MP News: भोपाल शहर के सुनियोजित विकास के दावे के साथ तैयार किए गए भोपाल मास्टर प्लान 2047 में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी लोकल एरिया प्लान (एलएपी) को नीतिगत स्पष्टता से दूर कर दिया गया है। नगर नियोजन का स्थापित और वैज्ञानिक नियम है कि पूरे शहर के लिए केवल एक व्यापक कागजी खाका तैयार करने से काम नहीं चलता। जब तक जोन और वार्ड स्तर पर विस्तृत और जमीनी योजनाएं तैयार नहीं होतीं, तब तक टिकाऊ और संतुलित विकास संभव नहीं हो पाता। अफसोस की बात यह है कि अफसरों ने एलएपी के माइक्रो-प्लानिंग मॉडल पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। प्रारूप में यह कहीं स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये लोकल एरिया प्लान कब तैयार होंगे और कब लागू होंगे।
समय-सीमा तय न होने के कारण शहर में बिना वहन-क्षमता के बहुमंजिला इमारतों और नए निर्माणों की अनुमति मिलने लगेगी। इससे पुराने और नए रिहायशी इलाकों का शहरी संतुलन पूरी तरह बिगड़ना तय है। भोपाल जैसे तेजी से बढ़ते शहर में आबादी का दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। ऐसे में बिना ठोस जमीनी योजना के विकास के नाम पर निर्माण की छूट देना भविष्य में बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
MP News: जमीन का सीमांकन नहीं हुआ तो चरमराएगा पूरा सिस्टम
जब तक जोन स्तर पर लोकल एरिया प्लान अधिसूचित नहीं होते, तब तक बढ़ती आबादी के अनुपात में नागरिक सेवाओं का विस्तार असंभव रहेगा। वार्ड स्तर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए जमीन आरक्षित किए बिना अतिरिक्त निर्माण की छूट देने से ड्रेनेज सिस्टम बैक मारेगा और जलभराव के हालात बार-बार बनेंगे। योजना में पानी की आपूर्ति का ठोस खाका केवल वर्ष 2031 तक 543 एमएलडी का ही खींचा गया है। 2047 तक के 209 एमएलडी के गैप को नजरअंदाज कर घनी बसाहट की राह खोली जा रही है।
नए ट्रांसफार्मर और 33/11 केवी सब-स्टेशनों के लिए जमीनों का सीमांकन न होने से भविष्य में ग्रिड ओवरलोड और लो-वोल्टेज की समस्या विकराल रूप ले लेगी। बिजली, पानी और सीवेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना केवल ऊंची इमारतें खड़ी करना शहर के ढांचे को कमजोर करने जैसा है। पुराने इलाकों में पहले से ही ये समस्याएं मौजूद हैं। नए इलाकों में बिना योजना के विकास करने से स्थिति और खराब होगी।
नगर नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि मास्टर प्लान सिर्फ एक व्यापक नीतिगत दस्तावेज होता है। असली विकास जमीन पर तभी दिखता है जब हर जोन और सेक्टर का अलग लोकल एरिया प्लान बने। पिछले 30 सालों में सार्वजनिक उपयोगिताओं और सड़कों का 50 से 70 प्रतिशत काम अधूरा रह गया। ऐसे में नए ड्राफ्ट में एलएपी की बाध्यकारी डेडलाइन तय करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए थी। जब तक किसी जोन में सीवेज, पानी और बिजली नेटवर्क की प्रमाणित क्षमता तय न हो, तब तक वहां अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देना सीधे तौर पर शहर के आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला कदम होगा।
एक्सपर्ट्स की राय और संवैधानिक प्रावधान
इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया के सचिव सुमित गोठी का कहना है कि संविधान के 74वें संशोधन के अनुसार लोकल एरिया प्लान बनाने का अधिकार और उत्तरदायित्व स्थानीय नगर निगम का है। मास्टर प्लान को लागू करने के लिए जोन वाइज प्लानिंग जरूरी है। बिना इसके विकास सिर्फ कागजी कवायद बनकर रह जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हर जोन की क्षमता का आकलन नहीं होता, तब तक निर्माण की अनुमति देना खतरनाक है।
संयुक्त संचालक टीएंडसीपी नीरज आनंद लिखार ने बताया कि जो एजेंसी एलएपी बनाएंगी, वह उस क्षेत्र का रीडेवलपमेंट करेगी। मेट्रो, नगर निगम और राज्य सरकार के उपक्रम एलएपी बना सकते हैं। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) में मेट्रो के 500 मीटर क्षेत्र को एलएपी में शामिल किया गया है। यह अच्छा कदम है लेकिन बिना समय-सीमा के ये योजनाएं कब और कैसे लागू होंगी, यह सवाल बना हुआ है।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में कई अच्छी बातें हैं लेकिन सबसे अहम कड़ी यानी माइक्रो प्लानिंग को अनदेखा करना बड़ी कमी है। शहर का भविष्य इन्हीं छोटी-छोटी योजनाओं पर निर्भर करता है। अगर जोन और वार्ड स्तर पर जमीन का सीमांकन, सेवाओं की क्षमता और निर्माण की सीमा तय नहीं होती तो बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागज पर रह जाएंगे।
पुराने और नए इलाकों पर पड़ने वाला असर
पुराने रिहायशी इलाकों में पहले से ही संकरी सड़कें, कमजोर ड्रेनेज और बिजली की समस्या है। बिना क्षमता आकलन के नए निर्माण की अनुमति मिलने से ये समस्याएं और बढ़ेंगी। नए इलाकों में भी अगर जमीन का सीमांकन नहीं हुआ तो भविष्य में सड़कें, पार्क, स्कूल और अस्पताल के लिए जगह नहीं बचेगी। पानी की आपूर्ति में गैप पहले से ही बताया जा रहा है। 2047 तक आबादी बढ़ेगी तो पानी की कमी और गंभीर हो सकती है।
भोपाल की आबादी लगातार बढ़ रही है। लोग रोजगार और बेहतर जीवन के लिए शहर की ओर आ रहे हैं। ऐसे में मास्टर प्लान को सिर्फ दस्तावेज नहीं बल्कि लागू करने योग्य बनाना जरूरी है। लोकल एरिया प्लान की समय-सीमा तय न होना सबसे बड़ी चिंता का विषय है। अगर यह तय नहीं होता तो शहर में अव्यवस्थित निर्माण बढ़ेगा और शहरी संतुलन बिगड़ेगा।
नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को मिलकर इस कमी को दूर करना चाहिए। जोन वाइज प्लानिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए और हर प्लान के लिए स्पष्ट डेडलाइन तय करनी चाहिए। तभी भोपाल का विकास सुनियोजित और टिकाऊ हो सकता है। अन्यथा मास्टर प्लान 2047 के दावे सिर्फ कागजी साबित होंगे और शहर को भविष्य में कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
निष्कर्ष
भोपाल के विकास के लिए मास्टर प्लान जरूरी है लेकिन उसके साथ लोकल एरिया प्लान भी उतना ही जरूरी है। समय-सीमा तय किए बिना कोई भी योजना पूरी नहीं हो सकती। अधिकारियों को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि शहर का भविष्य सुरक्षित रहे। जोन वाइज प्लानिंग के बिना भोपाल का संवरना मुश्किल है। जनता और विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान को और मजबूत बनाया जाना चाहिए।
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