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Sonia Gandhi Book: सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ छपने से पहले ही विवादों में, जानें पूरा मामला

Sonia Gandhi Book: सोनिया गांधी की आने वाली किताब को लेकर इन दिनों बड़ी चर्चा हो रही है। किताब अभी बाजार में आई भी नहीं है, लेकिन इसके भारत में प्रकाशन को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। साथ ही किताब की प्रकाशक कंपनी पेंगुइन इंडिया ने भी इस मामले पर अपनी सफाई दी है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद है क्या।

Sonia Gandhi Book: किताब के बारे में पहले जान लीजिए

Sonia Gandhi Book
Sonia Gandhi Book

सोनिया गांधी की इस किताब का नाम है Belonging: A Journey of Love। यह उनके जीवन पर आधारित एक संस्मरण यानी मेमॉयर है। इसकी घोषणा 18 अगस्त 2026 को हुई थी। किताब को अमेरिका की मशहूर प्रकाशन कंपनी Alfred A. Knopf छाप रही है, जो पेंगुइन रैंडम हाउस समूह का ही हिस्सा है। किताब दुनियाभर में 10 नवंबर 2026 को रिलीज होगी और इसकी पहली प्रिंटिंग में करीब एक लाख कॉपियां छापी जाएंगी।

किताब में सोनिया गांधी अपने निजी जीवन की बात करेंगी। इसमें उनका इटली से भारत आना, राजीव गांधी से मुलाकात और शादी, नेहरू-गांधी परिवार में शामिल होना, और परिवार में आई मुश्किलों का जिक्र होगा। साथ ही वे भारतीय राजनीति में अपने सालों के अनुभव भी साझा करेंगी। सोनिया गांधी ने खुद कहा था कि उनके परिवार के बारे में पहले भी बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन इस किताब में वे उन बातों को सामने लाना चाहती हैं जो अब तक सामने नहीं आईं।

विवाद शुरू कैसे हुआ

खबरें आईं कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यानी भारत की शाखा अब यह किताब भारत में नहीं छापेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रकाशक ने किताब की मूल पांडुलिपि यानी मैनुस्क्रिप्ट के कुछ हिस्सों में बदलाव या कुछ हिस्से हटाने की बात कही थी। कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी ने ये बदलाव मानने से मना कर दिया, जिसके बाद पेंगुइन इंडिया इस किताब से पीछे हट गई।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि जिन हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई गई थी, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और चीन से जुड़े कुछ जिक्र शामिल थे। हालांकि यह बात अभी तक किसी सार्वजनिक दस्तावेज से पूरी तरह साबित नहीं हुई है।

पेंगुइन इंडिया ने क्या कहा

विवाद बढ़ने के बाद पेंगुइन इंडिया की तरफ से बयान आया। कंपनी ने साफ कहा कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। साथ ही कंपनी ने उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि सोनिया गांधी के संपादकीय बदलाव न मानने की वजह से उसने किताब छापने का इरादा बदल दिया। पेंगुइन ने यह भी कहा कि लेखक के साथ हुई बातचीत निजी होती है, इसलिए वह उसके बारे में कुछ नहीं बताएगी।

यानी एक तरफ मीडिया रिपोर्ट्स में बदलाव मांगे जाने की बात कही गई, तो दूसरी तरफ प्रकाशक ने इस पूरी कहानी को गलत तरीके से पेश किया गया बताया। इसी वजह से पूरा मामला और उलझ गया है।

कांग्रेस का क्या कहना है

अशोक गहलोत
अशोक गहलोत

कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस मामले पर सवाल उठाए हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूछा कि जब यही किताब दुनिया के बाकी हिस्सों में बिना किसी बदलाव के छप सकती है, तो भारत में इसे लेकर अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रकाशक पर दबाव डाला गया।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सवाल उठाया कि क्या कोई प्रकाशक यह तय करेगा कि एक बड़े राजनीतिक नेता को अपनी किताब में क्या लिखना चाहिए। वहीं कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि जब पेंगुइन प्रधानमंत्री मोदी की किताब Exam Warriors जैसी किताबें छाप चुका है, तो सोनिया गांधी की किताब को लेकर अलग रवैया समझ से परे है।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस बिना किसी ठोस सबूत के सरकार पर आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं के मुताबिक, यह प्रकाशक का अपना फैसला हो सकता है, जो आमतौर पर तथ्य जांचने और कानूनी जोखिम को देखते हुए लिया जाता है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बताया है।

