णों की गोलबंदी, इन्हीं के इर्द-गिर्द पूरी चुनावी बिसात बिछाई जाती है, जिसमें विकास के असली मुद्दे अक्सर खो जाते हैं।

‘भ्रष्टाचार’ और ‘अपशब्दों’ की राजनीति

इस दशानन का तीसरा सिर ‘भष्टाचार’ है। एक तरफ एनडीए, आरजेडी पर ‘नौकरी के बदले जमीन’ जैसे घोटालों का आरोप लगाती है, तो वहीं जन सुराज के प्रशांत किशोर जैसे नेता एनडीए के मंत्रियों पर ही अकूत संपत्ति बनाने का आरोप लगा रहे हैं। चौथा सिर है ‘अपशब्दों’ का, जो चुनावी भाषा के गिरते स्तर को दिखाता है। हाल ही में तेजस्वी यादव की रैली में प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के लिए इस्तेमाल हुए अपशब्द इसके सबसे ताजा उदाहरण हैं।

‘पलायन’, ‘बाढ़’, और ‘गरीबी’ के मुद्दे

पांचवां, छठा और सातवां सिर बिहार की जनता के असली दर्द को बयां करता है- ‘पलायन’, ‘बाढ़’, और ‘गरीबी’। हर साल लाखों युवा रोजगार और बेहतर शिक्षा के लिए राज्य से पलायन करने को मजबूर हैं। हर साल उत्तर बिहार की एक बड़ी आबादी बाढ़ की विभीषिका झेलती है, और गरीबी आज भी राज्य की सबसे बड़ी सच्चाई है। ये मुद्दे हर चुनाव में उठते हैं, लेकिन इनका स्थायी समाधान कभी नहीं निकलता।

Bihar Election 2025:’अपराध’, ‘झूठे वादे’ और ‘मौकापरस्ती’

इस रावण का आठवां सिर ‘अपराध’ है, जिसे एनडीए ‘जंगलराज’ के नाम से पेश कर आरजेडी को घेरती है। नौवां सिर ‘झूठे वादों’ का है, जिसमें तेजस्वी के ’10 लाख नौकरियों’ के वादे पर एनडीए सवाल उठाता है, तो वहीं तेजस्वी ‘डबल इंजन’ सरकार की घोषणाओं को ‘जुमला’ बताते हैं। दसवां और अंतिम सिर ‘मौकापरस्ती’ का है, जहां नेता और दल चुनाव जीतने के लिए रातों-रात अपनी विचारधारा और गठबंधन बदल लेते हैं, जिससे मतदाता खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। बिहार की जनता इस उम्मीद में है कि इस चुनाव में वह इन राजनीतिक बुराइयों के ‘रावण’ का दहन कर सकेगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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