IVF Failed Reasons: प्राकृतिक रूप से गर्भ न ठहर पाना अपने आप में किसी भी दंपती के लिए एक बड़ी निराशा होती है। इसके बाद बड़ी उम्मीद के साथ आईवीएफ का सहारा लिया जाता है, लेकिन साथ ही मन में एक डर भी लगातार बना रहता है कहीं यह इलाज भी नाकाम न हो जाए। सवाल यह उठता है कि आखिर आईवीएफ ट्रीटमेंट फेल क्यों होता है, और अगर पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो आगे क्या रास्ता अपनाया जाए। विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, और इन्हें समझना दंपतियों के लिए बेहद जरूरी है।
आईवीएफ और फर्टिलिटी एक्सपर्टेस के मुताबिक यह मान लेना गलत है कि पहली साइकिल में ही आईवीएफ सफल हो जाएगा। कई बार एक से ज्यादा कोशिशों की जरूरत पड़ती है, इसलिए एक ट्रीटमेंट के फेल होने को पूरी असफलता समझना सही नहीं है। हालांकि पहली साइकिल फेल होने के बाद अगली प्रक्रिया शुरू करने से पहले डॉक्टर को कुछ जरूरी जांचें करनी पड़ती हैं, ताकि असफलता की सही वजह पता चल सके।
IVF Failed Reasons: आईवीएफ फेल होने के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार

अगर पहली साइकिल में आईवीएफ सफल नहीं होता, तो डॉक्टर सबसे पहले एग की गुणवत्ता, एग और स्पर्म के कॉम्बिनेशन, एम्ब्रियो की क्वालिटी, उसकी ग्रेडिंग और मॉर्फोलॉजी के साथ-साथ यूट्रस यानी गर्भाशय की स्थिति की जांच करते हैं। इन चरणों की गहराई से जांच करने के बाद ही असफलता की असली वजह सामने आ पाती है, और उसी के हिसाब से अगला कदम तय किया जाता है। यहीं पर एक ऐसी बात सामने आती है जो अक्सर लोगों को चौंका देती है उम्र जितनी ज्यादा होगी, एग की गुणवत्ता उतनी ही कम होने की आशंका रहती है, यही वजह है कि विशेषज्ञ समय रहते कम उम्र में ही आईवीएफ का सहारा लेने की सलाह देते हैं।
एएमएच और अन्य मेडिकल स्थितियों का असर
अगर किसी महिला का एएमएच यानी एंटी-म्यूलेरियन हार्मोन स्तर कम है, तो इसका सीधा असर एग्स की संख्या पर पड़ता है, जिस वजह से एम्ब्रियो भी कम बन पाते हैं। ट्रांसफर के समय यह संख्या और भी घट सकती है। जानकार बताते हैं कि इसके अलावा एंडोमेट्रिओसिस, फाइब्रॉएड या ट्यूब से जुड़ी अन्य समस्याएं भी आईवीएफ उपचार को असफल बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। यह सिर्फ महिला से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं है, क्योंकि आईवीएफ की सफलता पुरुष की स्पर्म क्वालिटी पर भी उतनी ही निर्भर करती है।
पुरुष की स्पर्म क्वालिटी और मानसिक तनाव भी बड़ी वजह
अगर पुरुष की स्पर्म क्वालिटी बेहतर नहीं है, तो इससे भी आईवीएफ में सफलता मिलना मुश्किल हो जाता है। शराब पीने, धूम्रपान करने और स्पर्म डीएनए में फ्रेग्मेंटेशन जैसी वजहों से स्पर्म की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। मामला कुछ इस तरह से है कि सिर्फ शारीरिक कारण ही नहीं, बल्कि मानसिक तनाव भी आईवीएफ के फेल होने के पीछे एक बड़ा कारक बन जाता है। इसलिए इलाज के दौरान शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक स्थिरता बनाए रखना भी उतना ही अहम माना जाता है।
आईवीएफ का पहला प्रयास असफल होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आगे सफलता की कोई गुंजाइश नहीं बची। पहली साइकिल के बाद दूसरी कोशिश में सफलता मिलने की संभावना पूरी तरह बनी रहती है। हो सकता है कि दूसरी बार में भी आईवीएफ फेल हो जाए, लेकिन इसका मतलब हथियार डाल देना नहीं है। ऐसे में कुछ समय के लिए रुककर असफलता के कारणों को फिर से खोजा जाता है। देखने पर लगता है कि यह पूरी प्रक्रिया धैर्य और सही मेडिकल मार्गदर्शन मांगती है, जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला उल्टा असर डाल सकता है।
असफल आईवीएफ के बाद अगले कदम क्या हों
आईवीएफ फेल होने के बाद हिस्टेरोस्कोपिक जांच के जरिए गर्भाशय के भीतर किसी तरह के इंफ्लेमेशन या संक्रमण का पता लगाया जाता है। अगर एग्स या एम्ब्रियो की क्वालिटी में कोई कमी पाई गई थी, तो उसे सुधारने के लिए पहले जरूरी कदम उठाए जाते हैं। अगर इसके बावजूद असफलता की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती, तो जेनेटिक या क्रोमोजोम जांच का सहारा लिया जाता है, जिसके लिए पीजीटी यानी प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग भी कराई जा सकती है। यह जरूरी नहीं कि दूसरी या तीसरी कोशिश में ही सफलता मिल जाए, क्योंकि यह प्रक्रिया हर दंपती के लिए एक जैसी नहीं होती।
IVF Failed Reasons: कितनी बार कराया जा सकता है आईवीएफ
आईवीएफ कितनी बार दोहराया जा सकता है, यह उम्र, एग्स की क्वालिटी और स्पर्म की गुणवत्ता जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है। अगर बार-बार असफलता का सामना करना पड़ रहा है, तो डॉक्टर की सलाह से इलाज के दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। एक बात यहां ध्यान रखने वाली है कि अगर आईवीएफ से गर्भधारण होने के छह हफ्ते बाद मिसकैरेज हो जाता है, तो इसे आईवीएफ की असफलता नहीं माना जाता। दरअसल आईवीएफ की भूमिका गर्भधारण होते ही पूरी हो जाती है, और उसके बाद होने वाला गर्भपात अन्य मेडिकल पहलुओं से जुड़ा हो सकता है, जिन पर अलग से ध्यान देने की जरूरत होती है।
आईवीएफ का सफर शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है, और इसमें असफलता मिलना किसी की भी हार नहीं है। सही जांच, सही जानकारी और डॉक्टर के साथ खुली बातचीत के जरिए इस मुश्किल दौर को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। हर दंपती की स्थिति अलग होती है, इसलिए तुलना करने के बजाय अपनी मेडिकल टीम पर भरोसा रखना ज्यादा फायदेमंद रहता है। अगर आईवीएफ में बार-बार असफलता मिल रही है, तो निराश होने के बजाय विशेषज्ञ से विस्तार से बातचीत कर अगला सही कदम तय करना ही सबसे बेहतर रास्ता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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