Nobel Peace Prize 2026: नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने 2026 का शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की विधिवेत्ता नवनेथम नावी पिल्लै को दिया है। सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को आगे बढ़ाने के प्रयासों के लिए है। समिति ने कहा कि इस वर्ष की विजेता ने युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार की सुनवाई सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। पिल्लै रंगभेद के दौर में डरबन के भारतीय तमिल परिवार में जन्मीं। वे दक्षिण अफ्रीका की उच्च अदालत में पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश रहीं और 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं। पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में दिया जाएगा।
समिति के अनुसार उनकी यात्रा एक धागे में बंधी है। शुरुआती वकालत में उन्होंने नेल्सन मंडेला और रंगभेद का विरोध करने वाले अन्य लोगों का बचाव किया। बाद में रवांडा न्यायाधिकरण, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से जुड़े मामलों में न्यायाधीश रहीं। पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है, जो करीब 1.2 मिलियन डॉलर के बराबर बताई गई है। रुपये में यह विनिमय दर पर करीब 11.66 करोड़ के आसपास बैठती है। 2025 में यह सम्मान वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को मिला था। इस सप्ताह यह पांचवां नोबेल ऐलान है।
नोबेल समिति ने किसे और क्यों चुना?
9 अक्टूबर 2026 को ओस्लो में घोषणा हुई। आधिकारिक उद्धरण में पिल्लै को ऐसी व्यक्ति बताया गया है, जिसने साहस और ईमानदारी से ज्यादा व्यापक वैश्विक कानूनी व्यवस्था की ओर राह दिखाई। समिति के अध्यक्ष योर्गेन वात्ने फ्राइडनेस ने उन्हें अपने समय की प्रमुख विधि विशेषज्ञों में गिना। समिति ने कहा कि ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मामलों में उन्होंने दिखाया कि कानूनी उपाय युद्ध और हिंसा के कृत्यों को रोकने में मदद कर सकते हैं।
उद्धरण में उनकी न्यायिक सख्ती, व्यक्तिगत निष्ठा और साहस को अलग से रेखांकित किया गया है। वे हाल तक कब्जाए फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्ष रहीं। इस समय म्यांमार पर नरसंहार के आरोप वाले अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के मामले में न्यायाधीश हैं। समिति ने इन भूमिकाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे को चौड़ा करने वाला काम कहा है। यह राजनीतिक मध्यस्थता का पुरस्कार नहीं, बल्कि कानूनी संस्थाओं को मजबूत करने का सम्मान बताया गया है।
रंगभेद और अदालत में उनकी शुरुआत क्या रही?
पिल्लै का जन्म 23 दिसंबर 1941 को डरबन में भारतीय तमिल परिवार में हुआ। बचपन और पढ़ाई रंगभेद के अलग-अलग कानूनों के बीच हुई। 1960 के दशक में उन्होंने अपनी लॉ फर्म खोली और राजनीतिक बंदियों के अधिकारों पर काम किया। नेल्सन मंडेला समेत कई कार्यकर्ताओं का बचाव इसी दौर में दर्ज है। मंडेला खुद बाद में शांति पुरस्कार विजेता बने। पिल्लै दक्षिण अफ्रीका से यह सम्मान पाने वाली पांचवीं व्यक्ति बताई गई हैं।
1995 में उन्हें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। यह पद संभालने वाली वे पहली गैर-श्वेत महिला थीं। रंगभेद खत्म होने के तुरंत बाद की इस नियुक्ति को समिति ने संरचनात्मक भेदभाव के खिलाफ लंबी लड़ाई का नतीजा माना। वकालत से पीठ तक का यह सफर स्थानीय अदालत तक सीमित नहीं रहा। रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की अध्यक्षता और बाद में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की न्यायाधीश की भूमिका ने उन्हें युद्ध अपराधों की सुनवाई के केंद्र में ला दिया।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में क्या भूमिका रही?
2008 से 2014 तक पिल्लै संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं। इस पद पर उन्होंने देशीय शिकायतों को संधि-निकायों और जांच आयोगों तक पहुंचाने का काम किया। उच्चायुक्त के बाद वे कब्जाए फिलिस्तीनी क्षेत्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्ष रहीं। गाजा पर उनकी टिप्पणियों को इजरायल ने खारिज किया था। नोबेल उद्धरण इस विवाद का फैसला नहीं सुनाता। वह उनके पूरे न्यायिक रिकॉर्ड को आधार बनाता है।
रवांडा न्यायाधिकरण में उन्होंने नरसंहार और यौन हिंसा को अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में परखने वाले फैसलों की पीठ देखी। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में युद्ध अपराधों की सुनवाई से जुड़ी रहीं। म्यांमार मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की मौजूदा भूमिका रोहिंग्या समुदाय पर नरसंहार के आरोप से जुड़ी है। समिति का कहना है कि इन मंचों पर उनकी मौजूदगी ने दिखाया कि अदालती आदेश हिंसा को पूरी तरह रोक न भी पाएं, तो जिम्मेदारी का रिकॉर्ड जरूर छोड़ते हैं।
पुरस्कार राशि, समारोह और पिछले विजेता का क्रम क्या है?
शांति पुरस्कार की राशि इस वर्ष 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है। समारोह 10 दिसंबर को ओस्लो में होगा, अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर। बाकी नोबेल स्टॉकहोम में दिए जाते हैं, शांति पुरस्कार नॉर्वे में रहता है। साहित्य, रसायन, भौतिकी और चिकित्सा के ऐलान के बाद यह पांचवां नाम है। 2025 की विजेता मारिया कोरिना माचाडो थीं। इस बार नामांकन में 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल बताए गए।
घोषणा के बाद पिल्लै की उम्र 85 वर्ष बताई गई। प्रारंभिक प्रतिक्रिया में उन्होंने खबर को तुरंत सच मानने से इनकार करते हुए वकील वाली सावधानी दिखाई और सत्यापन की बात कही। समिति अध्यक्ष ने कहा कि विजेता से बात अभी पूरी नहीं हुई थी। ओस्लो समारोह में पदक और प्रमाणपत्र अलग से दिए जाते हैं। राशि स्वीडिश क्रोना में जारी होती है, रुपये का आंकड़ा उस दिन की दर पर निर्भर करेगा।
भारतीय मूल का जिक्र क्यों हो रहा है?
पिल्लै दक्षिण अफ्रीका की नागरिक और वहीं की अदालतों से निकली विधिवेत्ता हैं। जन्म भारतीय तमिल परिवार में हुआ, डरबन में, रंगभेद के अधीन। भारतीय मूल का उल्लेख वंशावली का है, भारत सरकार या भारतीय न्यायपालिका की ओर से दिया गया सम्मान नहीं। उनके काम का केंद्र केप टाउन, हेग और जिनेवा रहा। मंडेला का बचाव, उच्च न्यायालय की पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश की भूमिका और मानवाधिकार उच्चायुक्त का कार्यकाल इसी क्रम में पढ़ा जाता है।
नोबेल समिति ने पुरस्कार को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रयासों से जोड़ा है। युद्ध अपराधों की सुनवाई, संस्थाओं को मजबूत करना और रंगभेद से वैश्विक अदालत तक की निरंतरता उद्धरण के तीन आधार हैं। 10 दिसंबर से पहले व्याख्यान और औपचारिक प्रतिक्रिया अलग जारी होगी। अभी आधिकारिक तथ्य इतना है कि 2026 की शांति पुरस्कार विजेता नवनेथम नावी पिल्लै हैं।
Read More Here:-
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