क्या यह सामान्य फैक्ट-चेकिंग है या कुछ और

किसी भी किताब को छापने से पहले प्रकाशक तथ्यों की जांच जरूर करते हैं। खासकर जब किताब किसी बड़े नेता की जीवनी हो और उसमें दूसरे जीवित नेताओं या सरकार से जुड़ी बातें हों। ऐसे मामलों में प्रकाशक कानूनी जोखिम से बचने के लिए भाषा या तथ्यों में बदलाव मांग सकते हैं। लेकिन अगर बदलाव की मांग किसी की राजनीतिक राय बदलने के लिए हो, तो यह मामला अलग बन जाता है।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि पेंगुइन ने सामान्य तथ्य जांच की थी या किसी और वजह से बदलाव मांगे थे। इसका सही जवाब तभी मिल पाएगा जब प्रकाशक और लेखक के बीच हुई बातचीत के बारे में और पुख्ता जानकारी सामने आएगी।

क्या किताब पर बैन लगा है

नहीं, ऐसा नहीं है। भारत सरकार की तरफ से किताब पर किसी तरह की रोक लगाने की कोई घोषणा नहीं हुई है। किताब का दुनियाभर में प्रकाशन तय समय पर हो रहा है। यह विवाद सिर्फ इस बात को लेकर है कि भारत में इसे कौन छापेगा और किस रूप में छापेगा। इसे सीधे तौर पर “किताब पर बैन” कहना सही नहीं होगा।

क्या भारत में किताब आएगी

पेंगुइन इंडिया के पीछे हटने के बाद भारत के दूसरे बड़े प्रकाशन घराने इस किताब में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, HarperCollins जैसी कंपनियां भारतीय संस्करण के अधिकार लेने की कोशिश में हैं। इसका मतलब है कि भारतीय पाठकों को यह किताब न मिलने की बात अभी कहना जल्दबाजी होगी। संभावना यही है कि कोई और प्रकाशक इसे भारत में लेकर आएगा।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील किताबों को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं।

वेंडी डोनिगर की किताब: अमेरिकी लेखिका वेंडी डोनिगर की किताब हिंदू धर्म पर आधारित थी। कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई और मामला अदालत तक पहुंचा। साल 2014 में पेंगुइन इंडिया ने एक समझौते के बाद इस किताब को भारतीय बाजार से वापस ले लिया था।

पूर्व सेना प्रमुख की किताब: पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब को लेकर भी 2026 में विवाद हुआ था। संसद में इसकी एक प्रति दिखाए जाने के बाद हंगामा हुआ। बाद में प्रकाशक ने साफ किया कि किताब आधिकारिक तौर पर छपी ही नहीं थी।

जो साको की किताब: जो साको की एक किताब, जो 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित थी, उसे लेकर भी भारत में प्रकाशन से पहले विवाद हुआ। बाद में यह किताब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छपी।

दिल्ली दंगों पर किताब: साल 2020 में एक किताब को लेकर भी विवाद हुआ था, जिसके बाद प्रकाशक ने उसे वापस ले लिया था। बाद में यह किताब किसी दूसरे प्रकाशक के जरिए सामने आई।

इन सभी उदाहरणों से पता चलता है कि भारत में संवेदनशील विषयों पर किताबें छापना प्रकाशकों के लिए हमेशा आसान नहीं रहा है।

प्रकाशक और लेखक, दोनों के अपने अधिकार

इस मामले में एक बात समझना जरूरी है। जिस तरह एक लेखक को अपनी बात अपने तरीके से लिखने का अधिकार है, उसी तरह प्रकाशक को भी यह तय करने का अधिकार है कि वह कोई किताब छापे या नहीं। अगर लेखक अपनी पांडुलिपि में बदलाव नहीं करना चाहता, तो प्रकाशक भी उस किताब को न छापने का फैसला ले सकता है।

सवाल तब खड़ा होता है जब यह पूछा जाए कि क्या यह फैसला सिर्फ व्यावसायिक था या इसके पीछे कोई और वजह भी थी। कांग्रेस इसी सवाल को उठा रही है, जबकि पेंगुइन इस तरह की व्याख्या को मानने से इनकार कर रहा है।

Sonia Gandhi Book: आगे क्या हो सकता है

फिलहाल तीन बातें साफ हैं। पहली, किताब का दुनियाभर में प्रकाशन 10 नवंबर 2026 को तय समय पर होगा। दूसरी, पेंगुइन इंडिया ने कहा है कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। तीसरी, कांग्रेस के नेताओं ने कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग को लेकर सवाल उठाए हैं, जिसे पेंगुइन ने स्वीकार नहीं किया है।

असली सवाल यह नहीं है कि किताब छपेगी या नहीं, क्योंकि वह तो दुनियाभर में छप ही रही है। असली सवाल यह है कि भारत में इसे आखिरकार कौन छापेगा और भारतीय पाठकों को वही किताब मिलेगी या इसमें कोई बदलाव होगा। आने वाले कुछ हफ्तों में इस सवाल का जवाब साफ हो सकता है।

सोनिया गांधी की यह किताब अभी छपी भी नहीं है, लेकिन इसने भारत में किताबों के प्रकाशन, अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक संवेदनशीलता से जुड़ी बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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