Bihar News: आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी, सीएम नीतीश कुमार ने दी बड़ी सौगात
नीतीश कुमार ने आशा-ममता कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया।

Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हर वर्ग के हित में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को उन्होंने राज्य की आशा और ममता कार्यकर्ताओं के लिए खुशखबरी दी। सरकार ने इन कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे लाखों कार्यकर्ताओं को लाभ होगा। यह फैसला ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आशा और ममता कार्यकर्ताओं की मेहनत को सम्मान
सीएम नीतीश कुमार ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा, “नवंबर 2005 में हमारी सरकार बनने के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में आशा और ममता कार्यकर्ताओं की भूमिका बहुत अहम रही है। उनकी मेहनत को सम्मान देने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए उनके मानदेय में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है।”
यह कदम न केवल कार्यकर्ताओं के लिए आर्थिक राहत लाएगा, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाएगा। आशा और ममता कार्यकर्ताएं गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और ग्रामीण समुदायों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
Bihar News: मानदेय में बढ़ोतरी से कार्यकर्ताओं में खुशी
हालांकि, सरकार ने अभी मानदेय में बढ़ोतरी की राशि का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह बढ़ोतरी कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में मददगार होगी। इससे पहले, 2023 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने का फैसला किया था। इस बार भी उम्मीद है कि यह बढ़ोतरी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई ताकत
आशा और ममता कार्यकर्ताएं बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। ये कार्यकर्ताएं गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, और परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देती हैं। सीएम नीतीश कुमार ने हमेशा ग्रामीण स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है, और यह फैसला उनकी इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कदम से न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। बिहार सरकार का यह प्रयास विधानसभा चुनाव से पहले जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने का काम करेगा।