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एंडगेम बॉम्बर: ट्रंप का गुप्त न्यूक्लियर हथियार रूस-चीन को देगा कड़ी चेतावनी

डेस्क: अमेरिका की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में विकसित गुप्त न्यूक्लियर हथियार ‘एंडगेम बॉम्बर’ अब पूरी तरह से सामने आ गया है। यह AGM-181 LRSO (लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ) नामक क्रूज मिसाइल रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को स्पष्ट चेतावनी देने का माध्यम बनेगी। कैलिफोर्निया में एक प्लेनस्पॉटर द्वारा पहली बार कैद की गई इस मिसाइल की तस्वीरें जून 2025 में जारी हुईं, जिसने वैश्विक रक्षा जगत में हलचल मचा दी। पेंटागन ने इसे लंबे समय तक गुप्त रखा था, लेकिन अब यह अमेरिकी वायुसेना की ताकत का प्रतीक बन चुकी है।

ट्रंप के राष्ट्रपति काल (2017-2021) में इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया गया। रेथियन कंपनी को 2020 में पहला कॉन्ट्रैक्ट मिला, और 2025 में इसकी पहली फ्लाइट टेस्ट सफल रही। 2030 तक यह पूरी तरह से अमेरिकी सेना में शामिल हो जाएगी, जो पुरानी AGM-86B मिसाइल (1982 से सक्रिय) को बदल लेगी। यह मिसाइल B-52 बॉम्बर और आगामी B-21 रेडर स्टेल्थ बॉम्बर से लॉन्च की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हथियार अमेरिका की न्यूक्लियर ट्रायड (समुद्री, स्थलीय और हवाई) को और मजबूत करेगा, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा।

विकास की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ:

एंडगेम बॉम्बर का विकास अमेरिका की रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जो कोल्ड वॉर के बाद के दौर में न्यूक्लियर डिटरेंस को मजबूत करने पर केंद्रित है। ट्रंप प्रशासन ने 2018 में राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS) के तहत इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिसमें रूस के हाइपरसोनिक हथियारों और चीन की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने पर जोर दिया गया। पेंटागन के अनुसार, यह मिसाइल पुरानी AGM-86B को अपग्रेड करने का सस्ता और प्रभावी विकल्प है, जो 40 वर्षों से अधिक समय से सेवा में है।

2025 में कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के पास इसकी पहली साइटिंग हुई, जब एक स्थानीय अवलोकनकर्ता ने B-52 बॉम्बर से लटकती इस मिसाइल को कैमरे में कैद किया। पेंटागन ने इसे ‘एंडगेम’ नाम दिया, जो अमेरिकी रक्षा की अंतिम चाल का प्रतीक है। विकास बजट गुप्त रखा गया, लेकिन अनुमानित लागत 20 बिलियन डॉलर से अधिक है, जिसमें 100 से ज्यादा मिसाइलों का उत्पादन शामिल है।

रणनीतिक महत्व और वैश्विक प्रभाव:

यह हथियार मुख्य रूप से डिटरेंस के लिए विकसित किया गया है, अर्थात दुश्मन को हमले की सोच तक न आने देना। रूस के अवांगार्ड हाइपरसोनिक मिसाइलों और चीन की डोंगफेंग-21D जैसी एंटी-शिप मिसाइलों के जवाब में अमेरिका ने इसे तैनात करने का फैसला किया। पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा, “यह मिसाइल अमेरिका की रक्षा क्षमता को 21वीं सदी के खतरों के अनुरूप बनाएगी।” (पेंटागन स्टेटमेंट, 2025)।

ट्रंप ने 2019 में एक इंटरव्यू में न्यूक्लियर आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा था, “हमारी सेना को सबसे मजबूत बनाना होगा, ताकि कोई दुश्मन हिम्मत न करे।” यह उद्धरण एंडगेम बॉम्बर के विकास को प्रेरित करने वाला लगता है। रूस और चीन के लिए यह चेतावनी स्पष्ट है: अमेरिका किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल START संधि (न्यूक्लियर हथियार सीमा) के दायरे में आती है, लेकिन ट्रंप के पुन: सत्ता में आने पर इसका विस्तार हो सकता है।

वैश्विक स्तर पर, यह हथियार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है। चीन की ताइवान पर बढ़ती दावेदारी और रूस की यूक्रेन नीति के बीच अमेरिका की यह चाल संतुलन बनाए रखने की कोशिश है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में न्यूक्लियर प्रसार की आशंकाएं भी उठ रही हैं।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण:

रक्षा विश्लेषक डॉ. जेनिफर कीच (CSIS, वाशिंगटन) ने हाल ही में कहा, “एंडगेम बॉम्बर जैसी तकनीक अमेरिका को रणनीतिक लाभ देगी, लेकिन यह हथियारों की होड़ को भी तेज कर सकती है।” (CSIS रिपोर्ट, 2025)। इसी तरह, पूर्व पेंटागन अधिकारी मार्क श्नाइडर ने टिप्पणी की, “यह मिसाइल पुरानी तकनीक को पीछे छोड़ते हुए सटीकता और स्टेल्थ का नया मानक स्थापित करेगी।” ये उद्धरण इस हथियार की रणनीतिक गहराई को उजागर करते हैं।

निष्कर्ष: एंडगेम बॉम्बर न केवल ट्रंप की रक्षा विरासत का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक दोधारी तलवार भी। रूस और चीन को चेतावनी देते हुए यह अमेरिका की प्रतिरक्षा क्षमता को अभेद्य बनाएगा, लेकिन साथ ही अंतरराष्ट्रीय संवाद की आवश्यकता भी रेखांकित करता है। 2030 तक पूरी तरह तैनात होने पर यह न्यूक्लियर डिटरेंस का नया अध्याय लिखेगा। न्यूज मीडिया किरण आपको ऐसी अपडेट्स के साथ जोड़े रखेगा। क्या यह हथियार विश्व शांति सुनिश्चित करेगा या तनाव बढ़ाएगा? समय बताएगा।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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