UP News: हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 600 किलो संदिग्ध पनीर जब्त किया है। यह माल मुरादाबाद से दिल्ली की ओर ले जाया जा रहा था। राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर चोटीवाला ढाबे के पास वाहनों की जांच के दौरान यह पनीर एक वाहन से बरामद हुआ। अधिकारियों ने पाया कि पनीर को अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा गया था, जिससे उसमें तेज दुर्गंध और खट्टापन आ रहा था। विभाग ने तुरंत नमूने लेकर शेष माल को नष्ट करने का फैसला लिया।
जांच में पता चला कि पनीर एक बड़े प्लास्टिक ड्रम, एक फ्रीजर और दो बड़ी पेटियों में भरा हुआ था। कुल मात्रा लगभग 600 किलो थी। अनुमानित कीमत करीब 1.81 लाख रुपये बताई गई। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई शुरू करते हुए टीम ने दो नमूने प्रयोगशाला भेजे और बाकी 597 किलो पनीर को जेसीबी की मदद से गड्ढा खुदवाकर जमीन में दबा दिया। अभी तक लैब रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए मिलावट की पुष्टि बाद में होगी।
हापुड़ में संदिग्ध पनीर कैसे और कहां पकड़ा गया?
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर नियमित चेकिंग कर रही थी। चोटीवाला ढाबे के पास मुरादाबाद से दिल्ली की दिशा में जा रहे एक वाहन को रोका गया। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में पनीर मिला। वाहन चालक और साथ वाले लोगों से पूछताछ की गई। अधिकारियों के मुताबिक, पनीर की पैकिंग और भंडारण की स्थिति सामान्य नहीं थी। ऐसे में विभाग ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर तुरंत जांच शुरू कर दी। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को खराब या संदिग्ध खाद्य सामग्री से बचाने के उद्देश्य से की गई।
पनीर की स्थिति कैसी थी और उसे किस तरह रखा गया था?
जब्त किए गए पनीर को गंदे प्लास्टिक ड्रम, फ्रीजर और बड़ी पेटियों में रखा गया था। जांच के दौरान उसमें से तेज दुर्गंध आ रही थी और खट्टापन भी महसूस किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भंडारण की स्थिति अस्वच्छ थी, जिससे पनीर की गुणवत्ता संदिग्ध हो गई। लगभग 600 किलो माल में से दो नमूने अलग किए गए। बाकी मात्रा को बाजार में जाने से रोक दिया गया। विभाग का कहना है कि खराब रखरखाव के कारण ही इसे तुरंत नष्ट करने का निर्णय लिया गया, ताकि किसी उपभोक्ता तक यह न पहुंच सके।
597 किलो पनीर को कैसे नष्ट किया गया और इसकी कीमत क्या थी?
खाद्य सुरक्षा टीम ने जेसीबी की मदद से मौके पर ही गड्ढा खुदवाया। इसके बाद 597 किलो पनीर को उस गड्ढे में डालकर मिट्टी से दबा दिया गया। नष्ट किए गए माल की अनुमानित कीमत करीब 1.81 लाख रुपये बताई गई है। यह प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई। विभाग ने साफ किया कि जब तक लैब रिपोर्ट नहीं आती, तब तक पनीर को संदिग्ध माना जाएगा। गड्ढे में दबाने का तरीका अपनाया गया ताकि वह दोबारा उपयोग में न आ सके। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई को देखा और विभाग की सतर्कता की सराहना की।
लैब जांच के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी?
विभाग ने पनीर के दो नमूने प्रयोगशाला में भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि इसमें मिलावट थी या केवल भंडारण की खराबी के कारण दुर्गंध आ रही थी। अगर रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, वाहन और माल से जुड़े लोगों से पूछताछ जारी है। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस बीच, विभाग अन्य वाहनों की जांच भी बढ़ा रहा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई का क्या महत्व है?
हापुड़ में हुई यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गंदे ड्रमों और अस्वच्छ परिस्थितियों में पनीर का परिवहन उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता था। विभाग ने समय पर जांच कर माल को बाजार से बाहर रखा। ऐसे मामलों में प्रशासन की सतर्कता लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने में मदद करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित चेकिंग और सख्त कार्रवाई से ही मिलावट और खराब भंडारण पर अंकुश लगाया जा सकता है। उपभोक्ताओं को भी सलाह दी जाती है कि वे खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और पैकिंग पर ध्यान दें।
हापुड़ की इस घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है। मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले मार्ग पर वाहनों की जांच जारी रहेगी। लैब रिपोर्ट आने तक विभाग स्थिति पर नजर रखे हुए है। यह कार्रवाई बताती है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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