
भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट ने लद्दाख की ऊंची पर्वतीय सीमा पर आकाश प्राइम वायु रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण कर देश की सुरक्षा क्षमता में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ी है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस प्रणाली को 15,000 फीट की ऊंचाई तक तैनात किया जा सकता है, और यह 25 से 30 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम है।
कठिन परिस्थितियों में भी सफल रहा परीक्षण
लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले और मौसम की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में दो हाई-स्पीड मानव रहित हवाई लक्ष्यों (ड्रोन) को सटीकता से निशाना बनाया गया, जिससे यह साबित हुआ कि यह प्रणाली हर मौसम में दुश्मन के हवाई हमलों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा मंत्रालय ने साझा किया वीडियो
रक्षा मंत्रालय ने इस परीक्षण का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा “भारत ने 16 जुलाई को लद्दाख सेक्टर में उच्च ऊंचाई पर 2 एरियल हाई स्पीड मानवरहित लक्ष्यों को आकाश प्राइम द्वारा सफलतापूर्वक नष्ट करके एक अहम उपलब्धि हासिल की है, जो भारतीय सेना के लिए आकाश हथियार प्रणाली का उन्नत वर्जन है।”
क्यों खास है आकाश प्राइम?
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आकाश प्राइम सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली है।
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इसकी मारक क्षमता लगभग 25-30 किलोमीटर तक है।
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यह मिसाइल बेहद कम समय में प्रतिक्रिया देने की क्षमता रखती है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को भी सटीकता से गिरा सकती है।
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यह प्रणाली अब तक के आकाश सिस्टम का उन्नत संस्करण है, जिसमें कई इलेक्ट्रॉनिक और रडार सुधार शामिल हैं।
वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा
इस प्रणाली को तैयार करने में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने वर्षों की मेहनत की है। DRDO के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. प्रह्लाद रामाराव इस प्रणाली के मूल संस्करण की डिजाइनिंग में शामिल रहे थे। अब इसका यह प्राइम संस्करण अत्याधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए और भी प्रभावी माना जा रहा है।
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