UNA, 7 सितंबर 2026: शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी के दरबार में सोमवार सुबह मां छिन्नमस्तिका के प्राकृतिक पिंडी स्वरूप का भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। प्रातःकालीन श्रृंगार के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र रहे। मां के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्तों ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना की।
मां चिंतपूर्णी को भक्तों की सभी चिंताओं को हरने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। सोमवार सुबह मां के प्राकृतिक पिंडी स्वरूप को विधि-विधान से सजाया गया। श्रृंगार के बाद मां का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और दिव्य नजर आया।
श्रद्धालुओं के बीच मां चिंतपूर्णी के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए चिंतपूर्णी पहुंचते हैं और मां के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
मां के प्रातःकालीन दर्शन के अवसर पर भक्तों ने श्रद्धा भाव से मां का स्मरण किया और जयकारे लगाए। भक्तों का कहना है कि मां के प्राकृतिक पिंडी स्वरूप के दर्शन मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
भक्तों की आस्था को इन पंक्तियों में भी व्यक्त किया गया है—
“चित्त में बसो चिंतपूर्णी, छिन्नमस्तिका मात।
सात बहनों में लाड़ली, हो जग में विख्यात॥
माईदास पर की कृपा, रूप दिखाया श्याम।
सबकी हो वरदायनी, शक्ति तुम्हें प्रणाम॥”
मां चिंतपूर्णी को भक्तवत्सल देवी माना जाता है। श्रद्धालु मां से अपने परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। भक्तों की कामना है कि मां छिन्नमस्तिका चिंतपूर्णी की कृपा सभी पर बनी रहे और हर व्यक्ति के जीवन से चिंताएं दूर हों।
जय माता दी।

