
कोलकाता: पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) ने 2016 की शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं से जुड़े 1,804 ‘दागी’ उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं।
यह सूची 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद जारी की गई है जिसमें सात दिनों के भीतर नाम सार्वजनिक करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा है कि वह नई भर्ती प्रक्रिया पर कड़ी नज़र रखेगा।
यह प्रकाशन बंगाल के सबसे विवादास्पद भर्ती विवादों में से एक के बीच हुआ है। अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने WBSSC के माध्यम से की गई 25,753 नियुक्तियों को अमान्य घोषित कर दिया था, क्योंकि उसने पाया था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया ‘दूषित और दागी’ थी।
इनमें से 5,303 व्यक्ति दागी पाए गए, जिनमें वे 1,804 शिक्षक भी शामिल हैं जिनके नाम अब सार्वजनिक किए गए हैं।
यह सूची 30 अगस्त की रात लगभग 8 बजे आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई थी। इसमें केवल दागी उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर शामिल हैं, लेकिन विशेष रूप से उनके संबंधित स्कूल या विषय का उल्लेख नहीं है।
यह सीमित विवरण आधिकारिक सूचना में संक्षिप्तता बनाए रखते हुए उनकी पहचान सार्वजनिक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश और समय सीमा
28 अगस्त को, न्यायमूर्ति संजय कुमार और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने WBSSC को एक सप्ताह के भीतर सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया, और इस बात पर ज़ोर दिया कि नई भर्ती प्रक्रिया सख्त न्यायिक निगरानी में होनी चाहिए।
अदालत का यह आदेश कानूनी जाँच के बाद आया है, जो कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 2016 के चयनों को रद्द करने के साथ शुरू हुई और सर्वोच्च न्यायालय के अप्रैल के फैसले के साथ समाप्त हुई।
नई परीक्षाओं में बाधा
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दागी सूची में नामित उम्मीदवारों को 7 और 14 सितंबर को नई निर्धारित भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (WBSSC) ने पहले सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया था कि “नई भर्ती प्रक्रिया में एक भी दागी उम्मीदवार को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी”। यह प्रकाशन उस आश्वासन की पूर्ति का प्रतीक है।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की शिक्षक भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक नई, विश्वसनीय चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आधार भी तैयार करता है, जिसकी हाल के वर्षों में इस घोटाले के सामने आने के बाद से तत्काल आवश्यकता थी।