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Uttarakhand News: मसूरी में सड़कें धंसने से हाहाकार, स्थानीय बोले पहाड़ इतना बोझ नहीं झेल पाएंगे

Uttarakhand News: पहाड़ों की रानी मसूरी इस मानसून में भारी परेशानी में है। लगातार बारिश के बीच सड़कें बदहाल हो गई हैं और आम जनजीवन अस्तव्यस्त चल रहा है। सबसे गंभीर हालत पानी वाला बैंड के पास बनी हुई है, जहां इसी सीजन सड़क दो बार धंसकर बह चुकी है। बारबार टूटने से आवाजाही जोखिम भरी हो गई है और हादसे का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोग और कारोबारी ढुलमुल निर्माण व प्रशासन की अनदेखी से नाराज हैं। लंबे जाम ने रोजमर्रा की रफ्तार रोक दी है। मसूरी निवासी बिल्लू ने लोकल 18 से कहा कि उनका बचपन इन्हीं पहाड़ियों में बीता, अब बरसात में लैंडस्लाइड पहले से कहीं ज्यादा हो रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा ही रहा तो आगे सिर्फ मसूरी का नाम बच जाएगा।

Uttarakhand News: पानी वाला बैंड के पास दो बार धंसी सड़क

पानी वाला बैंड के समीप इस मानसूनी सीजन में सड़क दो बार धंसकर बह गई। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन के दावों की हवा निकल गई है। बारबार टूटी सड़क से गुजरना खतरनाक हो गया है। स्थानीय लोगों का गुस्सा इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा है।

जाम से अस्तव्यस्त हुआ जनजीवन

सड़कें टूटने के बाद लंबे ट्रैफिक जाम लगने लगे हैं। दुकानदार और आम नागरिक दोनों प्रभावित हैं। पर्यटन नगर होने के कारण आवाजाही पहले से ज्यादा रहती है। जाम के कारण रोज का काम ठप पड़ता दिख रहा है। हादसे की आशंका हर वक्त बनी हुई है।

Uttarakhand News: बिल्लू की चेतावनी, नाम भर रह जाएगा मसूरी

स्थानीय बुजुर्ग बिल्लू कहते हैं कि उनकी कई पुश्तें मसूरी में रहीं। बचपन हरी पहाड़ियों में बीता। धीरेधीरे शहर बदल रहा है। उनका साफ कहना है कि पहाड़ अब खतरे में नजर आते हैं। यही क्रम चला तो आने वाले समय में मसूरी सिर्फ नाम के लिए रह जाएगा।

राज्य बनने के बाद बढ़ी खुदाई

बिल्लू का कहना है कि उत्तराखंड अलग राज्य बना तब से पहाड़ों को खोदा जा रहा है। पहले बरसात में इतने लैंडस्लाइड नहीं होते थे। अब सड़कों पर लैंडस्लाइड बहुत बढ़ गए हैं। कंस्ट्रक्शन इतना ज्यादा हुआ है कि पहाड़ों को काटकर होटल और रिसोर्ट खड़े कर दिए गए हैं।

Uttarakhand News: बाहर के बिल्डर चला रहे होटल रिसोर्ट

स्थानीय बताते हैं कि बड़े सेठों के होटल रिसोर्ट चल रहे हैं जो उत्तराखंड के नहीं हैं। दूसरे राज्यों के बिल्डर इनका संचालन करते हैं। राज्य बनने से पहले उम्मीद थी कि स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार सुधरेगा। पर्यटन तो बढ़ा, लेकिन स्थानीय दशा वैसी नहीं सुधरी जैसी सोची गई थी।

कूड़े से बंद हो रहे जल स्रोत

यहां कूड़े के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं बताई गई। लोग कचरा खुले में डाल देते हैं। इससे जल स्रोत बाधित होते हैं और बंद हो जाते हैं। जो पानी बहकर निकलना चाहिए था वह पहाड़ों में सोख लिया जाता है। नतीजा कमजोर ढलान और ज्यादा धंसाव के रूप में दिख रहा है।

शिवालिक के कच्चे पहाड़ पर बढ़ता बोझ

मसूरी शिवालिक रेंज में है। बिल्लू कहते हैं कि इन पहाड़ों की उम्र ज्यादा नहीं होती, ये कच्चे पहाड़ हैं। दिन पर दिन हो रहे निर्माण से पहाड़ इतना भार नहीं झेल पाएंगे। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। अनियोजित निर्माण स्थानीय चिंता का केंद्र बना हुआ है।

Uttarakhand News: प्रशासन और विभाग के दावों पर सवाल

लगातार बारिश ने सड़कों की दुर्दशा उजागर कर दी है। पानी वाला बैंड जैसा संवेदनशील स्थान दो बार धंस चुका है। स्थानीय लोग निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं। पर्यटन सीजन में यह स्थिति शहर की छवि और सुरक्षा दोनों प्रभावित कर रही है।

मसूरी की वर्तमान तस्वीर सड़क धंसने, लैंडस्लाइड और जाम से घिरी हुई है। पानी वाला बैंड के पास एक ही मौसम में दो बार बहना स्थानीय आशंका को और गहरा करता है। बिल्लू जैसे पुराने निवासी पहाड़ों की खुदाई, बाहरी निर्माण और कूड़ा प्रबंधन को जिम्मेदार बता रहे हैं। शिवालिक के कच्चे पहाड़ पर लगातार बोझ बढ़ाने से आगे और नुकसान हो सकता है। प्रशासन अगर मरम्मत के साथ अनियोजित निर्माण और जल निकासी पर ध्यान दे तो खतरा घट सकता है। वरना स्थानीय चेतावनी यही रहेगी कि पहाड़ इतना नहीं झेल पाएंगे और मसूरी का नाम भर बच जाएगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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