Delhi DTC Bus Strike: राजधानी दिल्ली में डीटीसी बसों के ड्राइवर और कंडक्टर बीते कुछ दिनों से हड़ताल पर हैं, जिसका सीधा असर शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। कई डिपो में बसें खड़ी नजर आ रही हैं, जिससे रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार करीब बारह हजार ड्राइवर-कंडक्टर इस आंदोलन में शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो निजी एजेंसियों या कंसेशनायर के माध्यम से डीटीसी बसें चलाते हैं। हड़ताल की वजह सिर्फ वेतन बढ़ाना नहीं बल्कि महंगाई भत्ता, समय पर इंक्रीमेंट, चिकित्सा सुविधा, बोनस और सामाजिक सुरक्षा जैसी कुल नौ मांगें हैं, जिन्हें लेकर कर्मचारी लंबे समय से आवाज उठा रहे थे।
Delhi DTC Bus Strike: रोजाना वेतन बढ़ाने की मुख्य मांग
यूनियन की सबसे अहम मांग दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर दो हजार रुपये करने की है। ड्राइवरों का तर्क है कि भारी वाहन चलाने का लाइसेंस और विशेष प्रशिक्षण होने के बावजूद उन्हें सामान्य न्यूनतम मजदूरी दर पर भुगतान किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल इन्हें प्रतिदिन करीब सात सौ सैंतालीस से आठ सौ बासठ रुपये के बीच वेतन मिल रहा है, जिसे नाकाफी बताया जा रहा है।
महंगाई भत्ते और इंक्रीमेंट पर अटकी बात
कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई भत्ते में करीब डेढ़ साल से कोई संशोधन नहीं हुआ है, जबकि नियमानुसार इसमें समय-समय पर बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। इसके अलावा हर पांच साल में मिलने वाला बेसिक इंक्रीमेंट भी वर्ष उन्नीस के बाद से लागू नहीं हो पाया और चौबीस से यह पूरी तरह लंबित पड़ा है, जिसे बहाल करने की मांग जोर पकड़ रही है।
छुट्टी, बोनस और मेडिकल सुविधा की मांग
ड्राइवर-कंडक्टर चाहते हैं कि सरकारी अवकाशों के दिन ड्यूटी करने पर उन्हें उचित भुगतान मिले। साथ ही संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी नियमित वार्षिक बोनस देने की मांग रखी गई है। बीमारी या इलाज की स्थिति में आर्थिक बोझ न बढ़े, इसके लिए पर्याप्त मेडिकल सुविधा और बीमा कवर देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा और अनुभव आधारित वेतन श्रेणी
कर्मचारी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े लाभ और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही निर्धारित पेड लीव की सुविधा भी चाहिए ताकि छुट्टी लेने पर वेतन कटौती का सामना न करना पड़े। यूनियन का यह भी दावा है कि दस से पंद्रह साल तक सेवा दे चुके अनुभवी ड्राइवरों को भी अकुशल श्रेणी में गिना जाता है, जबकि अनुभव के हिसाब से उन्हें कुशल कर्मचारी का दर्जा और उसी अनुरूप वेतन मिलना चाहिए।
यात्रियों की मुश्किलें और मेट्रो पर बढ़ा दबाव
हड़ताल के चलते कई इलाकों में डीटीसी बसों की उपलब्धता घट गई है, जिससे बस स्टॉप पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। परेशान लोग मेट्रो, ऑटो और कैब जैसे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। बढ़ते यात्री दबाव को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने अतिरिक्त ट्रेनें और अतिरिक्त फेरे चलाने की व्यवस्था की है, ताकि दैनिक यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।
Delhi DTC Bus Strike: सरकार का पक्ष और आगे की राह
सरकार की ओर से कहा गया है कि हड़ताल कर रहे ज्यादातर कर्मचारियों की नियुक्ति सीधे डीटीसी नहीं बल्कि निजी कंसेशनायरों के जरिए हुई है, इसलिए वेतन और सुविधाओं से जुड़े मसलों पर बातचीत के जरिए ही हल निकाला जाना चाहिए। हालांकि यूनियन का रुख साफ है कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
कुल मिलाकर डीटीसी हड़ताल का मामला केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें महंगाई भत्ता, समय पर इंक्रीमेंट, छुट्टी का भुगतान, बोनस, चिकित्सा सुविधा, सामाजिक सुरक्षा और अनुभव के अनुसार उचित वेतन श्रेणी जैसी नौ मांगें शामिल हैं। हजारों कर्मचारियों के इस आंदोलन ने राजधानी की परिवहन व्यवस्था को झकझोर दिया है और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और कंसेशनायर एजेंसियां कर्मचारियों की मांगों पर कब और किस तरह से रास्ता निकालती हैं।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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