Bihar News: बिहार की राजनीति में आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। विजयादशमी के मौके पर, उन्होंने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाले बीजेपी (BJP) समर्थकों पर हमला बोलते हुए कहा है कि वे लोग ‘जय सिया राम’ बोलें, क्योंकि ‘जय श्री राम’ का नारा अधूरा है और यह माता सीता का अपमान है। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में एक नई धार्मिक-राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
‘BJP वाले करते हैं माता सीता का अपमान’
तेज प्रताप यादव ने कहा, “ये बीजेपी वाले सिर्फ ‘जय श्री राम’ बोलते हैं, वे ‘जय सिया राम’ क्यों नहीं बोलते? क्या वे माता सीता का सम्मान नहीं करते? भगवान राम का नाम माता सीता के बिना अधूरा है। जो लोग माता सीता का सम्मान नहीं करते, वे महिला सम्मान की बात कैसे कर सकते हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी धर्म के नाम पर अधूरी और अपनी सुविधा की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि असली सनातनी वही है जो भगवान राम के साथ-साथ माता सीता का भी सम्मान करे।
‘हम असली राम वाले, वो नकली राम वाले’
तेज प्रताप ने आगे कहा कि आरजेडी और उनका परिवार ही ‘असली राम वाला’ है, जबकि बीजेपी वाले ‘नकली राम वाले’ हैं जो चुनाव के समय ही राम नाम का जाप करते हैं। उन्होंने कहा, हमारे लिए धर्म आस्था का विषय है, राजनीति का नहीं। हम हर दिन पूजा-पाठ करने वाले लोग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ‘जय सिया राम’ नहीं बोल सकते, उन्हें बिहार और देश की जनता से वोट मांगने का भी कोई अधिकार नहीं है।
BJP का पलटवार, ‘तेज प्रताप को ज्ञान की जरूरत’
तेज प्रताप यादव के इस बयान पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। बीजेपी के प्रवक्ताओं ने कहा है कि तेज प्रताप यादव को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया और रामसेतु को काल्पनिक बताया, वे आज हमें धर्म का ज्ञान दे रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने कहा कि ‘जय श्री राम’ और ‘जय सिया राम’, दोनों ही भगवान राम के प्रति आस्था के प्रतीक हैं और इसमें कोई अंतर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेज प्रताप यादव सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के विवादित बयान देते हैं।
Bihar News: चुनाव से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव का यह बयान चुनाव से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण को तेज करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वह इस बयान के जरिए बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ के नैरेटिव को चुनौती देने और खुद को एक ‘बेहतर हिंदू’ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस तरह के बयान अक्सर दोधारी तलवार साबित होते हैं, जो फायदे से ज्यादा नुकसान भी कर सकते हैं।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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