Alwar BJP Rebellion: अलवर नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी में बगावत का माहौल बन गया है। सोमवार को कई वरिष्ठ नेताओं ने पद और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। प्रवक्ता नरेश धानावत समेत कई दिग्गज अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे हैं। पार्टी के मनाने के प्रयासों के बावजूद नाराजगी कम नहीं हुई है। अलवर बीजेपी बगावत की यह स्थिति निकाय चुनावों से पहले पार्टी के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है।
Alwar BJP Rebellion: टिकट वितरण से बढ़ा असंतोष
अलवर नगर निगम के विभिन्न वार्डों में टिकट बांटने के बाद कई स्थानीय नेता नाराज हो गए। जिन लोगों को टिकट की उम्मीद थी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजतन विरोध का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ नेताओं ने परिवार के अन्य सदस्यों को मैदान में उतारने का फैसला किया तो कुछ ने सीधे निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया।
प्रवक्ता नरेश धानावत ने दिया इस्तीफा
बीजेपी प्रवक्ता नरेश धानावत ने वार्ड-16 से टिकट मांगा था लेकिन पार्टी ने उनका नाम नहीं लिया। विरोध जताते हुए उन्होंने जिलाध्यक्ष को इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन भी कर लिया। स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
Alwar BJP Rebellion: वार्ड-18 में परिवार का मैदान में उतरना
पिछले चुनाव में वार्ड-18 से निर्दलीय अविनाश खंडेलवाल पार्षद चुने गए थे। इस बार उन्हें टिकट देने का आश्वासन मिला था लेकिन ऐन मौके पर टिकट काट दिया गया। अविनाश के भाई आशीष खंडेलवाल ने अब निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। अविनाश का आरोप है कि पार्टी ने उनके वार्ड से अनिल चौधरी को टिकट दिया है जो पूरी तरह नए चेहरे हैं।
कुछ नेताओं को मनाने में मिली सफलता
श्री विवेकानंद मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़ को पार्टी ने समझा-बुझाकर मनाने में कामयाबी हासिल की। वहीं श्री केशव मंडल के अध्यक्ष महेश निहालवानी अभी भी नाराज हैं। महेश निहालवानी ने साफ कह दिया है कि वे अपने फैसले पर अडिग रहेंगे और पीछे नहीं हटेंगे।
Alwar BJP Rebellion: वार्ड-21 में आरक्षण को लेकर नाराजगी
वार्ड-21 अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां पार्टी ने दूसरे वर्ग के उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया। इस फैसले से नाराज होकर कई लोगों ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा जिलाध्यक्ष को भेज दिया। इनमें सुमन गुप्ता, ओमप्रकाश, नरेश, हरिमोहन, सीमा जैन, अजय, रामू, अशोक कुमार, रामचंद्र, पुष्पा, प्रेम शर्मा और कविता शामिल हैं।
माधव मंडल के मंत्री ने भी छोड़ा साथ
बीजेपी के श्री माधव मंडल में मंत्री और विहिप के पूर्व विभाग मंत्री घनश्याम दत्त गुप्ता ने भी पद और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। घनश्याम दत्त गुप्ता 1984 से पार्टी से जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने खुद उन्हें नामांकन करने को कहा था लेकिन टिकट किसी और को दे दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्हें टिकट मिला है उनके कांग्रेस से संबंध रहे हैं। इसलिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया।
जिलाध्यक्ष का बयान और पार्टी का रुख
जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने दावा किया है कि पार्टी का कोई नेता नाराज नहीं है और न ही किसी को मनाने की जरूरत पड़ी। उनका कहना है कि सभी मिलकर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को जिताने का प्रयास करेंगे। हालांकि मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या देखकर यह साफ है कि असंतोष अभी भी बना हुआ है।
Alwar BJP Rebellion: निकाय चुनावों पर पड़ने वाला असर
अलवर नगर निगम चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिनों में यह बगावत पार्टी के लिए अतिरिक्त दबाव बन गई है। टिकट कटने के बाद कई अनुभवी चेहरे मैदान में उतर आए हैं। इससे वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा जारी है कि पार्टी इस असंतोष को कैसे संभालेगी।
अन्य जिलों में भी टिकट विवाद
राजस्थान में निकाय चुनावों से पहले टिकट वितरण को लेकर कई जगहों पर नाराजगी सामने आई है। भरतपुर में भी पूर्व विधायक के बेटे को लेकर विवाद हुआ जहां दोनों प्रमुख पार्टियों ने टिकट दिए और जिलाध्यक्ष को पार्टी से निकालने की कार्रवाई हुई। अलवर की घटना इसी श्रृंखला की एक और कड़ी लग रही है।
Alwar BJP Rebellion: आगे की स्थिति और संभावनाएं
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रचार का दौर शुरू होगा। निर्दलीय प्रत्याशी अपनी स्थानीय पहुंच का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। पार्टी नेतृत्व अगर समय रहते नाराज नेताओं से बातचीत नहीं करता तो कुछ सीटों पर मुश्किल बढ़ सकती है। अलवर जैसे शहर में स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत समीकरण दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अलवर नगर निगम चुनाव में टिकट कटने से उपजी बगावत ने बीजेपी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रवक्ता नरेश धानावत, घनश्याम दत्त गुप्ता समेत कई नेताओं के निर्दलीय मैदान में उतरने से वोटों के बिखराव की आशंका साफ दिख रही है। जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता भले ही दावा कर रहे हों कि कोई नाराज नहीं है लेकिन मैदान की हकीकत अलग है।
पार्टी अगर इन असंतुष्ट आवाजों को नजरअंदाज करती रही तो निकाय चुनावों में उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रचार के दौरान यह नाराजगी कितनी गहरी असर छोड़ती है और पार्टी इसे कितना नियंत्रित कर पाती है।
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