Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट का सख्त आदेश, पेशा नियमावली लागू करने की समय सीमा तय
झारखंड हाई कोर्ट का सख्त आदेश, 31 दिसंबर 2025 तक पेशा नियमावली लागू करें, आदिवासियों को मिलेंगे अधिकार

Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार को पंचायत (विस्तार से अनुसूचित क्षेत्र) अधिनियम, यानी पेशा (PESA) नियमावली को लागू करने के लिए कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस नियमावली को जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके अधिकार मिल सकें। इस आदेश के तहत झारखंड सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक पेशा नियमावली को पूरी तरह लागू करना होगा।
पेशा नियमावली क्या है?
पेशा अधिनियम 1996 में बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है, जो अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को उनके जल, जंगल, और जमीन पर अधिकार देता है। इस कानून का मकसद ग्राम सभाओं को मजबूत करना और स्थानीय संसाधनों पर समुदाय का नियंत्रण सुनिश्चित करना है। हालांकि, झारखंड में इस कानून को लागू करने में देरी के कारण हाई कोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट का आदेश और सरकार की जिम्मेदारी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पेशा नियमावली लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चीफ जस्टिस ने सरकार से पूछा कि आखिर इस कानून को लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सरकार इसकी प्रगति पर नियमित रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।
इसके साथ ही, कोर्ट ने सरकार को आदिवासी समुदायों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाने का भी आदेश दिया। इससे ग्रामीण और आदिवासी लोग अपने अधिकारों को समझ सकें और उनका उपयोग कर सकें।
आदिवासियों के लिए क्यों जरूरी है पेशा?
पेशा नियमावली आदिवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें अपने संसाधनों पर नियंत्रण देता है। इसके तहत ग्राम सभा को यह अधिकार है कि वह अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों, जैसे खनिज, जंगल, और पानी, पर फैसला ले सके। साथ ही, यह नियमावली छोटे स्तर के उद्योगों और परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार भी ग्राम सभाओं को देती है।
समय सीमा और जनता की उम्मीद
झारखंड सरकार ने अदालत के समक्ष आश्वासन दिया है कि वह इस निर्देश का अनुपालन करेगी और 31 दिसंबर 2025 तक पेशा नियमावली को प्रभावी रूप से लागू कर देगी। स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदायों को उम्मीद है कि यह कानून उनके जीवन में बदलाव लाएगा और उनकी जमीन और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।