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न्यूक्लियर टेस्ट को लेकर ट्रंप के ऐलान ने बढ़ाई हलचल-परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?

 डेस्क: 30 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अप्रत्याशित घोषणा की, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पेंटागन को कहा है कि अमेरिका ने ३३ वर्षों के बाद फिर से न्यूक्लियर हथियारों की परीक्षण शुरू कीया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापार वार्ता से पहले ट्रंप ने यह घोषणा की, जिससे विश्वव्यापी तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने इसे रूस और चीन की “न्यूक्लियर गतिविधियों” का जवाब बताया, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम परमाणु हथियारों को बढ़ावा देगा और दुनिया को महायुद्ध की ओर ले जा सकता है।

दुनिया में बढ़ी परमाणु हथियारों के परीक्षण की होड़ 

21 अक्टूबर को रूस ने एक न्यूक्लियर-सक्षम बुरेवेस्टनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जो 8,700 मील या 14000 किलोमीटर की दूरी पर 15 घंटे हवा में रही, जिसके बाद ट्रंप ने घोषणा की। मॉस्को ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” में शामिल किया। रूस ने इसके तुरंत बाद “पोसेडोन न्यूक्लियर ड्रोन” की भी जांच की, जो उसकी वर्तमान मिसाइल से एक हजार गुना खतरनाक बताया जा रहा है। अब ट्रंप का यह नया बयान कि अमेरिका फिर से परमाणु परीक्षण करने जा रहा है, रूस के पिछले परीक्षणों से प्रेरित है। क्रेमलिन ने ट्रंप की घोषणा पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अगर अमेरिका वास्तविक विस्फोट परीक्षण करेगा तो “उचित कदम” उठाया जाएगा।

अमेरिका का परीक्षण भड़का सकता है न्यूक्लियर होड़

ट्रंप का यह कदम तकनीकी रूप से जटिल है। मगर उनका यह ऐलान न्यूक्लियर हथियारों की होड़ को और अधिक बढ़ा सकता है। हालांकि अमेरिका की नेवादा टेस्ट साइट को फिर से तैयार करने में वर्ष लग सकते हैं, लेकिन यह कदम राजनीतिक रूप से विस्फोटक है। यह तत्काल संभव नहीं है, फिर भी यह हथियारों की होड़ को भड़काएगा।

परमाणु युद्ध का बढ़ सकता है वैश्विक खतरा

अगर अमेरिका ने परमाणु परीक्षण किया तो दुनिया में परमाणु युद्ध का वास्तविक खतरा बढ़ सकता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की 2025 रिपोर्ट ने भी चेतावनी दी है कि कमजोर हथियार नियंत्रण व्यवस्था के बीच न्यूक्लियर हथियारों की नई होड़ शुरू हो रही है।

किस देश के पास हैं सबसे ज्यादा परमाणु हथियार

वैश्विक न्यूक्लियर हथियारों की संख्या शीत युद्ध के बाद 70,000 से घटकर 12,241 हो गई। अमेरिका और रूस के पास विश्व के 90 फीसदी परमाणु हथियार हैं। इनमें से रूस  के पास 5,580 परमाणु बम और अमेरिका के पास 5,044 परमाणु बमों की खेप है। वहीं चीन 2030 तक 1,000 न्यूक्लियर हथियारों के लक्ष्य को लेकर चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र की सितंबर 2025 रिपोर्ट में कहा गया कि यूक्रेन युद्ध, ताइवान संकट और मध्य पूर्व तनाव से इसका जोखिम बढ़ा है।

अमेरिका का रूस, चीन व उत्तर कोरिया के साथ बढ़ सकता है परमाणु तनाव

कार्नेगी एंडोमेंट की अप्रैल 2025 रिपोर्ट चेताती है कि अमेरिका-चीन-रूस-उत्तर कोरिया तनाव से पारंपरिक युद्ध न्यूक्लियर में बदल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंताजनक है, जहां ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति है, लेकिन पड़ोसी पाकिस्तान और चीन की होड़ से भारत पर भी दबाव बढ़ रहा। विशेषज्ञ कहते हैं कि आधुनिक तकनीकें जैसे एआई और हाइपरसोनिक मिसाइलें जोखिम दोगुना कर रही हैं। ट्रंप के सलाहकारों को भी यह ऐलान चौंका गया है।

निष्कर्ष:

परमाणु होड़ से उत्पन्न खतरा ,शांति की कोशिश अब आवश्यक है क्योंकि ट्रंप की 30 अक्टूबर 2025 की घोषणा ने विश्व शांति को खतरा बना दिया है। रूस, चीन और उत्तर कोरिया में हुए परीक्षणों से प्रेरित यह कदम न्यूक्लियर होड़ को नया जीवन दे रहा है, जहाँ 90% अमेरिका-रूस के पास 12,241 हथियारों का भंडार एक महायुद्ध को जन्म दे सकता है। SIPRI और UN की रिपोर्टें स्पष्ट हैं— AI, हाइपरसोनिक मिसाइलें और क्षेत्रीय तनाव के कारण जोखिम दोगुना हो गया है। भारत जैसे देशों को ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति को बल देना चाहिए। यदि नहीं, तो शीत युद्ध की छाप गर्म युद्ध बन जाएगी. बहुपक्षीय कूटनीतिक और हथियार नियंत्रण वार्ताओं का समय आ गया है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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