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Tulsi Plant Care Tips: तुलसी के पौधे को हरा-भरा और घना कैसे रखें? गार्डनिंग एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा के आसान टिप्स

Tulsi Plant Care Tips: घर की बालकनी या आंगन में तुलसी का पौधा हरा-भरा और घना दिखे तो अच्छा लगता है। लेकिन कई बार नई शाखाएं नहीं निकलतीं, पत्तियां कम हो जाती हैं या पौधे की बढ़त रुक जाती है। गार्डनिंग एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा ने बताया कि सही छंटाई, गमले का आकार, खाद और मौसम के अनुसार देखभाल से तुलसी को फिर से घना बनाया जा सकता है।

तुलसी का पौधा घना बनाने के लिए नियमित छंटाई जरूरी है। जब पौधे में मंजरी आने लगे तो उसे समय पर काट दें। मंजरी को ज्यादा देर तक छोड़ने से नई पत्तियों और शाखाओं की बढ़त प्रभावित हो सकती है। समय पर छंटाई करने से नई कोपलें आती हैं और पौधा घना बनता है।

तुलसी में मंजरी आने पर क्या करना चाहिए?

जब तुलसी के पौधे में फूल जैसी मंजरी दिखने लगे तो उसे काट देना चाहिए। गार्डनिंग एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा के अनुसार, मंजरी को पौधे पर ज्यादा समय तक छोड़ने से नई पत्तियों और शाखाओं की बढ़त रुक सकती है। नियमित छंटाई से पौधे में नई कोपलें निकलती हैं और वह घना बनता है।

छंटाई करते समय साफ कैंची या चाकू का इस्तेमाल करें। मंजरी को तने के पास से काटें। इस प्रक्रिया से पौधा अपनी ऊर्जा नई शाखाओं और पत्तियों में लगाता है। कई लोग मंजरी को छोड़ देते हैं, जिससे पौधा कमजोर और पतला दिखने लगता है।

तुलसी के लिए कितने साइज का गमला सही रहता है?

तुलसी को अच्छी तरह बढ़ाने के लिए गमले का सही आकार जरूरी है। तरुण चोपड़ा कहते हैं कि इसे कम से कम 12 से 15 इंच के गमले में लगाएं। बहुत छोटा गमला जड़ों को फैलने नहीं देता और पौधा ठीक से नहीं बढ़ता।

गमले में पानी निकलने के लिए नीचे छेद होना चाहिए। अगर पानी मिट्टी में जमा रहता है तो जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा कमजोर हो जाता है। सही आकार का गमला जड़ों को पर्याप्त जगह देता है, जिससे पौधा स्वस्थ और घना रहता है।

गर्मी और सर्दी में तुलसी की देखभाल कैसे करें?

गर्मी में तुलसी को सीधी तेज धूप से बचाना चाहिए। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक तेज धूप से पौधे को दूर रखें। ऐसी जगह रखें जहां रोशनी तो मिले लेकिन सीधी धूप न पड़े। जरूरत हो तो गमले को घर के अंदर या छांव वाली जगह पर शिफ्ट कर दें।

सर्दियों में खासकर रात के समय पौधे को ठंड और ओस से बचाना जरूरी है। पौधे को साफ कपड़े से ढक सकते हैं। कपड़ा ऐसे रखें कि पौधे को नुकसान न पहुंचे और दिन में उसे रोशनी मिलती रहे। पानी नियमित दें लेकिन ज्यादा न डालें। मौसम के अनुसार स्थान बदलना तुलसी की सेहत के लिए फायदेमंद है।

तुलसी में कौन सी खाद डालें और कितनी बार दें?

अगर तुलसी लंबा तो हो रहा है लेकिन नई शाखाएं नहीं आ रही हैं तो मिट्टी में पोषण की कमी हो सकती है। तरुण चोपड़ा के अनुसार, तुलसी के लिए वर्मीकम्पोस्ट या केंचुआ खाद अच्छी रहती है। खाद डालने से पहले गमले की ऊपर की मिट्टी को हल्के से हटा लें और उसमें खाद मिला दें। खाद तने के बिल्कुल पास न डालें।

12 से 15 इंच के गमले के लिए 2 से 3 मुट्ठी वर्मीकम्पोस्ट काफी है। गोबर की खाद भी डाल सकते हैं लेकिन ताजा गोबर सीधे न डालें। अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद इस्तेमाल करें। ज्यादा खाद डालने से पौधे को नुकसान हो सकता है।

साल में कितनी बार खाद देना सही रहता है?

गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार तुलसी के पौधे की मिट्टी में साल में दो या तीन बार खाद डाल सकते हैं। अक्टूबर और फरवरी-मार्च के आसपास खाद डालना ठीक रहता है। खाद डालते समय पौधे की हालत, मौसम और मिट्टी की नमी पर ध्यान दें।

नियमित छंटाई, सही साइज का गमला, पानी निकासी का ध्यान और जरूरत के हिसाब से खाद देने से तुलसी की बढ़त अच्छी रह सकती है। इन आसान तरीकों को अपनाकर तुलसी के पौधे को हरा-भरा और घना बनाए रखा जा सकता है।

तरुण चोपड़ा की सलाह है कि पौधे की नियमित देखभाल करें। सही समय पर छंटाई, उचित गमला और मौसम के अनुसार खाद व पानी देने से तुलसी साल भर स्वस्थ रहती है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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