MBBS Admission: तमिलनाडु में वरिष्ठ नागरिकों ने पास की नीट परीक्षा, एमबीबीएस सीट की दौड़ में शामिल
NEET में उम्र सीमा हटने से वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी, 7.5% सरकारी कोटे पर उठे सवाल।

MBBS Admission: तमिलनाडु में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 60 साल से अधिक उम्र के तीन वरिष्ठ नागरिकों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पास कर सभी को चौंका दिया है। इसमें 68, 67 और 60 वर्ष की आयु के व्यक्ति शामिल हैं, जिनमें से दो वकील भी हैं। ये वरिष्ठ नागरिक अब तमिलनाडु में सरकारी कोटे के तहत एमबीबीएस प्रवेश के लिए आवेदन कर रहे हैं। इस खबर ने न केवल अधिकारियों को हैरान किया है, बल्कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में नई बहस भी शुरू कर दी है।
नीट में उम्र की कोई सीमा नहीं
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 2022 में NEET के लिए ऊपरी आयु सीमा हटा दी थी। इस फैसले ने हर उम्र के लोगों को इस कठिन परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया। इसके बाद से तमिलनाडु में मध्यम आयु और वरिष्ठ नागरिकों के आवेदनों में बढ़ोतरी देखी गई है। इस साल 35 साल से अधिक उम्र के कम से कम 25 लोग MBBS admission के लिए आवेदन कर चुके हैं, जिसमें तीन वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। यह पहली बार है जब इतनी उम्र के लोग मेडिकल सीटों की दौड़ में हैं।
सरकारी कोटा बना चर्चा का केंद्र
इन तीनों वरिष्ठ नागरिकों ने तमिलनाडु के 7.5% सरकारी स्कूल कोटे के तहत आवेदन किया है। यह कोटा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में किफायती या मुफ्त सीटें प्रदान करता है। कुछ आवेदकों ने तमिलनाडु की 69% आरक्षण नीति के तहत अच्छे अंक हासिल किए हैं, जो सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े लोगों को ध्यान में रखती है। हालांकि, कुछ आवेदनों में दस्तावेजों की कमी या पुराने प्रारूप की समस्याएं सामने आई हैं।
अधिकारियों के सामने नीतिगत चुनौती
चयन समिति के लिए यह एक नई चुनौती है। सवाल यह है कि क्या वरिष्ठ नागरिकों को, जिन्होंने पहले दूसरा करियर चुना और अब मेडिकल पढ़ाई की ओर लौटे हैं, सरकारी कोटा का लाभ मिलना चाहिए? यह कोटा मूल रूप से गरीब और वंचित युवाओं के लिए बनाया गया था। कुछ अधिकारी मानते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन संसाधनों का बंटवारा और कोटे का उद्देश्य बहस का विषय बन गया है।
भविष्य में हो सकती है नीति में समीक्षा
यह मामला भविष्य में MBBS admission और सरकारी कोटे की पात्रता नियमों की समीक्षा को बढ़ावा दे सकता है। अधिकारियों का कहना है कि 2017 में NEET अनिवार्य होने के बाद यह पहली बार है जब इतनी संख्या में मध्यम आयु और वरिष्ठ नागरिकों ने मेडिकल और डेंटल कोर्स के लिए आवेदन किया है। यह बदलाव दर्शाता है कि अब लोग चिकित्सा को दूसरे करियर या पुराने सपने को पूरा करने के मौके के रूप में देख रहे हैं।