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गैरकानूनी रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि फिलहाल गैरकानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और हिरासत पर रोक नहीं लगाई जाएगी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों के पास प्रवासी मजदूरों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच करने का अधिकार है। हालांकि, गिरफ्तारी पर रोक जैसा कोई अंतरिम आदेश बेहद दूरगामी असर डाल सकता है, खासकर उन लोगों पर जो अवैध रूप से सीमा पार कर देश में घुस आए हैं।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने टिप्पणी की, “अगर कोई घुसपैठिया अवैध रूप से देश में आता है और उसे हिरासत में नहीं लिया जाता, तो वह लापता हो सकता है।” अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

केंद्र और 9 राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और नौ राज्यों—ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल—को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित राज्य इस मुद्दे पर अपना पक्ष पेश करें।

याचिका में लगाए गए आरोप

यह मामला वेस्ट बंगाल माइग्रेंट वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय के मई 2025 के एक सर्कुलर के आधार पर राज्यों में लोगों को केवल बंगाली भाषा बोलने या बंगाली भाषा के दस्तावेज रखने पर परेशान किया जा रहा है। उनका दावा है कि इस सर्कुलर का इस्तेमाल मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और निर्वासन के लिए किया जा रहा है।

अगली सुनवाई का इंतजार

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक का आदेश नहीं दिया जाएगा। केंद्र और राज्यों से जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार होगा।

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