Bihar Krishi Input Anudan Yojana: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को कृषि विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत 2 लाख 48 हजार 407 बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित किसानों के बैंक खातों में सीधे 112.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी गई, जिससे किसानों को बिना किसी मध्यस्थ के तुरंत आर्थिक सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में लाभार्थियों को राशि ट्रांसफर करने का बटन दबाया और कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय किसानों की मदद करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
राज्यभर से कुल 4.57 लाख किसानों ने इस योजना के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में पात्र पाए गए 2.48 लाख किसानों को आर्थिक मदद दी गई है। शेष आवेदकों को दूसरे चरण में सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र किसान अनुदान से वंचित नहीं रहेगा।
Bihar Krishi Input Anudan Yojana के तहत किसानों को कितना पैसा मिल रहा है?
बिहार सरकार बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को कृषि इनपुट अनुदान प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत सहायता की दरें क्षेत्र के प्रकार पर निर्भर करती हैं। बिना सिंचाई वाले क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये, सिंचित क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 17,000 रुपये तथा बारहमासी फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 22,500 रुपये की दर से आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक सामान खरीदने में मदद करती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि फसल नुकसान के बाद किसानों को फिर से खेती शुरू करने के लिए आर्थिक संबल जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रभावित किसान जल्द से जल्द अपने खेतों में काम शुरू कर सकें। इस बार बाढ़ और अत्यधिक बारिश के कारण कई जिलों में खरीफ फसल को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके कारण यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
बचे हुए किसानों को कृषि इनपुट अनुदान का पैसा कब मिलेगा?
पहले चरण में जिन किसानों को राशि नहीं मिल पाई है, उन्हें दूसरे चरण में सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्गा पूजा के बाद यह राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि 22 अक्टूबर से एक विशेष अभियान चलाया जाए। इस अभियान के जरिए उन सभी बाढ़ प्रभावित किसानों को चिह्नित किया जाएगा, जो अभी तक अनुदान से वंचित रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आपदा से प्रभावित कोई भी किसान मदद के बिना नहीं रहना चाहिए। विभागों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आवेदन की जांच पूरी कर शेष पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जाए। इससे किसानों को अगली बुआई के लिए समय पर धन उपलब्ध हो सकेगा।
किन जिलों में कितने किसानों को अनुदान मिला?
पहले चरण में सबसे अधिक लाभार्थी भागलपुर और बेगूसराय जिलों से रहे। भागलपुर में 74,455 किसानों को राशि मिली, जबकि बेगूसराय में 50,579 किसानों को सहायता प्रदान की गई। समस्तीपुर के 29,995 और भोजपुर के 36,097 किसानों को भी लाभ मिला। वैशाली में 12,146, मधेपुरा में 8,832, पूर्णिया में 5,963 तथा पटना में 5,845 किसानों के खाते में राशि पहुंची।
अन्य जिलों में लखीसराय (4,846), औरंगाबाद (3,776), सारण (3,330), कटिहार (2,892), अरवल (2,773), मुंगेर (2,575), खगड़िया (2,388), शेखपुरा (1,449), पश्चिम चंपारण (414) और कैमूर (319) के किसानों को भी अनुदान मिला। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित उत्तर और पूर्वी बिहार के जिलों में सहायता का दायरा व्यापक रहा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मौके पर क्या कहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर राहत देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों द्वारा बाढ़ राहत कार्यों में किए गए समन्वय की सराहना की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने किसानों के हितों की रक्षा और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए हैं।
इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शेष किसानों की मदद में कोई कोताही न बरतें और प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करें।
कृषि इनपुट अनुदान योजना बिहार में किसानों को आपदा के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। डीबीटी के जरिए राशि सीधे खातों में पहुंचने से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि किसानों को त्वरित राहत भी मिली है। सरकार का कहना है कि आगे भी ऐसे अभियान चलाए जाएंगे, ताकि कोई भी पात्र किसान सहायता से बाहर न रहे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसान अब इस राशि का उपयोग कर अपनी खेती को दोबारा पटरी पर ला सकेंगे।
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Sanjana Gupta
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