E-Challan Rules 2026: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बकाया ई-चालान की वसूली पर चिंता जताते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई सुझाव दिए हैं। कोर्ट को बताया गया कि करीब 20,000 करोड़ रुपये का ट्रैफिक जुर्माना अब तक वसूल नहीं हो सका है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुझाव दिया कि जो लोग ई-चालान नहीं भर रहे, उनका जुर्माना बिजली बिल में जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही बकाया चालान वाली गाड़ियों का RC रिन्यूअल और मालिकाना हक का ट्रांसफर रोकने, फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट पर रोक लगाने और ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल रोकने या उसे सस्पेंड करने जैसे कदमों पर भी चर्चा हुई। यह सुनवाई ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट और बकाया ई-चालान की वसूली से जुड़ी याचिका पर हुई।
E-Challan Rules 2026: चालान जारी करना काफी नहीं, वसूली असली सवाल
सुनवाई के दौरान बेंच ने साफ कहा कि सिर्फ ई-चालान जारी करते रहना काफी नहीं है। पुलिस हजारों और लाखों ई-चालान काट सकती है, लेकिन असली मुद्दा जुर्माने की वसूली का है।
इसी को देखते हुए बेंच ने सुझाव दिया कि जो लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे, उनकी रकम बिजली बिल में जोड़ दी जाए। लोगों को बिजली बिल चुकाना ही पड़ता है, वरना कनेक्शन कट सकता है। बेंच ने कहा कि इस दिशा में काम करना होगा और देश में इसका कोई न कोई रास्ता निकालना ही पड़ेगा।
45,000 करोड़ के चालान, 20,000 करोड़ बाकी
कोर्ट को बताया गया कि अब तक कुल 45,000 करोड़ रुपये के चालान जारी हुए हैं। इनमें से 25,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। यानी करीब 20,000 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।
| मद | राशि |
|---|---|
| कुल जारी चालान | ₹45,000 करोड़ |
| अब तक वसूली | ₹25,000 करोड़ |
| बकाया राशि | ₹20,000 करोड़ |
कोर्ट ने उन गाड़ियों की पहचान के लिए रैंडम चेकिंग का सुझाव भी दिया, जिनके ई-चालान का भुगतान नहीं हुआ है।
RC, फिटनेस और PUC पर रोक के सुझाव
सुनवाई में बकाया चालान वाली गाड़ियों के खिलाफ कई कदमों पर चर्चा हुई। इनमें RC का रिन्यूअल न करना, डुप्लीकेट सर्टिफिकेट जारी न करना और भुगतान होने तक वाहन मालिक का नाम बदलने पर रोक शामिल है।
कोर्ट ने परिवहन पोर्टल पर ऐसी गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट करने और उनके ट्रांसफर पर रोक लगाने का सुझाव भी दिया। इसके अलावा फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट रोकने पर भी बात हुई।
ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई की चर्चा
बेंच के सामने ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल रोकने की बात भी आई। साथ ही पहले से चल रहे लाइसेंस को सस्पेंड करने के लिए कदम उठाने पर भी चर्चा हुई। ये सभी सुझाव हैं, अभी इन्हें आदेश या कानून के रूप में लागू नहीं किया गया है।
लोक अदालत के इंतजार में अटके चालान
कई लोग चालान निपटाने के लिए लोक अदालत का इंतजार करते हैं। चालान भरने की प्रक्रिया में कुछ बड़ी अड़चनें भी सामने आई हैं। ओवर-स्पीडिंग के चालान का ऑनलाइन भुगतान 90 दिनों तक किया जा सकता है। रेड लाइट उल्लंघन में 15 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करानी होती है, जिसके बाद मामला कोर्ट चला जाता है।
चालान से जुड़े SMS अलर्ट भी नियमित रूप से नहीं मिलते। कुछ यात्री पैसों की कमी का हवाला देकर मौके पर भुगतान से मना कर देते हैं। हर दिन नए जुर्माने बनते हैं, जबकि लोक अदालतें समय-समय पर लगती हैं। इससे पेंडिंग मामलों का बैकलॉग बढ़ता जाता है।
दिल्ली में अब तक उठाए गए कदम
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सितंबर 2025 में अपने ई-चालान सिस्टम को भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जोड़ा। इससे पुराने और मौजूदा सभी कंपाउंडेबल चालान UPI ऐप के जरिए भरे जा सकते हैं। नागरिकों को अलर्ट भेजने के लिए व्हाट्सएप को भी जोड़ा गया है।
लोक अदालतों और शाम की अदालतों के बाद अब न्यायपालिका और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस वीकेंड पर भी सुनवाई कर रही हैं। बैकलॉग घटाने के लिए ज्यादा बेंचों के साथ लोक अदालतें अब अधिक नियमित रूप से लग रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के ये सुझाव दिखाते हैं कि बकाया ई-चालान अब न्यायपालिका की गंभीर चिंता बन चुके हैं। 45,000 करोड़ के चालान में से 20,000 करोड़ रुपये की वसूली बाकी है। बिजली बिल में जुर्माना जोड़ने, RC और लाइसेंस पर रोक जैसे कदम फिलहाल सुझाव के स्तर पर हैं। इन्हें लागू करने के लिए राज्यों को आगे की रूपरेखा तय करनी होगी। वाहन चालकों के लिए बेहतर यही है कि वे बकाया चालान समय रहते UPI या ऑनलाइन माध्यम से चुका दें।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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