Bihar Election 2025: चनपटिया सीट पर भाजपा ने हर चुनाव में बदला उम्मीदवार, फिर भी जीत का सिलसिला जारी, जानिए पूरी इतिहास
20 साल से BJP का किला रही चनपटिया सीट पर 2025 में भी कड़ा मुकाबला, उमाकांत सिंह दावेदार।

Bihar Election 2025: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले की चनपटिया विधानसभा सीट हमेशा से चुनावी चर्चा का केंद्र रही है। यहां पिछले 20 सालों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा बना हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा ने हर चुनाव में अपना उम्मीदवार बदल दिया, लेकिन जीत का जलवा कभी कम नहीं हुआ। यह सीट छोटे शहरों और गांवों के लोगों के लिए खास है, जहां ब्राह्मण, यादव, भूमिहार, कोइरी और मुस्लिम जैसे समुदाय वोट तय करते हैं। 2025 के चुनाव में भी यहां कड़ा मुकाबला होगा। वर्तमान विधायक उमाकांत सिंह की दावेदारी मजबूत है। आसान शब्दों में कहें तो, भाजपा का संगठन और स्थानीय समर्थन इतना मजबूत है कि उम्मीदवार बदलने से भी हार नहीं मिली।
चनपटिया सीट का पुराना इतिहास
चनपटिया सीट का मिजाज बहुत जटिल है। पहले यह कांग्रेस का गढ़ था। लेकिन 1980 के दशक में बदलाव आया। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के बीरबल शर्मा ने 1980, 1985 और 1995 में तीन बार जीत हासिल की। वे मजदूरों और किसानों के नेता थे। लेकिन 1990 में जनता दल के कृष्ण कुमार मिश्र उर्फ लल्लू मिश्रा ने उन्हें हरा दिया। लल्लू मिश्रा ने सीट को जनता दल के पास रखा।
यह समय बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव का दौर था। गांवों के लोग याद करते हैं कि तब सीट पर कम्युनिस्ट और जनता दल की अच्छी पकड़ थी। लेकिन 2000 के चुनाव ने सब बदल दिया। कृष्ण कुमार मिश्र ने जनता दल छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। वे भाजपा से जीते और सीट को भगवा रंग दे दिया। तब से चनपटिया भाजपा का मजबूत किला बनी। परिसीमन के बाद सीट का स्वरूप बदला। अब यह ब्राह्मण बहुल से बदलकर मिश्रित समुदायों वाली हो गई। इससे भाजपा को हर बार फायदा मिला।
2005 से 2020 तक भाजपा की जीत का सफर
2005 के फरवरी चुनाव में भाजपा ने सतीश चंद्र दुबे को उम्मीदवार बनाया। वे जीते। फिर अक्टूबर के चुनाव में भी वही सतीश चंद्र दुबे जीते। यह साल बिहार में दो चुनाव हुए थे। सतीश दुबे ने अच्छा प्रदर्शन किया। 2010 में भाजपा ने उम्मीदवार बदला। चंद्रमोहन राय को मैदान में उतारा। वे आसानी से जीत गए। चंद्रमोहन राय ने स्थानीय मुद्दों पर काम किया। 2015 में फिर बदलाव। प्रकाश राय को टिकट मिला। मुकाबला बहुत कड़ा था।
प्रकाश राय ने सिर्फ 464 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह सबसे करीबी मुकाबला था। विपक्ष ने कई आरोप लगाए। लेकिन भाजपा ने साबित कर दिया कि संगठन मजबूत है। 2020 में उमाकांत सिंह को चुना गया। उन्होंने कांग्रेस के अभिषेक रंजन को 13,469 वोटों से हराया। उमाकांत सिंह ने विकास कार्यों पर फोकस किया। पिछले पांच चुनावों में भाजपा ने पांच अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। हर बार जीत मिली। यह परंपरा भाजपा की ताकत दिखाती है।
चनपटिया में वोटरों की भूमिका
चनपटिया सीट पर वोटरों का मेला है। ब्राह्मण, यादव, भूमिहार, कोइरी और मुस्लिम समुदाय निर्णायक हैं। परिसीमन के बाद सीट का क्षेत्र बढ़ा। अब गांवों का असर ज्यादा। भाजपा ने हमेशा स्थानीय समीकरण का फायदा उठाया। विपक्ष जैसे आरजेडी, कांग्रेस और अन्य पार्टियां कोशिश करती रहीं, लेकिन हारती रहीं। 2025 में महागठबंधन और एनडीए की टक्कर होगी। एनडीए में जदयू और लोजपा का साथ है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कम अंतर वाली जीत से सीट रोमांचक बनेगी। गांवों के लोग चाहते हैं कि सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दे हल हों।
Bihar Election 2025: 2025 चुनाव में उम्मीदवार कौन?
2025 के चुनाव में चर्चा तेज है। वर्तमान विधायक उमाकांत सिंह की दावेदारी सबसे मजबूत। उन्हें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल का समर्थन मिला। संजय जायसवाल पश्चिम चंपारण से सांसद हैं। वे उमाकांत को टिकट दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन सवाल है कि क्या भाजपा उम्मीदवार बदलने की पुरानी परंपरा जारी रखेगी? भाजपा जिलाध्यक्ष रूपक श्रीवास्तव ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन ऊपर से कई बातों को देखकर होता है। एनडीए के अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में। महागठबंधन से आरजेडी या कांग्रेस का उम्मीदवार उतरेगा। जनसंपर्क अभियान शुरू हो गया। नेता गांव-गांव घूम रहे। लोग उत्साहित हैं।