
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि अगर धर्मस्थला सामूहिक दफन प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख प्रणब मोहंती केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्त होते हैं, तो उन्हें जांच टीम से हटा दिया जाएगा। फिलहाल इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर मोहंती केंद्र सरकार के अधीन सेवा में जाते हैं, तो उन्हें हटाना पड़ेगा।” उधर, गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी कहा कि एसआईटी प्रमुख को हटाने का कोई सरकारी फैसला अब तक नहीं लिया गया है।
दरअसल, चर्चा है कि मोहंती को केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति सूची में शामिल किया गया है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें एसआईटी प्रमुख के पद से हटाया जा सकता है। हालांकि परमेश्वर ने साफ कहा कि इस विषय पर कोई निर्णय नहीं हुआ है और कुछ लोग सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैला रहे हैं।
क्या है धर्मस्थला मामला?
धर्मस्थला में बीते दो दशकों के दौरान कथित रूप से सामूहिक हत्याएं, बलात्कार और शवों को दफनाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन मामलों की जांच के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
एक पूर्व सफाईकर्मी ने दावा किया है कि 1995 से 2014 तक धर्मस्थला में नौकरी के दौरान उसे महिलाओं और नाबालिगों के शव दफनाने को मजबूर किया गया। उसने यह भी कहा कि कई शवों पर यौन उत्पीड़न के संकेत थे। उसका बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया गया है। इस गवाही के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए खुदाई कार्य भी शुरू किया गया।
सरकार का रुख
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने जांच के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को इसलिए नियुक्त किया ताकि कार्य पारदर्शी ढंग से हो। उन्होंने कहा, “एसआईटी का गठन इसलिए हुआ ताकि सच सामने आ सके। जांच खत्म होने के बाद रिपोर्ट में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि एसआईटी प्रमुख को बदलने का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और सरकार का न तो किसी को बचाने का इरादा है, न ही किसी को फंसाने का।
उन्होंने अपील की कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच की निष्पक्षता पर भरोसा करें। जब तक एसआईटी अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपती, तब तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
एसआईटी की संरचना
एसआईटी का नेतृत्व कर रहे हैं डीजी स्तर के अधिकारी प्रणब मोहंती, जिनके साथ डीआईजी (भर्ती) एमएन अनुचेथ, आईपीएस अधिकारी सौम्यलता एसके और जितेंद्र कुमार दयामा टीम में शामिल हैं। इसके अलावा उडुपी, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जिलों से 20 अन्य पुलिसकर्मियों को इस जांच के लिए नियुक्त किया गया है।
फिलहाल एसआईटी उन जगहों पर खुदाई कर रही है, जिन्हें शिकायतकर्ता ने संभावित दफन स्थलों के रूप में पहचाना है। रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।