
मालेगांव बम धमाका केस में विशेष एनआईए अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद अब पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक गंभीर दावा किया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान उनसे ज़बरदस्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं के नाम लेने को कहा गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
अदालत के बाहर दिया बयान
शनिवार को भोपाल से सांसद रहीं प्रज्ञा ठाकुर जब अदालत में ज़मानत की औपचारिकताओं को पूरा करने पहुंचीं, तो मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने ये आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “मुझे कहा गया कि अगर मैंने इन नेताओं का नाम नहीं लिया, तो मुझे टॉर्चर किया जाएगा। पर मैंने किसी का नाम नहीं लिया, क्योंकि मैं झूठ बोलकर किसी को फंसाना नहीं चाहती थी।”
न्यायालय ने खारिज किए थे यातना के आरोप
विशेष एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने अपने 1036 पन्नों के फैसले में प्रज्ञा ठाकुर सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपियों द्वारा लगाए गए यातना के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है और उन्हें सबूतों के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
“अस्पताल में भी अवैध हिरासत में रखा गया”
प्रज्ञा ठाकुर ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल में भी अवैध हिरासत में रखा गया था, जहां उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्होंने कहा, “मुझे बेहोश अवस्था में अस्पताल में रखा गया, मेरे फेफड़ों को नुकसान हुआ।” उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम को वह एक किताब के ज़रिए सामने लाने की तैयारी कर रही हैं।
“ये सनातन और हिंदुत्व की जीत है”
अपने बयान के अंत में साध्वी प्रज्ञा ने अदालत के फैसले को धर्म और हिंदुत्व की विजय बताया। उन्होंने कहा कि “यह न्याय की जीत है। अब हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन लोगों ने अन्याय किया है, उन्हें सजा मिले।”
2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में एनआईए ने प्रज्ञा ठाकुर सहित सात लोगों को आरोपी बनाया था। करीब 16 वर्षों तक चले इस केस में अदालत ने हाल ही में सबूतों के अभाव में सभी को बरी कर दिया।
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