Bihar Women Scheme: बिहार की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा वादा किया है। उन्होंने ऐलान किया है कि 2030 तक राज्य की करीब 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इस विशाल लक्ष्य में सबसे अहम हिस्सा डेयरी सेक्टर का होगा, जहां 50 लाख महिलाओं को दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार का ये आंकड़ा सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा, या फिर वाकई गांव-गांव तक महिलाओं की जिंदगी बदलने वाला साबित होगा?
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बिहार की तरक्की का रास्ता महिलाओं के विकास से होकर ही गुजरेगा। ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब राज्य में महिला सशक्तिकरण को लेकर पहले से ही कई योजनाएं चल रही हैं, और अब इसमें एक नया बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है।
Bihar Women Scheme: डेयरी सेक्टर बनेगा रोजगार का बड़ा जरिया
मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र से बिहार की करीब 12 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अब सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 50 लाख से भी ज्यादा करने का है, यानी मौजूदा आंकड़े से करीब चार गुना बढ़ोतरी। इसके लिए महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों जैसी अलग-अलग कड़ियों से जोड़ा जाएगा।
सरकार की मंशा है कि डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को 80 फीसदी तक पहुंचाया जाए। ये आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सरकार गांव-देहात की अर्थव्यवस्था में महिलाओं को केंद्र में रखकर काम करना चाहती है। जानकार बताते हैं कि अगर ये लक्ष्य हकीकत में बदलता है, तो बिहार के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है।
हर पंचायत में खुलेगा सुधा बिक्री केंद्र
राज्य सरकार अब बिहार की हर पंचायत में एक-एक सुधा बिक्री केंद्र खोलने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए जीविका दीदियों का चयन लॉटरी के जरिए किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जो महिलाएं ये केंद्र खोलेंगी, उन्हें दूसरी और तीसरी किस्त मिलाकर करीब 60 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है।
यहां एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि सरकार सिर्फ दूध बिक्री तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान भी साथ-साथ शुरू किया गया है, जिससे पशुपालन से जुड़ी महिलाओं को दवा और इलाज की सुविधा भी आसानी से मिल सके।
छात्राओं और एससी-एसटी महिलाओं के लिए खास घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम में सिर्फ डेयरी सेक्टर तक ही बात सीमित नहीं रखी। अंतरजातीय विवाह करने वाली एससी-एसटी महिलाओं को राज्य सरकार की तरफ से 1.25 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। ये फैसला सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके साथ ही प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाली सभी वर्गों की छात्राओं को भी बड़ी राहत दी गई है। ऐसी छात्राओं को 30 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया गया है, ताकि बेटियां आगे की पढ़ाई और तैयारी बिना आर्थिक दबाव के कर सकें।
Bihar Women Scheme: रक्षाबंधन पर राखी और एनीमिया मुक्त बिहार अभियान
मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद सभागार में रक्षाबंधन से पहले आयोजित इस कार्यक्रम का माहौल भी खास रहा। जीविका दीदियों, सुधा सखियों और दुग्ध उत्पादक महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी, और इसी दौरान उन्होंने रोजगार से जुड़ी योजनाओं के दस्तावेज भी महिलाओं को सौंपे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने एनीमिया मुक्त बिहार विशेष अभियान की भी शुरुआत की, जो 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस अभियान के तहत करीब 1.20 करोड़ लाभार्थियों की एनीमिया जांच की जाएगी, और जरूरत पड़ने पर उन्हें इलाज व दवा भी मुहैया कराई जाएगी। खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और गर्भवती महिलाओं पर इस अभियान में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक बात साफ शब्दों में कही कि सरकार का इरादा सिर्फ योजनाओं का लाभ बांटना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने 2047 तक बिहार को देश का सबसे ताकतवर राज्य बनाने के लक्ष्य को भी एक बार फिर दोहराया।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार की ये नई पहल राज्य की महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है। 1 करोड़ रोजगार का लक्ष्य बड़ा जरूर है, लेकिन डेयरी सेक्टर, शिक्षा प्रोत्साहन और स्वास्थ्य अभियान जैसी ठोस योजनाओं के साथ इसे हासिल करने की कोशिश दिख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले सालों में ये लक्ष्य कितना धरातल पर उतरता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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