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Stock Market Crash: निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, जानें गिरावट के पीछे की पूरी वजह

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त हलचल देखने को मिली, जब भारी बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 1400 अंक तक लुढ़क गया और आखिरकार तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट के चलते निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। बाजार में मची इस उथल-पुथल के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल जैसे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी अस्थिरता बनी रह सकती है, क्योंकि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इस भारी गिरावट के पीछे कौन-कौन से बड़े कारण काम कर रहे हैं।

Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में कितनी आई गिरावट

बीएसई के 30 शेयरों वाले प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। मजबूती के साथ खुलने के बावजूद कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 787.73 अंक तक फिसलकर 73,994.03 अंक तक पहुंच गया था। वहीं एनएसई के 50 शेयरों वाले निफ्टी में 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,118.60 अंक पर बंद हुआ, जो छह अप्रैल 2026 के बाद निफ्टी का सबसे निचला बंद स्तर है।

निवेशकों के डूबे 9 लाख करोड़ रुपये

इस भारी बिकवाली का सीधा असर बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर पड़ा, जिसमें 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। इसके बाद बीएसई का कुल मार्केट कैपिटल घटकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया। इतनी बड़ी रकम एक ही कारोबारी सत्र में खत्म होना निवेशकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

किन शेयरों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में करीब छह प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा इंटरग्लोब एविएशन यानी इंडिगो, टाइटन, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे, जिससे समूचे बाजार की धारणा और कमजोर हो गई।

आईटी शेयरों ने दी राहत की कुछ किरण

गिरावट भरे इस माहौल में आईटी सेक्टर के शेयरों ने कुछ राहत जरूर दी। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर में करीब 3.98 प्रतिशत और इन्फोसिस में 3.64 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। इसके अलावा टेक महिंद्रा 2.31 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस 2.18 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की कुल गिरावट थोड़ी सीमित रह सकी।

कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में तनाव

बाजार में इस गिरावट की एक बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ता तनाव है। सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ती हलचल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव के और गहराने की स्थिति में तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इस बीच ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 104 डॉलर के स्तर तक जा पहुंचा है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ी चिंता

अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के अहम स्तर को पार कर गई है, जो 2023 के बाद पहली बार हुआ है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि निवेशकों को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बनती है, जिसके चलते कुछ निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर इन सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं। इसी वजह से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक के नतीजे बुधवार को आने वाले हैं, जिसे लेकर बाजार में ब्याज दरों को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल के महंगाई आंकड़ों में भी दबाव देखा गया है, जिससे यह आशंका मजबूत हुई है कि फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।

Stock Market Crash: क्या कहना है बाजार विशेषज्ञों का

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिसके चलते घरेलू बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। उनका कहना है कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की इस सप्ताह होने वाली बैठकों से पहले निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के ऊंचे स्तर के करीब बने रहने से उभरते बाजारों की धारणा कमजोर हुई है, और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है।

कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र घरेलू शेयर बाजार के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में गहराता तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल जैसे कारकों ने मिलकर निवेशकों के भरोसे को हिला दिया। आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रुख अपनाने और वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए रखने की जरूरत है, ताकि आगे की रणनीति सही तरीके से तय की जा सके।

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Author: Sanjna Gupta

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