Petrol-Diesel Price 9 Sep 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर तेजी से ऊपर चढ़ गई हैं। बुधवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि डब्ल्यूटीआई 94.42 डॉलर पर रहा।
सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है इसलिए यह तेजी देश के आयात बिल, रुपये और महंगाई पर सीधा असर डाल सकती है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तीन महीने से अधिक समय से फ्रीज हैं लेकिन तेल कंपनियों पर इन्हें बढ़ाने का दबाव बढ़ता दिख रहा है।
Petrol-Diesel Price 9 Sep 2026: पश्चिम एशिया संकट ने तेल बाजार में मचाई हलचल
सऊदी अरब के तेल प्लांट्स पर हमलों और ईरान के खार्ग द्वीप पर धमाकों की खबर ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। अगर इस क्षेत्र से निर्यात बाधित होता है तो वैश्विक आपूर्ति और तंग हो सकती है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें रहने पर भारत जैसे आयातक देशों के लिए स्थिति और कठिन हो जाएगी।
भारत के तेल आयात बिल में भारी बढ़ोतरी
अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का कच्चा तेल आयात बिल 56 प्रतिशत बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह 40.5 अरब डॉलर था। आयात की मात्रा लगभग समान रही लेकिन महंगे तेल की वजह से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़े। देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है।
Petrol-Diesel Price 9 Sep 2026: भारतीय क्रूड बास्केट भी सौ डॉलर के पार
पीपीएसी के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही। सितंबर में अब तक इसका औसत 100.75 डॉलर प्रति बैरल है। जुलाई में यह 82.04 और अगस्त में 90.19 डॉलर था। कुछ महीनों में ही औसत कीमत में जबरदस्त उछाल आया है।
पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर
अंतरराष्ट्रीय तेजी के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम तीन महीने से अधिक समय से नहीं बदले हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था।
मई में हुई थी लगातार बढ़ोतरी
मई के दूसरे हिस्से में चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं। उस दौरान पेट्रोल कुल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया था। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार फिर ऊपर जा रहा है इसलिए तेल कंपनियों पर दोबारा बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।
Petrol-Diesel Price 9 Sep 2026: सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर असर
महंगे कच्चे तेल का दबाव आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ रहा है। अगर पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचाई जाती तो मार्केटिंग मार्जिन नकारात्मक हो सकता है। आईसीआरए के अनुसार मौजूदा तेजी से ऑटो फ्यूल पर मार्जिन दबाव में आ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की यह तेजी भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि देश भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। कीमतें ऊंची बनी रहने पर आयात बिल और महंगाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं लेकिन तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
आगे की स्थिति पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर करेगी। उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में कीमतों पर नजर रखनी होगी क्योंकि लंबे समय तक फ्रीज बनाए रखना कंपनियों के लिए मुश्किल हो सकता है।
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