Top 5 This Week

Related Posts

आफ्टरमार्केट सीएनजी किट लगवाने से पहले जान लें फायदे-नुकसान, वारंटी और आरटीओ नियम

Aftermarket CNG Kit: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के चलते कई कार मालिक आफ्टरमार्केट सीएनजी किट लगवाने पर विचार कर रहे हैं। फैक्ट्री फिटेड सीएनजी हर मॉडल में उपलब्ध नहीं होती। बाहर से किट लगवाने से रनिंग कॉस्ट कम हो सकती है लेकिन गलत फिटिंग, वारंटी प्रभावित होना और डिग्गी की जगह घटने जैसे नुकसान भी जुड़े हैं। किट में सिलेंडर, रिड्यूसर, इंजेक्टर और ईसीयू जैसे कई पुर्जे होते हैं। फिटिंग चार से पांच घंटे में होती है और अधिकृत वर्कशॉप से करवाना जरूरी माना जाता है। आरटीओ में आरसी अपडेट और बीमा कंपनी को सूचना देना भी अनिवार्य है।

Aftermarket CNG Kit: सीएनजी किट में कौन से पुर्जे होते हैं

आफ्टरमार्केट किट केवल सिलेंडर नहीं होती। सिलेंडर आमतौर पर डिग्गी में लगता है और खाली अवस्था में करीब 70 किलो तक भारी हो सकता है। कार्बन फाइबर वाले हल्के सिलेंडर महंगे होते हैं। रिड्यूसर इंजन बे में लगकर 200 बार के दबाव को कम करता है। इंजेक्टर रेल इंजन तक गैस पहुंचाती है। एमएपी सेंसर दबाव और तापमान बताता है। फिल्टर अशुद्धियां साफ करता है। सीएनजी ईसीयू मुख्य ईसीयू के साथ मात्रा और टाइमिंग तय करता है। डैशबोर्ड स्विच से पेट्रोल और सीएनजी के बीच बदलाव होता है।

कार में किट कैसे लगाई जाती है

फिटिंग अनुभवी और अधिकृत वर्कशॉप पर ही करवानी चाहिए। पूरी प्रक्रिया में चार से पांच घंटे लग सकते हैं। पहले इंजन और स्पार्क प्लग की जांच होती है। फिर रिड्यूसर, इंजेक्टर और ईसीयू सही जगह लगाए जाते हैं। सिलेंडर डिग्गी में मजबूत फ्रेम से फिट होता है। हाई प्रेशर पाइप और वायरिंग सुरक्षित तरीके से जोड़ी जाती है। गैस भरने के बाद लीक की जांच सेंसर और साबुन के पानी से की जाती है। अंत में सॉफ्टवेयर ट्यूनिंग और रोड टेस्ट होता है।

आफ्टरमार्केट किट के फायदे

सीएनजी पेट्रोल से सस्ती पड़ती है इसलिए रोजाना लंबी दूरी तय करने वालों का खर्च घट सकता है। अच्छी हालत वाली पुरानी पेट्रोल कार में किट लगवाकर नई कार खरीदने की जरूरत नहीं रहती। कई मॉडलों में कंपनी फैक्ट्री फिटेड सीएनजी नहीं देती। ऐसे में आफ्टरमार्केट किट अतिरिक्त विकल्प बन जाती है। सही फिटिंग और रखरखाव हो तो बचत दिख सकती है।

Aftermarket CNG Kit: किट लगवाने के नुकसान

बाहर से किट लगवाने पर कंपनी की वारंटी प्रभावित हो सकती है। खासकर इंजन और फ्यूल सिस्टम वाले हिस्सों पर असर पड़ सकता है। इसलिए पहले वारंटी शर्तें जांच लेनी चाहिए। सिलेंडर डिग्गी में लगने से सामान रखने की जगह कम हो जाती है। फैक्ट्री फिटेड कारों में डिजाइन पहले से सिलेंडर के हिसाब से होता है। खराब क्वालिटी या गलत फिटिंग से गैस लीक, परफॉर्मेंस गिरावट और इलेक्ट्रिकल समस्या हो सकती है।

किन कारों में किट न लगवाएं

डीजल कार में सामान्य सीएनजी किट लगाना आसान नहीं क्योंकि इंजन का काम अलग होता है। हाइब्रिड कार में पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों होते हैं इसलिए कैलिब्रेशन जटिल हो सकती है। इंजन पहले से कमजोर हो तो किट लगवाना ठीक नहीं। पहले खराबी ठीक करवाएं फिर विचार करें। हर मॉडल के लिए यह विकल्प उपयुक्त नहीं माना जाता।

मेंटेनेंस और नियमित जांच

किट लगने के बाद पाइप और कनेक्शन में लीकेज समय-समय पर जांचें। फिल्टर निर्माता की सलाह के अनुसार बदलवाएं। स्पार्क प्लग और इंजन की सर्विस नियमित रखें। सामान्य सर्विसिंग में सीएनजी सिस्टम को भी शामिल करवाएं। उपेक्षा से सुरक्षा और माइलेज दोनों प्रभावित हो सकते हैं। भरोसेमंद सेंटर पर ही जांच करानी चाहिए।

Aftermarket CNG Kit: आरटीओ और बीमा अपडेट जरूरी

किट लगने के बाद आरटीओ में वाहन की आरसी में सीएनजी की जानकारी दर्ज करानी होती है। बीमा कंपनी को भी सूचना दें। ऐसा न करने पर क्लेम के समय दिक्कत हो सकती है। दस्तावेज पूरे रखना कानूनी रूप से जरूरी है। मान्यता प्राप्त सेंटर से ही काम करवाएं ताकि कागजी प्रक्रिया आसान रहे।

आफ्टरमार्केट सीएनजी किट उन लोगों के लिए विकल्प हो सकती है जिनकी कार अच्छी हालत में है और जो रोजाना ज्यादा चलते हैं। खर्च घटने की संभावना है लेकिन वारंटी, डिग्गी स्पेस और फिटिंग की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। डीजल, हाइब्रिड या कमजोर इंजन वाली कारों में जोखिम ज्यादा है।

अधिकृत वर्कशॉप, नियमित मेंटेनेंस, आरटीओ और बीमा अपडेट से सुरक्षा बनी रहती है। केवल सस्ती गैस देखकर फैसला न लें। किट की क्वालिटी और सेंटर की विश्वसनीयता सबसे पहले जांचें। सही प्रक्रिया अपनाएं तो विकल्प काम का साबित हो सकता है।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles