Jharkhand News: रांची शहर के डिग डीआईजी ग्राउंड इलाके में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। यहां बने अवैध मकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। इससे 16 परिवार बेघर हो गए। ये लोग सालों से यहां रह रहे थे। अचानक कार्रवाई से वे सड़क पर आ गए। उनके सामान भी बाहर रख दिए गए। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और अवैध कब्जा हटाया गया है।
क्यों तोड़े गए मकान?
डीआईजी ग्राउंड रांची का पुराना और महत्वपूर्ण इलाका है। यहां कई सरकारी दफ्तर और आवास हैं। कुछ लोग सालों पहले यहां झोपड़ी बनाकर रहने लगे थे। धीरे-धीरे पक्के मकान बन गए। प्रशासन ने कई बार नोटिस दिया कि यह सरकारी जमीन है, खाली करें। लेकिन लोग नहीं माने।
अंत में जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाया। सुबह से ही पुलिस बल तैनात था। कोई विरोध न कर सके, इसके लिए सख्त सुरक्षा थी। कुछ घंटों में सभी अवैध निर्माण गिरा दिए गए।
परिवारों की क्या स्थिति?
16 परिवारों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। वे रोते-बिलखते बाहर निकले। उनके घर का सारा सामान सड़क पर बिखर गया। ठंड का मौसम है, लेकिन रहने की कोई जगह नहीं। कुछ लोग रिश्तेदारों के पास गए, तो कुछ खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
एक महिला ने कहा कि हम गरीब हैं, कहीं और जमीन नहीं है। सालों से यहीं रह रहे थे। बच्चों की पढ़ाई यहीं होती थी। अब सब कुछ खत्म हो गया। लोग सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
जिला उपायुक्त ने बताया कि यह जमीन गृह विभाग की है। यहां अवैध कब्जा था। कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब कार्रवाई जरूरी थी। आगे यहां पार्क या अन्य सरकारी काम होगा।
प्रशासन का कहना है कि अवैध कब्जा हटाना कानूनी प्रक्रिया है। शहर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। बेघर हुए लोगों को कोई विशेष मदद का वादा नहीं किया गया।
Jharkhand News: लोगों की क्या प्रतिक्रिया?
इलाके के लोग कार्रवाई से सहमे हैं। कुछ ने कहा कि गरीबों पर ही बुलडोजर चलता है। अमीरों के अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं होती। विपक्षी दल इसे गरीब विरोधी कार्रवाई बता रहे हैं। उन्होंने सरकार से बेघर परिवारों को रहने की जगह देने की मांग की है।
रांची में अवैध कब्जे की समस्या पुरानी है। कई जगहों पर सरकारी जमीन पर लोग रहते हैं। प्रशासन समय-समय पर ऐसी कार्रवाई करता रहता है। लेकिन हर बार गरीब परिवार ही प्रभावित होते हैं।
यह घटना दिखाती है कि शहर के विकास और गरीबों की मजबूरी के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल है। बेघर हुए 16 परिवारों की मुश्किल अब बढ़ गई है। सरकार अगर चाहे तो उन्हें वैकल्पिक जगह दे सकती है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि इन परिवारों को जल्द मदद मिले। ठंड में सड़क पर रहना आसान नहीं है।


