Odisha News: ओडिशा के कई जिलों के कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव रद्द कर दिए गए हैं। कटक जिले के बांकी ऑटोनॉमस कॉलेज और नुआपाड़ा जिले के खरियार ऑटोनॉमस कॉलेज में न केवल चुनाव रद्द किए गए बल्कि साइन डाई भी घोषित कर दिया गया। इससे इन संस्थानों में सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। गंजाम, केंद्रपाड़ा, नबरंगपुर, जाजपुर, भद्रक और बालासोर जिलों के कॉलेजों में भी चुनाव नहीं हो पाए। छात्रों में नाराजगी है क्योंकि वे मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
किन-किन कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव रद्द हुए?
कटक के बांकी ऑटोनॉमस कॉलेज और नुआपाड़ा के खरियार ऑटोनॉमस कॉलेज में चुनाव रद्द कर साइन डाई घोषित किया गया। गंजाम जिले के आशिका स्थित ब्रुंदावन चंद्र कॉलेज में भी चुनाव रद्द कर दिए गए। केंद्रपाड़ा के पट्टामुंडई स्थित यू.के. महाबीर कॉलेज और नबरंगपुर के उमरकोट के एक कॉलेज में भी मतदान नहीं हो सका। जाजपुर जिले के मुगुपाल स्थित उपेंद्रनाथ शारदा महाविद्यालय में चुनाव रद्द हुए। भद्रक जिले में महिला कॉलेज और भंडारीपोखरी स्थित नामी महाविद्यालय में भी चुनाव नहीं हो पाए। बालासोर जिले के सोरो स्थित जांबेश्वर डिग्री कॉलेज भी इस सूची में शामिल है।
चुनाव रद्द होने से छात्रों पर क्या असर पड़ा?
चुनाव रद्द होने के बाद छात्रों में निराशा देखी गई। वे अपने प्रतिनिधि चुनने और अपनी समस्याएं उठाने का मौका नहीं पा सके। बांकी और खरियार कॉलेजों में साइन डाई घोषित होने से नियमित क्लासेस और अन्य गतिविधियां भी ठप हो गईं। कई सालों बाद छात्र संघ चुनाव शुरू किए गए थे, लेकिन रद्द होने से छात्रों को लगता है कि उनका लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुआ है। कॉलेज प्रशासन ने तनाव और विवाद की वजह से चुनाव टालने का फैसला लिया।
चुनाव रद्द करने के पीछे क्या कारण रहे?
कॉलेज अधिकारियों और जिला प्रशासन का कहना है कि नामांकन विवाद, प्रचार के दौरान तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण चुनाव रद्द करना पड़ा। कुछ जगहों पर नामांकन पत्रों को लेकर आपत्तियां उठीं और प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच टकराव की आशंका जताई गई। प्रशासन का तर्क है कि हिंसा से बचने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुनाव टालना जरूरी था। हालांकि छात्रों का आरोप है कि पर्याप्त तैयारी और संवाद के बिना चुनाव रद्द कर दिया गया।
मोहन माझी सरकार पर क्या सवाल उठ रहे हैं?
कई सालों के अंतराल के बाद छात्र संघ चुनाव शुरू करने का फैसला मोहन चरण माझी सरकार ने लिया था। लेकिन कई जिलों में चुनाव रद्द होने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या कॉलेज प्रशासन और जिला अधिकारी शांतिपूर्ण मतदान के लिए पर्याप्त तैयार थे। सरकार का कहना है कि शांति बनाए रखना प्राथमिकता है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि तनाव की संभावना मात्र से चुनाव रद्द करना आसान रास्ता बन गया है। राज्य स्तर पर इन रद्दीकरणों की समीक्षा की मांग की जा रही है।
आगे क्या हो सकता है?
चुनाव रद्द होने से कई कॉलेजों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। छात्रों को उम्मीद है कि प्रशासन स्थिति को संभालकर चुनाव कराने का कोई विकल्प तलाशे। फिलहाल अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है कि क्यों मतदान नहीं हो सका और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। कई साल बाद शुरू हुए इन चुनावों का रुकना छात्र राजनीति और कैंपस डेमोक्रेसी के लिए एक झटका माना जा रहा है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।
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