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Jharkhand News: झारखंड में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई होगी आसान, 400 रिसोर्स शिक्षकों को मिलेगी खास ट्रेनिंग

Jharkhand News: झारखंड में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली पहल शुरू हुई है। राज्य के शिक्षा विभाग ने तय किया है कि विशेष जरूरत वाले बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाई से जोड़ा जाए, और इसके लिए करीब 400 रिसोर्स शिक्षकों को खास प्रशिक्षण दिया जाएगा। सवाल यह है कि आखिर यह ट्रेनिंग बच्चों की पढ़ाई को किस तरह आसान बनाएगी, और इसका असली फायदा किसे मिलेगा?

यह पहल बौद्धिक और विकासात्मक दिव्यांगता वाले बच्चों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। योजना के मुताबिक प्रशिक्षण पाने के बाद ये शिक्षक स्कूलों में लौटकर दिव्यांग बच्चों के लिए ज्यादा असरदार पढ़ाई का माहौल तैयार करने में मदद करेंगे। रांची स्थित झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के दफ्तर से इस पूरी कवायद को आगे बढ़ाया जा रहा है।

Jharkhand News: ‘दिशा’ पाठ्यक्रम के तहत चलाई जा रही है पहल

इस पूरे कार्यक्रम को ‘दिशा’ नाम के एक पाठ्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ दिव्यांग बच्चों को सामान्य कक्षा में बिठा देना भर नहीं है, बल्कि उनकी सीखने की असली क्षमता को समझते हुए पढ़ाई के तरीके को उसी हिसाब से ढालना है। इसके लिए शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत जरूरत, सीखने की रफ्तार और व्यवहार के अनुसार पढ़ाने की तकनीकें सिखाई जा रही हैं। देखने पर लगता है कि यह सोच पुराने ढर्रे से हटकर एक ज्यादा संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश है।

चरणबद्ध तरीके से होगी शिक्षकों की ट्रेनिंग

शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार यह प्रशिक्षण अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। यह एक आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे तय समय-सीमा में चरणबद्ध रूप से आयोजित किया जाएगा। हर चरण में शामिल होने वाले रिसोर्स शिक्षकों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वे स्कूल लौटते ही सीखी गई तकनीकों को सीधे कक्षा में लागू कर सकें। खास बात यह है कि इस ट्रेनिंग में सिर्फ किताबी जानकारी नहीं दी जा रही, बल्कि शिक्षकों को व्यावहारिक तरीके से भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर असली फर्क दिखे।

शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर खास जोर

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद यानी जेईपीसी के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन के मुताबिक इस प्रशिक्षण के जरिए रिसोर्स शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे शिक्षक दिव्यांग बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को कहीं बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, और कक्षा में उनके लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बना सकेंगे। समावेशी शिक्षा को असल में कारगर बनाने में रिसोर्स शिक्षकों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि यही शिक्षक बच्चों और स्कूल प्रशासन के बीच की कड़ी का काम भी करते हैं।

कई संस्थान मिलकर कर रहे हैं सहयोग

इस पूरी पहल को अकेले शिक्षा विभाग नहीं, बल्कि कई संस्थानों के साझा प्रयास से आगे बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान यानी एनआईईपीआईडी, सीआरसी, जेईपीसी और यूनिसेफ झारखंड मिलकर इस कार्यक्रम में सहयोग कर रहे हैं। यहां एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि ‘दिशा’ मॉडल कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसे देश के कई अन्य राज्यों में पहले ही लागू किया जा चुका है। वहां से मिले अनुभवों को आधार बनाकर अब झारखंड में इसे लागू करने की तैयारी की गई है, यानी यह पहल पूरी तरह परखे हुए मॉडल पर आधारित है।

शिक्षकों को मिलेगी जरूरी शिक्षण सामग्री भी

सिर्फ ट्रेनिंग देकर योजना यहीं खत्म नहीं होती। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद रिसोर्स शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से शिक्षण सामग्री भी मुहैया कराई जाएगी। योजना के तहत हर स्कूल में नामांकित दिव्यांग बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए विशेष सामग्री और वर्कशीट दी जाएंगी, ताकि प्रशिक्षित शिक्षक इन्हें नियमित कक्षा गतिविधियों में इस्तेमाल कर सकें।

एक जैसी पढ़ाई सबके लिए क्यों नहीं होती कारगर

दरअसल विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए एक ही तरह की पढ़ाई की पद्धति हमेशा असरदार साबित नहीं होती। कुछ बच्चों को किसी विषय को समझने के लिए ज्यादा समय चाहिए होता है, तो कुछ को अलग तरह की गतिविधियों या खास शिक्षण सामग्री की जरूरत पड़ती है। मामला कुछ इस तरह से है कि हर बच्चे की सीखने की रफ्तार और तरीका अलग होता है, और यही वजह है कि प्रशिक्षित रिसोर्स शिक्षक अब बच्चों की व्यक्तिगत क्षमता के हिसाब से पढ़ाई की रणनीति तैयार करने में मदद करेंगे।

Jharkhand News: आम परिवारों के लिए क्यों अहम है यह खबर

झारखंड के हजारों परिवार, जिनके बच्चे किसी न किसी दिव्यांगता के साथ जी रहे हैं, उनके लिए यह पहल राहत की तरह है। अक्सर देखा जाता है कि सामान्य स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को सही मार्गदर्शन न मिलने की वजह से उनकी पढ़ाई पिछड़ जाती है, और परिवार को भी मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। ऐसे में अगर सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित रिसोर्स शिक्षक मौजूद हों, तो न सिर्फ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि परिवार को भी यह भरोसा मिलेगा कि उनके बच्चे की जरूरतों को समझने वाला कोई मौजूद है।

शिक्षा विभाग की यह पहल भले ही अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसका मकसद साफ है, हर बच्चे को उसकी क्षमता के मुताबिक पढ़ाई का मौका देना। प्रशिक्षित शिक्षक, जरूरी शिक्षण सामग्री और कई संस्थानों का साझा सहयोग, ये सभी मिलकर राज्य में समावेशी शिक्षा को एक नई दिशा दे सकते हैं। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे यह ट्रेनिंग आगे बढ़ेगी, इसका असर स्कूलों में दिखना शुरू होगा, और अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि जमीनी स्तर पर यह पहल कितना बदलाव ला पाती है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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