
New Delhi News: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को “मृत” बताया था। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी पर सीधा हमला बोला और देश की आर्थिक स्थिति खराब होने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी और छोटे व्यवसायों (एमएसएमई) की बर्बादी ने भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा- ट्रंप सही कह रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था मृत है। यह बात पूरी दुनिया जानती है, सिवाय हमारे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को सिर्फ गौतम अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बर्बाद कर दिया। राहुल ने कहा- नोटबंदी और गलत जीएसटी ने छोटे व्यापारियों और किसानों को बर्बाद कर दिया। युवाओं के लिए नौकरियां खत्म हो गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा भारत की अर्थव्यवस्था मृत?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा था कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं “मृत” हैं। यह बयान उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा के बाद दिया। ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने और दोनों देशों के बीच व्यापार पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने ट्रंप के इस बयान को सही ठहराते हुए कहा कि यह भारत की आर्थिक सच्चाई को दर्शाता है।
मोदी-अडानी की साझेदारी पर सवाल
राहुल गांधी ने मोदी और अडानी की कथित साझेदारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- मोदी सरकार सिर्फ अडानी के लिए काम करती है। छोटे व्यापारियों, किसानों और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। राहुल ने यह भी सवाल उठाया कि ट्रंप के बार-बार भारत-पाकिस्तान सीजफायर और भारतीय जेट्स गिरने के दावों पर मोदी सरकार चुप क्यों है? उन्होंने कहा- मोदी जी को देश को जवाब देना चाहिए कि आखिर सच्चाई क्या है?
क्या है भारत की आर्थिक स्थिति?
राहुल गांधी ने दावा किया कि नोटबंदी, जीएसटी और “मेक इन इंडिया” की असफलता ने देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) तबाह हो गए हैं और किसानों की हालत खराब है। राहुल ने जोर देकर कहा कि सरकार को देश के आम लोगों के लिए काम करना चाहिए, न कि कुछ बड़े उद्योगपतियों के लिए।