
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर किसी कैदी ने अपनी निश्चित समय की उम्रकैद की सजा पूरी कर ली है, तो उसे तुरंत जेल से छोड़ देना चाहिए। इस फैसले से नीतीश कटारा हत्या मामले के दोषी सुखदेव पहलवान को रिहा किया जाएगा। अदालत ने चिंता जताई कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर कैदी जेल में ही मर जाएगा। यह फैसला उन कैदियों के लिए राहत है जो सजा पूरी करने के बाद भी जेल में बंद हैं।
क्या है Supreme Court Big Verdict का पूरा मामला?
नीतीश कटारा हत्या का मामला बहुत पुराना और चर्चित है। साल 2002 में नीतीश कटारा की हत्या हुई थी। इसमें सुखदेव पहलवान को दोषी ठहराया गया था। उसे 20 साल की उम्रकैद की सजा मिली थी। अब वह 20 साल जेल में काट चुका है। मार्च में उसकी सजा पूरी हो गई, लेकिन जेल वाले उसे छोड़ नहीं रहे थे। सुखदेव ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अदालत ने पहले उसे तीन महीने की छुट्टी दी थी, ताकि फैसला होने तक वह बाहर रह सके। अब कोर्ट ने साफ कहा कि निश्चित समय की सजा पूरी होने पर खुद-ब-खुद रिहा कर दो। अलग से कोई आदेश की जरूरत नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने जेल वालों को क्या फटकार लगाई?
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने जेल प्रशासन पर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों को क्यों बंद रखा जाता है? अगर यही चलता रहा तो कैदी जेल में ही मर जाएंगे। कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड को भी डांटा। बोर्ड ने सुखदेव के बर्ताव का बहाना बनाकर रिहाई रोकी थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि पुराने आदेश को क्यों नजरअंदाज किया? दिल्ली सरकार की वकील ने कहा कि सुखदेव को खुद रिहा होना चाहिए था, लेकिन बोर्ड ने रोक दिया। अब कोर्ट ने तुरंत रिहा करने का हुक्म दिया।
इस फैसले से क्या बदलेगा?
यह फैसला सिर्फ सुखदेव के लिए नहीं, बल्कि सभी कैदियों के लिए महत्वपूर्ण है। अगर सजा निश्चित सालों की है, जैसे 20 या 25 साल, तो पूरी होने पर रिहा करो। लेकिन अगर पूरी जिंदगी जेल में रहने की सजा है, तो ही छूट के लिए अपील कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में ही रिहाई की मांग की जा सकती है। इस फैसले से कई कैदी जो सजा काट चुके हैं, वे जल्दी बाहर आ सकते हैं। जेल वाले अब सावधान रहेंगे, नहीं तो कोर्ट की डांट पड़ेगी। यह आम लोगों के लिए न्याय की मिसाल है। अब देखना है कि सरकार और जेल वाले इस पर कितनी जल्दी अमल करते हैं।