
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “यह डेटा मेरा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का है। मैं इस पर हलफनामे पर हस्ताक्षर करूंगा, लेकिन आयोग को चाहिए कि यह डेटा अपनी वेबसाइट पर जारी करे ताकि सच सामने आ सके।”
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में हेरफेर सिर्फ बेंगलुरु में ही नहीं, बल्कि देश के कई निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ है। राहुल गांधी के अनुसार, “चुनाव आयोग जानता है कि उसका डेटा विवाद पैदा करेगा। वह जिस जानकारी को छुपाने की कोशिश कर रहा है, हम उसे उजागर करेंगे।”
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई राजनीतिक दलों के बीच की नहीं, बल्कि संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को बचाने की है। उन्होंने कहा, “हम देश में निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची चाहते हैं।”
बीजेपी का पलटवार
भाजपा ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संविधान विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के नेता की भूमिका निभा रहे हैं।
खरगे का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “भाजपा की कायराना तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह जनता के वोट के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है। ‘इंडिया’ गठबंधन भाजपा की इस साजिश को उजागर करेगा।”
अखिलेश यादव का विरोध प्रदर्शन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर वे बैरिकेड फांदकर आगे बढ़ गए। उन्होंने कहा, “हम वोट बचाने के लिए बैरिकेड फांद रहे हैं। मतदाता सूची से जिन 18 हजार वोटों को हटाया गया है, उनकी सूची मैंने खुद दी है। चुनाव आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
पहले भी लगाए थे गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा था कि मतदाता सूची में गड़बड़ी कर ‘वोट चोरी’ का मॉडल अपनाया गया, जिससे बीजेपी को फायदा हुआ। उनके मुताबिक, यहां 1,00,250 वोट सूची से गायब किए गए, जबकि 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यह सीट 32,707 वोटों से जीती थी।
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