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लोकसभा में पारित हुआ नेशनल स्पोर्ट्स बिल और एंटी-डोपिंग संशोधन बिल, बीसीसीआई भी दायरे में

लोकसभा में दो अहम विधेयकों को मंजूरी मिल गयी है। राष्ट्रीय खेल विधेयक (National Sports Bill) और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक (Anti-Doping Amendment Bill)। इन कानूनों का उद्देश्य भारत को खेलों में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना और खेल प्रशासन को पारदर्शी व जवाबदेह करना है।

बीसीसीआई भी आएगा दायरे में

नेशनल स्पोर्ट्स बिल के लागू होने के बाद नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) का गठन किया जाएगा, जो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) समेत सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों की निगरानी करेगा। चूंकि क्रिकेट अब लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 का हिस्सा बनने जा रहा है, बीसीसीआई को भी एक राष्ट्रीय खेल संघ के तौर पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

नया ट्रिब्यूनल, सिविल कोर्ट जैसे अधिकार

विधेयक के तहत नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल भी बनाया जाएगा, जिसे सिविल कोर्ट के बराबर अधिकार होंगे। यह चयन प्रक्रिया, चुनाव और अन्य विवादों का निपटारा करेगा। ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील केवल सुप्रीम कोर्ट में ही की जा सकेगी।

आयु सीमा में छूट, रोजर बिन्नी को राहत

इस विधेयक से बीसीसीआई के लिए एक बड़ी राहत यह है कि प्रशासकों के लिए आयु सीमा में ढील दी गई है। अब अंतरराष्ट्रीय संस्था की अनुमति मिलने पर 70 से 75 साल तक के लोग खेल संघ के चुनाव लड़ सकते हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी, जो 19 जुलाई को 70 वर्ष के हो गए हैं, अपने पद पर आगे भी बने रह सकते हैं।

आरटीआई प्रावधान हटा

शुरुआती मसौदे में बीसीसीआई को आरटीआई (Right to Information) के तहत लाने का प्रावधान था, लेकिन चूंकि यह संस्था केंद्र सरकार के फंड पर निर्भर नहीं है, इसलिए यह क्लॉज हटा दिया गया। हालांकि अन्य सभी नियम बीसीसीआई पर भी लागू होंगे।

एंटी-डोपिंग संशोधन बिल के प्रमुख बदलाव

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक, WADA (World Anti-Doping Agency) की आपत्तियों को दूर करने के लिए लाया गया है। पहले, 2022 में पारित हुए कानून में एक नेशनल बोर्ड फॉर एंटी-डोपिंग इन स्पोर्ट्स बनाने का प्रावधान था, जिसके सदस्य केंद्र सरकार नियुक्त करती थी और जिसे NADA (National Anti-Doping Agency) पर निगरानी का अधिकार था।

WADA ने इसे एक स्वतंत्र संस्था में सरकारी हस्तक्षेप माना था। संशोधित बिल में यह बोर्ड तो बरकरार है, लेकिन अब इसके पास NADA पर निगरानी रखने या उसे निर्देश देने का अधिकार नहीं होगा। साफ किया गया है कि NADA पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कार्य करेगी।

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