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Odisha News: सांप के काटने से मौतों के बाद एनएचआरसी का निर्देश, ओडिशा समेत राज्यों में एंटी स्नेक और तुरंत इलाज सुनिश्चित करें

Odisha News: मानसून के दौरान सांप काटने से कई मौतें सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने ओडिशा समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है। आयोग ने पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम का स्टॉक रखने और पीड़ितों को समय पर आपात इलाज देने को कहा है।

ओडिशा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मामले तेजी से बढ़े हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दो महीनों में आठ जिलों से 240 से अधिक मामले दर्ज हुए। भद्रक में 70 और जाजपुर में 57 मामले रहे। 25 अगस्त को एक ही दिन छह लोगों की मौत हुई, जिनमें चार नाबालिग थे। आयोग ने चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

Odisha News: एनएचआरसी ने राज्यों को क्या निर्देश दिए

आयोग ने ओडिशा के साथ अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संबोधित किया है। पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम का भंडार रखने को कहा गया है। सांप काटने वाले मरीजों को समय पर आपात इलाज मिलना चाहिए। देरी रोकने पर जोर दिया गया है।

निर्देश की वजह मानसून की मौतें

ओडिशा और अन्य राज्यों में मानसून के दौरान सांप काटने से अनेक मौतें हुईं। इन्हीं घटनाओं के बाद आयोग सक्रिय हुआ। जमीनी सुविधाओं से लेकर आईसीयू तक देरी खत्म करने की बात कही गई है। समय पर इलाज न मिलना चिंता का विषय बना।

Odisha News: अनमैपड इलाकों की पहचान जरूरी

एनएचआरसी ने राज्यों से कहा है कि सांप काटने वाले अनमैपड क्षेत्रों की पहचान करें। विश्वसनीय आंकड़े जुटाने पर भी जोर है। जोखिम वाले इलाकों की सूची साफ होनी चाहिए। बिना आंकड़ों के तैयारी अधूरी रहती है।

हाई रिस्क क्षेत्रों में ढांचा मजबूत करें

आयोग ने उच्च जोखिम वाले इलाकों में आपात ढांचा उपलब्ध कराने को कहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त होनी चाहिए। जीवन रक्षक उपकरण भी होने चाहिए। दूरदराज क्षेत्रों में यह कमी सबसे अधिक महसूस होती है।

प्रियंक कानूंगो ने चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूंगो ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में दूरस्थ और सांप काटने वाले इलाकों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता बतानी है। चार सप्ताह का समय दिया गया है। उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा गया है।

Odisha News: ओडिशा के बाढ़ इलाकों में मामले बढ़े

इस मानसून में बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांप काटने के मामले तेजी से बढ़े। पानी घुसने और सांपों के आशियाने खिसकने से खतरा बढ़ा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसी दबाव को दिखाते हैं। ग्रामीण इलाके अधिक प्रभावित रहे।

आठ जिलों में दो महीने के आंकड़े

दो महीनों में आठ जिलों से 240 से अधिक मामले आए। भद्रक में सबसे अधिक 70 मामले दर्ज हुए। जाजपुर में 57 मामले रहे। ये आंकड़े राज्य स्वास्थ्य विभाग के हैं। बाकी जिलों का ब्योरा अलग-अलग है।

एक दिन में छह मौतें, चार बच्चे शामिल

25 अगस्त को एक ही दिन छह लोगों की मौत सांप काटने से हुई। इनमें चार नाबालिग थे। मौतें सुंदरगढ़, भद्रक और बालासोर जिलों से बताई गईं। एक दिन की ये घटनाएं स्थिति की गंभीरता दिखाती हैं।

Odisha News: दूरदराज में एंटी स्नेक वेनम क्यों जरूरी

आयोग ने खास तौर पर दूरस्थ इलाकों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्धता पर सवाल किया है। काटने के बाद समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। स्टॉक न होने पर मरीज अस्पताल पहुंचने तक संकट में पड़ जाता है। रिपोर्ट इसी कमी को जांचने के लिए मांगी गई है।

आपात इलाज में देरी रोकने का संदेश

निर्देश का मूल स्वर समय पर इलाज सुनिश्चित करना है। प्राथमिक केंद्र से लेकर बड़े अस्पताल तक श्रृंखला मजबूत होनी चाहिए। जीवन रक्षक उपकरण हाई रिस्क क्षेत्रों में होने चाहिए। आयोग ने इसे मानव अधिकार से जोड़ा है।

आंकड़े जुटाने पर क्यों जोर

बिना सही आंकड़ों के स्टॉक और अस्पताल तैयारी अधूरी रहती है। अनमैपड इलाके छूट जाते हैं। आयोग ने विश्वसनीय डेटा संग्रह को प्राथमिकता दी है। राज्यों को इस दिशा में कदम बताने होंगे।

Odisha News: ओडिशा के अलावा अन्य राज्यों पर भी लागू

निर्देश केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है। अन्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी इसमें शामिल हैं। मानसून में कई राज्यों से मौतें आईं। इसलिए व्यापक निर्देश जारी किया गया।

मानसून में सांप काटने से हुई मौतों के बाद एनएचआरसी ने ओडिशा समेत राज्यों को पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम रखने और तुरंत इलाज देने का निर्देश दिया है। ओडिशा में दो महीनों में आठ जिलों से 240 से अधिक मामले आए, भद्रक में 70 और जाजपुर में 57 रहे।

25 अगस्त को एक दिन में छह मौतें हुईं, जिनमें चार बच्चे थे। प्रियंक कानूंगो ने चार सप्ताह में दूरस्थ इलाकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट मांगी है। अनमैपड क्षेत्रों की पहचान और आपात ढांचा मजबूत करना भी एजेंडे में है। राज्यों के अगले कदम से तय होगा कि मानसून के इस खतरे पर कितनी तेजी से काबू पाया जाता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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