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CG News: छत्तीसगढ़ बना देश का इकलौता टिन उत्पादक राज्य, लिथियम खदान से 50 साल में 4 लाख करोड़ राजस्व

CG News: छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभाव से निकलकर देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है। गैर ईंधन खनिजों के उत्पादन में ओडिशा के बाद यह शीर्ष पायदान पर है। भारत का एकमात्र राज्य जहां टिन अयस्क का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है वह छत्तीसगढ़ ही है।

दंतेवाड़ा और सुकमा में टिन मिलने से चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया पर निर्भरता घटने की उम्मीद है। जल्द देश का पहला लिथियम ब्लॉक भी चालू होने जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि नीलाम हुए पैंसठ खनिज ब्लॉकों से अगले पचास साल में चार लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है।

CG News: नक्सल साए से खनिज उत्पादन की ओर बढ़ा राज्य

छत्तीसगढ़ आज कोयला और लोहे के साथ क्रिटिकल मिनरल्स का केंद्र बनता जा रहा है। सेमीकंडक्टर और ईवी इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिज भी यहीं से निकल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक सितंबर दो हजार छब्बीस को नवा रायपुर में स्टेट माइनिंग कॉन्क्लेव में पैंसठ ब्लॉकों की नीलामी की जानकारी दी थी। उन्होंने पचास साल में करीब चार लाख करोड़ राजस्व का अनुमान जताया।

वित्तीय वर्ष में खनिज राजस्व का नया रिकॉर्ड

खनिज विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस-छब्बीस में राज्य ने सोलह हजार छह सौ पच्चीस करोड़ रुपये का खनिज राजस्व हासिल किया। यह पिछले वित्त वर्ष से करीब चौदह प्रतिशत अधिक रहा। खदानों से मिलने वाली रॉयल्टी का एक हिस्सा जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफ में जाता है। कानून के मुताबिक कम से कम साठ प्रतिशत डीएमएफ फंड शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और वनीकरण पर खर्च होना चाहिए।

CG News: कोयला बेल्ट देश के पावर प्लांटों को ऊर्जा देता है

राज्य में दो सौ से अधिक खदानें और माइनिंग ब्लॉक हैं। कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, रायगढ़ और कोरबा कोयला बेल्ट कहलाते हैं। कोरबा की दीपका, गेवरा और कुसमुंडा खदानें देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल हैं। यहां से निकलने वाला कोयला थर्मल पावर प्लांटों को ईंधन उपलब्ध कराता है।

लौह अयस्क और टिन का व्यावसायिक उत्पादन

दंतेवाड़ा, कांकेर, बालोद और राजनांदगांव लौह अयस्क के लिए जाने जाते हैं। बैलाडीला और दल्ली-राजहरा से उच्च गुणवत्ता का लोह अयस्क निकलता है जिसका निर्यात जापान तक होता है। दंतेवाड़ा और सुकमा में टिन अयस्क का व्यावसायिक खनन देश में अकेला है। टिन का उपयोग सोल्डरिंग और सेमीकंडक्टर उद्योग में होता है।

CG News: सीमेंट हब और बॉक्साइट का बड़ा केंद्र

बिलासपुर, रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा क्षेत्र सीमेंट हब कहलाता है क्योंकि यहां चूना पत्थर का बड़ा भंडार है। बिलासपुर की हिररी खदान से डोलोमाइट भी निकाला जाता है। सरगुजा का मैनपाट बॉक्साइट उत्पादन का प्रमुख केंद्र है जिससे बालको प्लांट को एल्युमिनियम के लिए कच्चा माल मिलता है।

ग्रेफाइट, वैनेडियम, निकेल और सोना भी मौजूद

बलरामपुर में ईवी बैटरी और सेमीकंडक्टर के लिए जरूरी ग्रेफाइट तथा वैनेडियम मौजूद है। महासमुंद में निकेल और क्रोमियम के नए ब्लॉक मिले हैं। सोनखान ब्लॉक में सोने का खनन होता है। जशपुर की इब नदी की रेत छानकर भी सोना निकाला जाता है। गरियाबंद की किंबरलाइट चट्टानों में उच्च गुणवत्ता के हीरे का भंडार बताया गया है।

CG News: कोरबा के कटघोरा में पहला लिथियम ब्लॉक

कोरबा के कटघोरा में देश का पहला कमर्शियल लिथियम ब्लॉक है। इसका उपयोग ईवी बैटरी और सोलर स्टोरेज उद्योग में होगा। लिथियम के साथ टिन और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स से आयात निर्भरता घटने की संभावना जताई जा रही है। राज्य की धरती पर अट्ठाईस से अधिक प्रकार के खनिज पाए जाते हैं।

छत्तीसगढ़ खनिज संपदा के बल पर देश की जरूरतों को पूरा करते हुए अपना राजस्व बढ़ा रहा है। टिन का इकलौता व्यावसायिक उत्पादन और जल्द शुरू होने वाला लिथियम ब्लॉक राज्य को नई पहचान दे सकते हैं। पैंसठ ब्लॉकों से पचास साल में चार लाख करोड़ का अनुमान लंबी अवधि की संभावना दिखाता है।

डीएमएफ के जरिए प्रभावित इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च भी जरूरी है। असली परीक्षा खनन के साथ स्थानीय विकास को जोड़ने की होगी। आने वाले वर्षों में ये ब्लॉक कितना राजस्व और रोजगार देते हैं, यही तय करेगा कि यह बदलाव कितना टिकाऊ है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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