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Odisha News: सुप्रीम कोर्ट की ओडिशा सरकार को फटकार, दारा सिंह की रिहाई याचिका पर 10 दिन में फैसला करने को कहा

Odisha News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा सरकार को दारा सिंह की रिमीशन याचिका पर देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई। ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड के दोषी की समयपूर्व रिहाई की अर्जी दो साल से अधिक समय से लंबित है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सेंटेंस रिव्यू बोर्ड दस दिन के भीतर फैसला करे। ऐसा नहीं हुआ तो राज्य के अधिकारियों को तलब किया जाएगा। दारा सिंह का आधिकारिक नाम रबींद्र कुमार पाल है। ट्रायल कोर्ट ने 2003 में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी।

मामला 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या से जुड़ा है। बच्चे उस समय छह और दस वर्ष के थे। पूरा प्रकरण लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में है और अब अदालत ने राज्य सरकार से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा की है।

Odisha News: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिखाई नाराजगी

अदालत ने साफ कहा कि याचिका इतने लंबे समय तक अटकी नहीं रह सकती। ओडिशा सरकार पर दो साल से अधिक की देरी का आरोप लगा। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को दस दिन की समयसीमा दी गई है। समयसीमा का पालन नहीं हुआ तो अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जा सकता है। यह टिप्पणी प्रशासनिक शिथिलता पर सख्त संदेश देती है।

दारा सिंह की याचिका कितने समय से लंबित है

ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड के दोषी दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की अर्जी लंबे समय से सरकार के पास है। रिपोर्ट के अनुसार यह याचिका दो साल से अधिक समय से निर्णयाधीन है। रिमीशन का मतलब सजा में छूट या समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया होता है। राज्य सरकार और समीक्षा बोर्ड को इस पर स्पष्ट रुख तय करना होता है। देरी के कारण मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया।

Odisha News: सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को मिली समयसीमा

शीर्ष अदालत ने बोर्ड को दस दिन के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह समयसीमा मंगलवार की सुनवाई के बाद लागू मानी जाएगी। बोर्ड कैदी की सजा, आचरण और कानूनी प्रावधानों के आधार पर सिफारिश करता है। सरकार उसी के बाद अंतिम निर्णय लेती है। अदालत ने चेतावनी दी कि प्रक्रिया और न खिंचने दी जाए।

1999 के हत्याकांड की पृष्ठभूमि

ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे चर्च के बाहर खड़ी गाड़ी में सो रहे थे। भीड़ ने वाहन में आग लगा दी और उन्हें बाहर निकलने से रोका। इस हमले में मिशनरी और दोनों बच्चे मारे गए। घटना ओडिशा से जुड़ी है और देश-विदेश में चर्चा का विषय बनी। परिवार में पत्नी ग्लैडिस और अन्य बच्चे भी थे।

Odisha News: ट्रायल कोर्ट का 2003 का फैसला

ट्रायल कोर्ट ने 2003 में दारा सिंह को मौत की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें ग्राहम स्टेन्स और दोनों पुत्रों की हत्या का दोषी माना। दारा सिंह का सरकारी रिकॉर्ड नाम रबींद्र कुमार पाल है। यह फैसला मामले की प्रारंभिक सजा से जुड़ा है। बाद की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग अदालतों में चली। वर्तमान सुनवाई रिमीशन याचिका की देरी तक सीमित है।

परिवार और घटना का स्मरण

पुरानी तस्वीर में ग्राहम और ग्लैडिस स्टेन्स अपने बच्चों फिलिप, एस्थर और टिमोथी के साथ दिखते हैं। घटना में मारे गए दोनों बेटे छह और दस वर्ष के थे। यह विवरण अदालती चर्चा के साथ खबर में दोहराया गया है। मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि मानवीय पीड़ा से भी जुड़ा है। इसलिए हर नया आदेश नई चर्चा पैदा करता है।

Odisha News: ओडिशा सरकार की जिम्मेदारी क्या है

रिमीशन का अंतिम निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड सिफारिश तैयार करता है और सरकार उस पर कार्रवाई करती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रक्रिया में देरी को गंभीर माना है। दस दिन की सीमा के बाद अधिकारियों को तलब करने की चेतावनी दी गई है। सरकार को अब निर्धारित समय में रुख साफ करना होगा।

अदालत के निर्देश का तात्कालिक असर

यह आदेश प्रशासन को तुरंत सक्रिय होने के लिए मजबूर करता है। बोर्ड को बैठक बुलाकर दस्तावेज देखने होंगे। कैदी की याचिका पर कानूनी राय भी लेनी पड़ सकती है। दस दिन की घड़ी शुरू हो चुकी है। अगर फैसला नहीं आया तो अगली सुनवाई में राज्य अधिकारी अदालत के सामने पेश हो सकते हैं।

Odisha News: मामले का वर्तमान कानूनी पहलू

अदालत ने इस स्तर पर सजा की समीक्षा या नए सबूत पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की। फोकस केवल लंबित अर्जी के निपटारे पर रहा। रिमीशन याचिका का मतलब यह नहीं कि रिहाई तय हो चुकी है। सरकार स्वीकार भी कर सकती है और अस्वीकार भी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा तय की है।

दारा सिंह की रिमीशन याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश ओडिशा सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी है। दो साल से अधिक की देरी के बाद अदालत ने दस दिन में फैसला करने को कहा है। नहीं तो राज्य अधिकारियों को तलब किया जाएगा।

मामला 1999 में ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने 2003 में दारा सिंह उर्फ रबींद्र कुमार पाल को मौत की सजा सुनाई थी। अब सवाल सजा में छूट की अर्जी के शीघ्र निपटारे का है। सेंटेंस रिव्यू बोर्ड और राज्य सरकार को निर्धारित अवधि में अपना निर्णय दर्ज करना होगा। आगे की स्थिति उसी फैसले पर निर्भर करेगी।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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