Jharkhand Politics: चतरा में आजसू पार्टी को लगा तगड़ा झटका, बड़े नेताओं ने खोला मोर्चा, वादे पूरे न होने पर दिया सामूहिक इस्तीफा
आजसू के कई नेताओं ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर चतरा में दिया सामूहिक इस्तीफा, चुनावों पर असर।

Jharkhand Politics: झारखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच आजसू (AJSU) पार्टी को चतरा जिले में एक बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सतह पर आ गई है। पार्टी के कई प्रमुख और पुराने नेताओं ने नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और वादे पूरे न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस घटना ने चतरा की स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है और इसे पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
किसने दिया इस्तीफा और क्यों?
इस्तीफा देने वालों में आजसू के केंद्रीय सदस्य, जिला उपाध्यक्ष, और विभिन्न प्रखंडों के अध्यक्ष सहित कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। इन नेताओं का नेतृत्व पार्टी के एक कद्दावर और पुराने नेता कर रहे थे, जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, ने चुनाव के समय किए गए वादों को भुला दिया है। नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद से सांसद और पार्टी के बड़े नेता क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से मिलना तो दूर, उनका फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझते।
Jharkhand Politics: उपेक्षा और सम्मान की लड़ाई
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से पार्टी के लिए खून-पसीना एक कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बदले में सिर्फ उपेक्षा और अपमान मिला है। उनका कहना है कि पार्टी अब सिद्धांतों से भटक चुकी है और कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया जा रहा है और उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में अब पार्टी के साथ रहकर काम करना संभव नहीं है, इसलिए वे भारी मन से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।
क्या होगा राजनीतिक असर?
चतरा जिले में इस सामूहिक इस्तीफे का आजसू पार्टी के जनाधार पर गहरा असर पड़ सकता है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। इस्तीफा देने वाले नेता अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी पकड़ रखते हैं और उनके पार्टी छोड़ने से जमीनी स्तर पर संगठन को बड़ा नुकसान होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बगावत सिर्फ चतरा तक सीमित नहीं रहेगी और इसका असर आस-पास के जिलों में भी देखने को मिल सकता है। यह पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो के लिए भी एक बड़ी चुनौती है कि वे कैसे इस असंतोष को शांत करते हैं।
Jharkhand Politics: आगे की क्या है रणनीति?
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने अभी तक अपने अगले कदम का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे राजनीति में सक्रिय रहेंगे और अपने समर्थकों के साथ बैठक कर जल्द ही भविष्य की रणनीति तय करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह असंतुष्ट गुट किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो सकता है या फिर आगामी चुनावों में एक स्वतंत्र ताकत के रूप में सामने आ सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह चतरा के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा फेरबदल कर सकता है।