Top 5 This Week

Related Posts

Odisha News: चक्रवात ‘अर्णब’ के बीच ओडिशा का बड़ा दावा, 43 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया—कैसे टली तबाही?

Odisha News: चक्रवात ‘अर्णब’ के प्रभाव वाले समय में ओडिशा सरकार और जिला प्रशासन की पूर्व तैयारी ने अपना असर दिखाया। बुधवार शाम तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विशेष राहत आयुक्त के कंट्रोल रूम में स्थिति की समीक्षा करते हुए यह जानकारी दी। उनके अनुसार, प्रभावित आठ जिलों में समय पर लोगों को आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया और समुद्र में गए सभी मछुआरे सुरक्षित लौट आए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से कई बार फोन पर बात कर तैयारियों की जानकारी ली थी। राज्य सरकार आंध्र प्रदेश प्रशासन से भी लगातार संपर्क में रही।

चक्रवात के दौरान मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, कालाहांडी, गंजाम, गजपति और नुआपड़ा जिलों में 634 आश्रय स्थल सक्रिय किए गए। इनमें कुल 43,827 लोगों को ठहराया गया। इन शिविरों में पका भोजन, सूखा राशन, पेयजल और दवाओं की व्यवस्था की गई। प्रशासन ने निचले इलाकों में जलभराव की संभावना को देखते हुए पर्याप्त पंप तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं।

चक्रवात अर्णब में ओडिशा ने शून्य जनहानि कैसे हासिल की?

राज्य और जिला प्रशासन की सतर्कता ने इस लक्ष्य को संभव बनाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। दो उपमुख्यमंत्रियों, छह मंत्रियों और सात आईएएस अधिकारियों को विभिन्न जिलों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था। कुल 313 राहत एवं बचाव टीमें मैदान में थीं। इनमें ओड्राफ की 60, एनडीआरएफ की नौ और अग्निशमन सेवा की 244 टीमें शामिल रहीं। लगातार बारिश और तेज हवाओं के बावजूद अब तक किसी मौत की खबर नहीं आई है। प्रशासन का कहना है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ के आशीर्वाद के साथ-साथ सरकारी तंत्र की सक्रियता ने स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद की।

कितने लोगों को आश्रय स्थलों में सुरक्षित रखा गया और किन जिलों में?

आठ जिलों के 634 आश्रय स्थलों में 43,827 लोगों को ठहराया गया। सबसे ज्यादा प्रभाव गजपति जिले पर पड़ा, जहां मोहना में 182.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। कोरापुट के पोटांगी में सबसे अधिक 188 मिलीमीटर वर्षा हुई। राज्य के 17 ब्लॉकों में 105 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान कोरापुट के प्रभारी उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, गजपति के प्रभारी मंत्री सूर्यवंशी सूरज और मलकानगिरी के प्रभारी मंत्री नित्यानंद गोंड से फोन पर बात कर बारिश, संभावित नुकसान और नदियों के जलस्तर की जानकारी ली। राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

समुद्र में गए मछुआरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हुई?

चक्रवात की चेतावनी के बाद गंजाम से बालेश्वर तक तटीय इलाकों से 19,143 नौकाओं में मछुआरे समुद्र में गए थे। प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष अभियान चलाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, सभी मछुआरे सुरक्षित तट पर लौट आए हैं। इस काम में सरकार को शत-प्रतिशत सफलता मिली। मछली पकड़ने वाली नौकाओं की निगरानी और समय पर चेतावनी देने से कोई नाव समुद्र में नहीं फंसी। यह कदम चक्रवात प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई चक्रवातों में मछुआरों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती रही है।

गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की स्थिति क्या रही?

चक्रवात के दौरान 2,245 गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया। इस अवधि में 931 बच्चों का जन्म हुआ। प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाएं, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने समय पर कदम उठाए। यह आंकड़ा बताता है कि आपदा के बीच भी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं हुईं।

आगे क्या सावधानियां बरती जा रही हैं और स्थिति पर नजर कैसे रखी जा रही है?

चक्रवात का खतरा कम होने के बाद भी प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए पर्याप्त पंपों की व्यवस्था कर पानी निकालने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. अरविंद पाढ़ी और एसआरसी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बल तैनात किए जाएंगे। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है और राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं।

ओडिशा की इस बार की तैयारी को पिछले चक्रवातों से सीख का नतीजा माना जा रहा है। समय पर निकासी, मजबूत संचार व्यवस्था और केंद्र-राज्य समन्वय ने स्थिति को नियंत्रण में रखा। हालांकि, गजपति और आसपास के इलाकों में बारिश का असर अब भी देखा जा रहा है। प्रशासन लोगों से निचले इलाकों से दूर रहने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील कर रहा है।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles