
Satyapal Malik: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) का मंगलवार को निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। सत्यपाल मलिक अपनी बेबाकी और जनहित के लिए किए गए कार्यों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।
सत्यपाल मलिक का जीवन और योगदान
सत्यपाल मलिक का जन्म उत्तर प्रदेश के बागपत में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वे जम्मू-कश्मीर के अलावा गोवा, बिहार और मेघालय के राज्यपाल भी रहे। सत्यपाल मलिक ने अपनी स्पष्टवादिता और ईमानदारी के लिए खास पहचान बनाई। खासकर, जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम फैसले लिए, जिनमें अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे बड़े कदम शामिल थे।
उनके कार्यकाल में किसानों और आम लोगों के हित में कई नीतियां बनाई गईं। सत्यपाल मलिक ने हमेशा जनता की आवाज को बुलंद करने की कोशिश की। उनकी बेबाक टिप्पणियां और सरकार के खिलाफ साहसिक बयान उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाते थे। हाल के वर्षों में उनकी सेहत खराब होने के बावजूद वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे।
लंबी बीमारी और अस्पताल में भर्ती
सत्यपाल मलिक लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। मई 2025 से उनकी हालत और नाजुक हो गई थी। बताया जाता है कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं, जिसके कारण वे बोलने और सुनने की स्थिति में भी नहीं थे। वे 11 मई से दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने उनकी हालत को स्थिर करने की पूरी कोशिश की, लेकिन मंगलवार को उनका निधन हो गया।
देश ने खोया एक सच्चा जनसेवक
सत्यपाल मलिक के निधन पर कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक जताया है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- सत्यपाल मलिक जी ने हमेशा सच का साथ दिया और जनता के लिए लड़े। उनके निधन से देश ने एक साहसी और निष्ठावान नेता खो दिया है।