New Delhi: मरीज जिस दवा पर भरोसा करके बीमारी से लड़ता है, अगर उसमें दावा की गई सक्रिय दवा की मात्रा ही बेहद कम हो या बिल्कुल न मिले, तो उपचार की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में 199 दवा नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि एक नमूने को नकली घोषित किया गया।
जुलाई की जांच सूची में अलग-अलग श्रेणियों की दवाओं में सक्रिय औषधीय घटक की मात्रा, पहचान, घुलने की क्षमता और अन्य गुणवत्ता मानकों से जुड़ी कमियां सामने आईं। हालांकि, किसी नमूने के गुणवत्ता मानक पर खरा न उतरने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। मामला विशिष्ट बैच/नमूने की गुणवत्ता से जुड़ा होता है।



